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सावधान! आपके आधार से खुल सकता है साइबर ठगों का बैंक खाता, वाराणसी में 6 गिरफ्तार; ऐसे चलता था पूरा खेल

By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 05:57 PM

वाराणसी में साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को पैसों का लालच देकर उनके आधार कार्ड में फर्जी तरीके से पता बदलवाता था। इसके बाद उसी आधार के सहारे अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे और बैंक से मिलने वाली चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड समेत पूरी बैंक किट साइबर अपराधियों तक पहुंचा दी जाती थी। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

सिगरा थाना पुलिस और साइबर अपराध शाखा की संयुक्त टीम ने प्रदेशव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन साइ-वज्र’ के तहत यह कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों में गिरोह की कथित महिला सरगना और बैंक की चेकबुक, पासबुक व डेबिट कार्ड पहुंचाने में मदद करने वाला एक डाककर्मी भी शामिल है। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।

21 साइबर शिकायतों से जुड़ा है नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े खातों और नेटवर्क के खिलाफ पूरे देश में साइबर अपराध की 21 शिकायतें दर्ज हैं। इन मामलों में कुल 76 लाख 44 हजार 476 रुपये से अधिक की साइबर ठगी का लिंक सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बैंक खातों के जरिए किन-किन साइबर अपराधियों तक ठगी की रकम पहुंची और इस नेटवर्क में इनके अलावा कितने लोग शामिल हैं।

पहले आधार में बदलते थे पता, फिर खुलवाते थे बैंक खाता
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य सबसे पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिन्हें कुछ पैसों का लालच देकर अपने साथ जोड़ा जा सके। इसके बाद उनके आधार कार्ड में दर्ज स्थायी पते को कथित तौर पर कूटरचित तरीके से बदलकर वाराणसी के सिगरा इलाके का पता दिखाया जाता था। इसी फर्जी पते वाले आधार कार्ड के आधार पर संबंधित व्यक्ति के नाम से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे।

बैंक किट घर पहुंचने से पहले ही कर लेते थे अपने कब्जे में
खाता खुलने के बाद बैंक की ओर से चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड नए पते पर भेजे जाते थे। पुलिस का आरोप है कि गिरोह के सदस्य बैंक किट के संबंधित पते पर पहुंचने से पहले ही डाककर्मी से संपर्क कर लेते थे। इसके बाद चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड को अपने कब्जे में लेकर बैंक खाते से जुड़े मोबाइल सिम के साथ पैक किया जाता था।

चेकबुक से लेकर मोबाइल सिम तक पहुंचता था साइबर अपराधियों के पास
पुलिस के मुताबिक, बैंक किट और खाते से जुड़े मोबाइल सिम को बाद में कोरियर के जरिए साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। इस तरह साइबर ठगों को ऐसे बैंक खाते उपलब्ध हो जाते थे, जिनका इस्तेमाल वे कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने और उसे आगे भेजने के लिए कर सकते थे। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए।

वाराणसी के महमूरगंज इलाके से हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने बताया कि छह आरोपियों को 26 जुलाई 2026 को महमूरगंज स्थित ओम पब्लिक स्कूल तिराहे के पास से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल कुमार, आरती कुमारी, मालती, उमंग कुमार, जितेंद्र कुमार कन्नौजिया और शोभनाथ के रूप में बताई गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की उम्र करीब 19 वर्ष से 55 वर्ष के बीच है।

4 चेकबुक और 11 पासबुक समेत बड़ी बरामदगी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग बैंकों की चार चेकबुक, तीन सीलबंद चेकबुक, तीन सीलबंद डेबिट कार्ड और 11 पासबुक बरामद की हैं। इसके अलावा छह मोबाइल फोन, दो पैन कार्ड और तीन कूटरचित आधार कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं। बरामद सामान की जांच कर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनका इस्तेमाल किन बैंक खातों और किन साइबर अपराध मामलों में किया जाना था।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, आगे की जांच जारी
इस मामले में सिगरा थाने में मुकदमा संख्या 0332/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस गिरोह के आर्थिक लेनदेन, बैंक खातों और साइबर अपराधियों से इनके संपर्क की कड़ियां खंगाल रही है।

जांच में सामने आएगा साइबर ठगी के नेटवर्क का अगला कनेक्शन
पुलिस की जांच का अगला फोकस उन लोगों पर है, जो फर्जी पते वाले आधार कार्ड तैयार कराने, बैंक खाते खुलवाने और बैंक किट को साइबर अपराधियों तक पहुंचाने के लिए इस गिरोह से जुड़े थे। साथ ही उन साइबर अपराधियों की पहचान करने की कोशिश भी की जा रही है, जिन्हें ये बैंक खाते और बैंक से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस का मानना है कि पूछताछ और बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।

गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में ये अधिकारी और जवान रहे शामिल
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में सिगरा थाना प्रभारी निरीक्षक शिवाकान्त मिश्र, उपनिरीक्षक भरत भट्ट, उपनिरीक्षक रोहित त्रिपाठी, महिला उपनिरीक्षक काजोल सिंह, मुख्य आरक्षी ब्रह्मदेव सिंह, आरक्षी मृत्युंजय सिंह, आरक्षी सुमित साहू और महिला आरक्षी काजल शामिल रहीं। टीम ने साइबर अपराध शाखा के साथ मिलकर आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी की कार्रवाई को अंजाम दिया।

साइबर अपराध शाखा की टीम ने भी निभाई अहम भूमिका
इस पूरे मामले की जांच और आरोपियों तक पहुंचने में वाराणसी साइबर अपराध शाखा की टीम की भी अहम भूमिका रही। साइबर अपराध शाखा के प्रभारी उपनिरीक्षक मनोज कुमार तिवारी और उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार जायसवाल ने पुलिस टीम के साथ मिलकर मामले की जांच की और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े सुराग जुटाए।

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सावधान! आपके आधार से खुल सकता है साइबर ठगों का बैंक खाता, वाराणसी में 6 गिरफ्तार; ऐसे चलता था पूरा खेल

By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 05:57 PM

वाराणसी में साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को पैसों का लालच देकर उनके आधार कार्ड में फर्जी तरीके से पता बदलवाता था। इसके बाद उसी आधार के सहारे अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे और बैंक से मिलने वाली चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड समेत पूरी बैंक किट साइबर अपराधियों तक पहुंचा दी जाती थी। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

सिगरा थाना पुलिस और साइबर अपराध शाखा की संयुक्त टीम ने प्रदेशव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन साइ-वज्र’ के तहत यह कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों में गिरोह की कथित महिला सरगना और बैंक की चेकबुक, पासबुक व डेबिट कार्ड पहुंचाने में मदद करने वाला एक डाककर्मी भी शामिल है। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।

21 साइबर शिकायतों से जुड़ा है नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े खातों और नेटवर्क के खिलाफ पूरे देश में साइबर अपराध की 21 शिकायतें दर्ज हैं। इन मामलों में कुल 76 लाख 44 हजार 476 रुपये से अधिक की साइबर ठगी का लिंक सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बैंक खातों के जरिए किन-किन साइबर अपराधियों तक ठगी की रकम पहुंची और इस नेटवर्क में इनके अलावा कितने लोग शामिल हैं।

पहले आधार में बदलते थे पता, फिर खुलवाते थे बैंक खाता
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य सबसे पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिन्हें कुछ पैसों का लालच देकर अपने साथ जोड़ा जा सके। इसके बाद उनके आधार कार्ड में दर्ज स्थायी पते को कथित तौर पर कूटरचित तरीके से बदलकर वाराणसी के सिगरा इलाके का पता दिखाया जाता था। इसी फर्जी पते वाले आधार कार्ड के आधार पर संबंधित व्यक्ति के नाम से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे।

बैंक किट घर पहुंचने से पहले ही कर लेते थे अपने कब्जे में
खाता खुलने के बाद बैंक की ओर से चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड नए पते पर भेजे जाते थे। पुलिस का आरोप है कि गिरोह के सदस्य बैंक किट के संबंधित पते पर पहुंचने से पहले ही डाककर्मी से संपर्क कर लेते थे। इसके बाद चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड को अपने कब्जे में लेकर बैंक खाते से जुड़े मोबाइल सिम के साथ पैक किया जाता था।

चेकबुक से लेकर मोबाइल सिम तक पहुंचता था साइबर अपराधियों के पास
पुलिस के मुताबिक, बैंक किट और खाते से जुड़े मोबाइल सिम को बाद में कोरियर के जरिए साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। इस तरह साइबर ठगों को ऐसे बैंक खाते उपलब्ध हो जाते थे, जिनका इस्तेमाल वे कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने और उसे आगे भेजने के लिए कर सकते थे। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए।

वाराणसी के महमूरगंज इलाके से हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने बताया कि छह आरोपियों को 26 जुलाई 2026 को महमूरगंज स्थित ओम पब्लिक स्कूल तिराहे के पास से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल कुमार, आरती कुमारी, मालती, उमंग कुमार, जितेंद्र कुमार कन्नौजिया और शोभनाथ के रूप में बताई गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की उम्र करीब 19 वर्ष से 55 वर्ष के बीच है।

4 चेकबुक और 11 पासबुक समेत बड़ी बरामदगी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग बैंकों की चार चेकबुक, तीन सीलबंद चेकबुक, तीन सीलबंद डेबिट कार्ड और 11 पासबुक बरामद की हैं। इसके अलावा छह मोबाइल फोन, दो पैन कार्ड और तीन कूटरचित आधार कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं। बरामद सामान की जांच कर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनका इस्तेमाल किन बैंक खातों और किन साइबर अपराध मामलों में किया जाना था।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, आगे की जांच जारी
इस मामले में सिगरा थाने में मुकदमा संख्या 0332/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस गिरोह के आर्थिक लेनदेन, बैंक खातों और साइबर अपराधियों से इनके संपर्क की कड़ियां खंगाल रही है।

जांच में सामने आएगा साइबर ठगी के नेटवर्क का अगला कनेक्शन
पुलिस की जांच का अगला फोकस उन लोगों पर है, जो फर्जी पते वाले आधार कार्ड तैयार कराने, बैंक खाते खुलवाने और बैंक किट को साइबर अपराधियों तक पहुंचाने के लिए इस गिरोह से जुड़े थे। साथ ही उन साइबर अपराधियों की पहचान करने की कोशिश भी की जा रही है, जिन्हें ये बैंक खाते और बैंक से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस का मानना है कि पूछताछ और बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।

गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में ये अधिकारी और जवान रहे शामिल
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में सिगरा थाना प्रभारी निरीक्षक शिवाकान्त मिश्र, उपनिरीक्षक भरत भट्ट, उपनिरीक्षक रोहित त्रिपाठी, महिला उपनिरीक्षक काजोल सिंह, मुख्य आरक्षी ब्रह्मदेव सिंह, आरक्षी मृत्युंजय सिंह, आरक्षी सुमित साहू और महिला आरक्षी काजल शामिल रहीं। टीम ने साइबर अपराध शाखा के साथ मिलकर आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी की कार्रवाई को अंजाम दिया।

साइबर अपराध शाखा की टीम ने भी निभाई अहम भूमिका
इस पूरे मामले की जांच और आरोपियों तक पहुंचने में वाराणसी साइबर अपराध शाखा की टीम की भी अहम भूमिका रही। साइबर अपराध शाखा के प्रभारी उपनिरीक्षक मनोज कुमार तिवारी और उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार जायसवाल ने पुलिस टीम के साथ मिलकर मामले की जांच की और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े सुराग जुटाए।

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