By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 06:32 PM
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत देशभर के युवाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती गांवों में जाकर वहां के जीवन और विकास को करीब से देखने वाले युवाओं के अनुभव सुने। पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की कि जब भी वे यात्रा या भ्रमण पर जाएं, तो स्थानीय लोगों से खरीदारी जरूर करें। उन्होंने कहा कि अगर लोग अपनी यात्रा के खर्च का कम से कम पांच प्रतिशत हिस्सा स्थानीय लोगों से सामान खरीदने पर खर्च करें, तो इससे सीमावर्ती और दूरदराज के गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से बातचीत के दौरान कहा कि देश के सीमावर्ती गांव केवल नक्शे पर मौजूद जगहें नहीं हैं, बल्कि भारत की सुरक्षा, संस्कृति और विविधता का अहम हिस्सा हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन को करीब से समझना देश के बाकी हिस्सों के लोगों के लिए भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपने भ्रमण के अनुभव दूसरों तक पहुंचाने और लोगों को सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में जागरूक करने का आह्वान किया।
245 गांवों से जुड़े 5000 से ज्यादा युवा
विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 245 गांवों से 5000 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान माय भारत से जुड़े युवा सदस्यों ने सीमावर्ती इलाकों की अपनी यात्राओं के अनुभव प्रधानमंत्री के साथ साझा किए। युवाओं ने बताया कि इन गांवों में उन्हें स्थानीय लोगों के जीवन, वहां की चुनौतियों और केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे विकास कार्यों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।
युवाओं ने बताई सीमावर्ती गांवों की आंखों देखी तस्वीर
प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद के दौरान युवाओं से सीमावर्ती इलाकों की यात्रा को लेकर कई सवाल पूछे। युवाओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन में किस तरह बदलाव आ रहा है। उन्होंने स्थानीय महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों से मुलाकात और गांवों में लोगों के साथ बिताए समय का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी बोले- देश का युवा हर जगह एक जैसा सोचता है
प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांव देश के किसी भी हिस्से में हों, वहां रहने वाले लोगों के मन में देश के प्रति भावनाएं एक जैसी हैं। भले ही भौगोलिक दूरी हो, लेकिन भावनात्मक रूप से पूरा देश एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ सीमावर्ती गांवों को देश के आखिरी गांव कहने के बजाय देश के पहले गांव के रूप में देखने की दिशा में काम किया गया है।
पहले ‘आखिरी गांव’ कहे जाते थे सीमावर्ती इलाके
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक सीमावर्ती इलाकों में बसे गांवों को देश के आखिरी गांव के तौर पर देखा जाता रहा। अब सोच बदलने की जरूरत है। इन गांवों को देश के पहले गांव के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास केवल वहां रहने वाले लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है।
‘मेरे देश के युवा के लिए सबसे पहले देश’
प्रधानमंत्री ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र सबसे पहले होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करने में युवा बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के युवाओं के बीच संवाद और आपसी जुड़ाव देश की एकता को और मजबूत करेगा।
युवाओं से बोले- अपने अनुभव सोशल मीडिया पर भी साझा करें
पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि वे सीमावर्ती गांवों की अपनी यात्राओं और वहां मिले अनुभवों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं के अनुभवों के जरिए देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोग भी इन इलाकों की वास्तविक स्थिति को समझ सकते हैं। उन्होंने युवाओं के सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे अनुभवों का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उनकी यात्राओं की रील देखकर दूसरे राज्यों में रहने वाले उनके दोस्त भी हैरान रह गए होंगे।
डिजिटल इंडिया पर युवाओं ने जताया भरोसा
संवाद के दौरान एक युवा ने प्रधानमंत्री से कहा कि डिजिटल इंडिया ऐसा अभियान है, जिस पर देश के कोने-कोने में लोगों का भरोसा बना हुआ है। युवाओं ने बताया कि डिजिटल सुविधाओं का असर अब दूरदराज के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने गांवों में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के साथ हुई मुलाकात और उनके कामकाज को समझने के अनुभव भी साझा किए।
3 लाख युवाओं ने लिया था प्रतियोगिता में हिस्सा
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस पहल से जुड़ी प्रतियोगिता में करीब तीन लाख युवाओं ने हिस्सा लिया था। इनमें से 400 से अधिक युवाओं का चयन किया गया। चयनित युवाओं को करीब एक सप्ताह तक देश के सुदूर गांवों में रहने और वहां के लोगों के जीवन को करीब से समझने का मौका मिला। पीएम मोदी ने कहा कि इन युवाओं ने केवल गांवों का दौरा नहीं किया, बल्कि वहां के लोगों के साथ घुलने-मिलने और उनके जीवन को समझने की कोशिश की।
स्थानीय संस्कृति से जुड़ने पर पीएम मोदी का जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं ने सीमावर्ती गांवों में जाकर वहां की संस्कृति को समझा और अपनी संस्कृति से उसका जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृतियों को एक-दूसरे से जोड़ना ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं के ऐसे अनुभव देश में एकता और आपसी समझ को मजबूत करने में मदद करेंगे।
सीमावर्ती गांवों में देशभक्ति की भावना सबसे मजबूत
पीएम मोदी ने कहा कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के भीतर देशभक्ति की भावना गहराई से जुड़ी हुई है। वहां के लोगों के लिए देश सबसे पहले है और बाकी सुविधाएं उसके बाद आती हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को समझने पर देश के प्रति उनके समर्पण और भावनाओं का अनुभव किया जा सकता है।
विकसित गांव ही विकसित भारत की मजबूत नींव
प्रधानमंत्री ने अपने पुराने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि जब वे सरकार और राजनीति से दूर थे, तब भी उन्हें देश के सीमावर्ती गांवों में जाने का अवसर मिला था। वहां के लोगों से उनका संपर्क बना और कई लोगों से लंबे समय तक संबंध भी रहे। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष दीपावली का त्योहार सीमा पर देश की रक्षा में तैनात जवानों के साथ मनाते हैं।
युवाओं की भागीदारी से पूरा होगा विकसित भारत का सपना
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित गांव ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। देश के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। जब युवा देश के दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों से सीधे जुड़ते हैं, वहां के लोगों के जीवन को समझते हैं और उनके अनुभवों को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाते हैं, तो विकसित भारत के संकल्प को नई ताकत मिलती है। उन्होंने युवाओं से इस अभियान से जुड़ने और देश के सीमावर्ती गांवों को करीब से जानने की अपील की।
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