By Malay Ojha | Published: 05 October 2026 at 05:48 PM
नई दिल्ली। चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक उन्हें कम से कम 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश करना था, लेकिन सुनवाई के दौरान सिर्फ 50 लाख रुपये के ड्राफ्ट की कॉपी दिखाई गई। इस पर अदालत ने उनके रवैये पर नाराजगी जताई।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि राजपाल यादव के आचरण से अदालत के प्रति सम्मान नजर नहीं आ रहा है। जस्टिस बागची ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “आपकी जगह जेल में है।” कोर्ट ने कहा कि अब उनकी याचिका खारिज करने पर भी विचार किया जा सकता है।
50 लाख के ड्राफ्ट पर कोर्ट ने उठाया सवाल
राजपाल यादव के वकील ने सुनवाई के दौरान 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी पेश की। इस पर बेंच ने सवाल किया कि जब पहले 5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया गया था और बाद में 2 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट देने की बात कही गई थी, तो अब सिर्फ 50 लाख रुपये क्यों पेश किए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि उन्हें दो सप्ताह का समय दिया गया था और वह समय खत्म हो चुका है।
‘इस तरह के घमंड का इलाज जानते हैं’
राजपाल यादव के वकील ने दलील दी कि शिकायतकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि शिकायतकर्ता कम से कम उतने गरीब जरूर हैं, जितनी रकम राजपाल यादव ने उनके पास से ली है। अदालत ने यह भी कहा कि यहां अभिनय करने से काम नहीं चलेगा।
बुधवार को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजपाल यादव को एक और मौका दिया है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। कोर्ट पहले ही उन्हें जेल जाने से अंतरिम राहत दे चुका है, लेकिन यह राहत रकम जमा करने की शर्त से जुड़ी है।
5 करोड़ जमा करने की थी शर्त
8 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ राजपाल यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें जेल जाने से अंतरिम राहत दी थी। इसके लिए रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी गई थी। 15 सितंबर को राजपाल यादव की ओर से कहा गया था कि वह कुछ संपत्तियां बेचकर रकम जुटा रहे हैं और अगली सुनवाई में 2 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट पेश करेंगे।
हाई कोर्ट ने सुनाई थी 3 महीने की सजा
10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस के सभी सात मामलों में राजपाल यादव को तीन महीने की जेल और कुल 1.35 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
2010 से चल रहा है मामला
मामला साल 2010 का है। फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। फिल्म की रिलीज में देरी के बाद रकम लौटाने को लेकर समझौता हुआ, लेकिन भुगतान के लिए दिए गए सात चेक बाउंस हो गए।
2018 में ट्रायल कोर्ट ने दोषी माना
चेक बाउंस होने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। अप्रैल 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया। इसके बाद 2024 में सेशंस कोर्ट ने भी उनकी सजा बरकरार रखी। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
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