By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 12:47 PM
शेखर सुमन अपने शो ‘शेखर टुनाइट’ के नए एपिसोड में भावुक हो गए। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर बात करते हुए कहा कि उन परेशान करने वाले वीडियो ने उन्हें अंदर तक हिला दिया। शेखर ने कहा कि वह पिछले तीन दिनों से ठीक से सो नहीं पाए और बस रोते रहे।
‘शेखर टुनाइट’ के ताजा एपिसोड की शुरुआत ही एक गंभीर और भावुक बयान से हुई। शेखर सुमन ने कहा कि कार्यक्रम शुरू करने से पहले वह दर्शकों के साथ कुछ साझा करना चाहते हैं। उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन के दृश्य ने उन्हें भीतर तक हिला दिया।
शेखर के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के जो दृश्य सामने आए, उन्हें देखना उनके लिए बेहद तकलीफदेह था। उन्होंने कहा कि वह तीन दिनों से ठीक से सो नहीं पाए हैं और उन तस्वीरों तथा वीडियो ने उन्हें भावनात्मक रूप से झकझोर दिया।
बोले- आखिर इन युवाओं का कसूर क्या था?
शेखर सुमन ने अपने बयान में सवाल उठाया कि आखिर प्रदर्शन कर रहे उन युवाओं की गलती क्या थी। उन्होंने कहा कि अगर युवा अपने अधिकारों, अपने भविष्य और देश के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे थे, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए थी।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शनकारियों की मांगों का भी जिक्र किया। शेखर ने कहा कि युवाओं की आवाज सुनने के बजाय अगर उन पर कार्रवाई की जाती है, तो यह बेहद दुखद स्थिति है। हालांकि, शेखर की यह टिप्पणी उनके अपने कार्यक्रम में दिए गए बयान और प्रदर्शनकारियों के पक्ष में उनकी प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आई है।
‘मैं हर उस युवा के साथ खड़ा हूं जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है’
शेखर सुमन ने अपने संबोधन में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में वह उन निडर युवाओं, कार्यक्रम से जुड़े लोगों और हर उस भारतीय के साथ खड़े हैं, जो देश की गरिमा और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस रखता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी युवा की आवाज को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह सत्ता या व्यवस्था से सवाल पूछ रहा है। उनके मुताबिक, युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए और उनके सवालों का जवाब संवाद के जरिए दिया जाना चाहिए।
महाभारत का उदाहरण देकर शेखर ने कही बड़ी बात
अपने भावुक संबोधन के दौरान शेखर सुमन ने महाभारत का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत की शुरुआत केवल कुरुक्षेत्र में युद्ध के दिन नहीं हुई थी, बल्कि उस समय से हुई जब हस्तिनापुर ने अपने ही युवाओं की बात सुनना बंद कर दिया।
शेखर ने इसी संदर्भ में सत्ता और युवाओं के बीच संवाद की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि इतिहास उस वक्त करवट लेता है, जब सत्ता को यह लगने लगता है कि उसे किसी और की बात सुनने की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान को कार्यक्रम के सबसे चर्चित हिस्सों में से एक माना जा रहा है।
बोले- युवाओं को दबाने की कोशिश उलटा असर डाल सकती है
शेखर सुमन ने उन युवा आवाजों का भी जिक्र किया, जिन्हें अलग-अलग तरह के आरोपों और नामों से खारिज करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है कि जिन लोगों को कमजोर समझकर नजरअंदाज किया गया, वही आगे चलकर सबसे बड़ी आवाज बन गए।
उन्होंने कहा कि किसी युवा आवाज को दबाने या खारिज करने की कोशिश हमेशा कामयाब नहीं होती। उनके मुताबिक, युवाओं की असली ताकत उनकी संख्या नहीं, बल्कि उनका दृढ़ निश्चय और अपने मुद्दों को लेकर लगातार खड़े रहने का साहस है।
कार्यक्रम करने को लेकर खुद भी असमंजस में थे शेखर
शेखर सुमन ने यह भी बताया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी घटनाओं के बीच वह खुद इस बात को लेकर असमंजस में थे कि ऐसे माहौल में कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। देश में छात्र प्रदर्शन को लेकर चल रही बहस के बीच उन्हें लगा कि शायद कार्यक्रम करना उचित होगा या नहीं, इस पर विचार करना जरूरी है।
लेकिन बाद में उन्होंने तय किया कि कार्यक्रम को जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका कार्यक्रम लोगों की आवाज को सामने रखने का एक माध्यम है और वह अपने दर्शकों से किए वादे के मुताबिक अपनी बात रखेंगे। इसी के साथ उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत की और युवाओं को भरोसा दिलाया कि वह इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं।
सोनम वांगचुक के समर्थन में भी बोल चुके हैं शेखर
यह पहली बार नहीं है जब शेखर सुमन ने इस मुद्दे से जुड़े घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इससे पहले भी वह शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा चुके हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और उनकी मांगों का समर्थन करते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया था।
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की खबर भी सामने आई थी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रदर्शन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हुई। शेखर सुमन ने इसी व्यापक मुद्दे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद गरमाया मामला
20 जुलाई को जंतर-मंतर से जुड़े प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग तरह के दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आईं। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया गया, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई।
इसी बीच सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने मामले को और चर्चा में ला दिया। शेखर सुमन ने अपने कार्यक्रम में इन्हीं घटनाओं को लेकर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्होंने जो दृश्य देखे, उनसे वह गहरे तौर पर प्रभावित हुए।
शेखर के बयान के बाद फिर चर्चा में आया छात्र प्रदर्शन
शेखर सुमन के बयान के बाद छात्र प्रदर्शन और जंतर-मंतर की घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। उनके कार्यक्रम का भावुक हिस्सा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। खास तौर पर उनका यह कहना कि वह तीन दिनों तक सो नहीं पाए और रोते रहे, उनके बयान का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा रहा।
शेखर ने अपने संबोधन के आखिर में साफ किया कि वह युवाओं की आवाज और उनके सवालों को महत्व देते हैं। उन्होंने कार्यक्रम को जारी रखने का फैसला करते हुए कहा कि ‘शो जारी रहना चाहिए’। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शन से जुड़े युवाओं को यह संदेश दिया कि उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए और संवाद का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।
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