By Malay Ojha | Published: 13 June 2026 at 03:44 PM
भारतीय वायुसेना को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब असम के जोरहाट एयरबेस के पास उसका एक परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में पांच वायुसेना कर्मियों ने जान गंवा दी। दुर्घटना के बाद वायुसेना मुख्यालय ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित कर दी है। हादसे में विमान का सह-पायलट गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
वायुसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम का निधन हो गया। देश सेवा के दौरान इन जवानों की शहादत की खबर सामने आते ही सैन्य और नागरिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
जांच के लिए गठित हुई कोर्ट ऑफ इंक्वायरी
हादसे की गंभीरता को देखते हुए वायुसेना ने उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को यह पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि दुर्घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी खराबी, इंजन संबंधी समस्या और मौसम की स्थिति सहित सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।
को-पायलट का बयान बन सकता है अहम कड़ी
दुर्घटना में जीवित बचे सह-पायलट की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उनके बयान से हादसे से ठीक पहले की परिस्थितियों की महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। कॉकपिट में मौजूद होने के कारण उनका पक्ष पूरी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वायुसेना ने जताया दुख
भारतीय वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में शहीद जवानों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वायुसेना ने कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा संगठन शोक संतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
हादसे की वजह पर टिकी नजरें
जोरहाट एयरबेस के आसपास हुए इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना मानवीय भूल, तकनीकी खराबी या किसी अन्य वजह से हुई। फिलहाल सभी की निगाहें कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
देश ने अपने वीर सपूत खोए
इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले पांचों वायुसेना कर्मियों को देशभर से श्रद्धांजलि दी जा रही है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ये सभी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा।

