By Malay Ojha | Published: 13 June 2026 at 12:50 PM
बिहार में शराबबंदी कानून को और अधिक सख्त बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने दरभंगा में बड़ा बयान देते हुए कहा कि राज्य में बाहर से शराब पहुंचाने वाली कंपनियों के मालिकों तक कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होगी और जरूरत पड़ने पर अधिकारियों की टीम दूसरे राज्यों में जाकर भी गिरफ्तारी की कार्रवाई करेगी।
दरभंगा में मीडिया से बातचीत के दौरान मदन सहनी ने कहा कि सरकार शराब तस्करी की पूरी श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में काम कर रही है। अब केवल तस्करों या वाहकों पर ही नहीं, बल्कि उन कंपनियों और कारोबारी नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जाएगी जिनके माध्यम से बिहार में शराब पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।
शराबबंदी खत्म करने पर कोई विचार नहीं
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार सरकार शराबबंदी कानून को समाप्त करने पर विचार नहीं कर रही है। इसके उलट सरकार इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि हाल में हुई समीक्षा बैठक में भी अधिकारियों को कानून के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं।
आय से अधिक संपत्ति मामलों में भी तेज होगी कार्रवाई
मदन सहनी ने बताया कि शराब कारोबार से जुड़े ऐसे मामलों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है, जहां आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में मुकदमे लंबित हैं, वहां त्वरित सुनवाई की दिशा में कदम उठाए जाएंगे ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।
समीक्षा बैठक में कई एजेंसियां हुई थीं शामिल
मद्य निषेध विभाग की हालिया समीक्षा बैठक में रेलवे, हवाई अड्डा प्रबंधन, सीमा सुरक्षा और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक में शराब तस्करी रोकने के लिए समन्वित अभियान चलाने पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
पांच प्रमुख जांच चौकियों पर बढ़ेगी सख्ती
मंत्री ने बताया कि राज्य की पांच प्रमुख जांच चौकियों पर निगरानी और कड़ी की जाएगी। इन स्थानों पर वाहनों की जांच, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई को और तेज किया जाएगा। खास तौर पर दूसरे राज्यों से आने वाले मार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
ट्रेनों में भी चलेगा विशेष जांच अभियान
समीक्षा बैठक में बिहार आने वाली प्रमुख रेलगाड़ियों में नियमित जांच अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध यात्रियों और सामान की गहन जांच की जाए ताकि शराब तस्करी के नेटवर्क को समय रहते पकड़ा जा सके।
सड़क मार्ग बना सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि सरकार की ओर से रेलवे और अन्य माध्यमों पर निगरानी बढ़ाने की घोषणा की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सबसे अधिक शराब की तस्करी सड़क मार्ग के जरिए होती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सड़कों के जरिए होने वाली तस्करी को रोकने के लिए क्या नई रणनीति अपनाती है।
लगातार सख्त हो रहा है शराबबंदी कानून
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से सरकार समय-समय पर कानून में संशोधन और सख्ती करती रही है। अब मद्य निषेध विभाग की नई रणनीति से संकेत मिल रहे हैं कि सरकार तस्करी की पूरी सप्लाई चेन को निशाने पर लेने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में इस संबंध में और बड़े प्रशासनिक फैसले सामने आ सकते हैं।

