By Malay Ojha | Published: 13 June 2026 at 12:14 PM
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन समारोह में भोजपुरी गायक छोटू छलिया को कथित तौर पर दिए गए बहुमूल्य कंगन अब राजनीतिक विवाद का विषय बन गए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए आर्थिक अपराध इकाई को पत्र भेजा है। उन्होंने कंगन की वास्तविक कीमत, खरीद के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की जांच कराने की मांग उठाई है।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब नीरज कुमार ने आर्थिक अपराध इकाई को लिखित शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर दी। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि विभिन्न समाचार माध्यमों और सामाजिक मंचों पर ऐसी खबरें सामने आई हैं, जिनमें दावा किया गया कि लालू यादव के जन्मदिन समारोह के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भोजपुरी गायक राम शरण यादव उर्फ छोटू छलिया को एक बहुमूल्य कंगन उपहार में दिया था।
कंगन के मूल्य और स्रोत पर उठे सवाल
नीरज कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि यदि संबंधित कंगन वास्तव में हीरे या किसी अन्य बहुमूल्य रत्न अथवा धातु से बना है, तो उसके स्रोत, खरीद प्रक्रिया, भुगतान के तरीके और कर संबंधी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे।
छोटू छलिया के बयान का दिया हवाला
जदयू नेता ने यह भी दावा किया है कि स्वयं छोटू छलिया ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि यह कंगन उन्हें राबड़ी देवी की ओर से भेंट किए गए थे। इसी आधार पर उन्होंने जांच एजेंसियों से तथ्यों का सत्यापन करने और आवश्यक होने पर विधिसम्मत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
भ्रामक जानकारी होने पर भी जांच की मांग
अपने पत्र में नीरज कुमार ने यह भी कहा कि यदि कंगन की वास्तविक कीमत या उसकी प्रकृति को लेकर गलत या भ्रामक जानकारी प्रसारित की गई है, तब भी इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जनहित से जुड़ा विषय है।
लालू परिवार पर साधा राजनीतिक निशाना
इस पूरे विवाद के बीच नीरज कुमार ने लालू परिवार पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप पहले भी लालू परिवार से जुड़े मामलों में सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीन के बदले नौकरी मामले में जांच एजेंसियां पहले ही कार्रवाई कर चुकी हैं और मामला न्यायिक प्रक्रिया में है।
पुराने मामलों का भी किया जिक्र
जदयू नेता ने अपने बयान में कहा कि जब पहले से कई वित्तीय मामलों की जांच हो चुकी है, तब इस नए विवाद की भी गहराई से पड़ताल की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी बहुमूल्य उपहार का आदान-प्रदान हुआ है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट होनी चाहिए।
कई एजेंसियों को भेजी गई पत्र की प्रति
नीरज कुमार ने केवल आर्थिक अपराध इकाई तक ही अपनी शिकायत सीमित नहीं रखी है। उन्होंने अपने पत्र की प्रति प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त बिहार-झारखंड, प्रवर्तन निदेशालय के क्षेत्रीय निदेशक तथा बिहार के लोकायुक्त को भी भेजी है। इससे स्पष्ट है कि वह इस मामले में विभिन्न एजेंसियों के स्तर पर जांच की मांग कर रहे हैं।
अब जांच एजेंसियों के कदम पर नजर
फिलहाल इस मामले में किसी जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और क्या इस मामले में औपचारिक जांच शुरू होती है।

