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VIDEO: ‘थैंक्स टू चीफ जस्टिस, आपने हमें कॉकरोच कहा, तभी प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा’, अभिजीत दीपके बोले- हम जीत गए

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 05:22 PM

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके ने मंच से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को ‘कॉकरोच’ नहीं कहा होता तो प्रधान इस्तीफा नहीं देते। दीपके ने कहा, “छात्र एकता जिंदाबाद, हम जीत गए।” उन्होंने कहा कि लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने कहा था- ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।’

अभिजीत दीपके ने मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने वह कर दिखाया, जिसे लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। उनके मुताबिक, लोग कह रहे थे कि इस सरकार में किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, लेकिन छात्रों के लंबे और शांतिपूर्ण आंदोलन ने दिखा दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने पर बदलाव संभव है। उन्होंने छात्रों के साथ मिलकर ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ का नारा भी लगाया और इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र की जीत बताया।

‘हम कॉकरोच हैं, एक बार घुस गए तो निकलते नहीं’
मंच से बोलते हुए अभिजीत दीपके ने अपने आंदोलन की शैली में ‘कॉकरोच’ वाले तंज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्हें ‘कॉकरोच’ कहा गया। दीपके ने इसी संदर्भ में कहा कि अगर उन्हें इस नाम से नहीं पुकारा जाता तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी डरने वाले नहीं हैं और यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर लोग बिना डरे अपनी बात पर टिके रहें तो जीत हासिल की जा सकती है।

प्रधान के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी दो और मांगें बाकी हैं और जब तक इन पर फैसला नहीं होता, प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से वापस नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन को केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि छात्रों से जुड़े उन मुद्दों का भी समाधान होना चाहिए, जिनको लेकर वे लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।

पहली मांग- प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर हो कार्रवाई
दीपके की ओर से रखी गई पहली प्रमुख मांग प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी है। उन्होंने मांग की कि आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कदम उठाया जाए। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी गई है। आंदोलनकारी संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों को मुकदमों और कानूनी कार्रवाई के डर में नहीं रहना चाहिए।

दूसरी मांग- जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मिले मुआवजा
अभिजीत दीपके ने दूसरी बड़ी मांग उन छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की रखी है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवाद और उससे पैदा हुए दबाव के बीच आत्महत्या की। उन्होंने प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। दीपके का कहना है कि छात्रों की परेशानी और उनके परिवारों के दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, सरकार को इन परिवारों की जिम्मेदारी लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।

इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
इस्तीफा भेजने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में हुए घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति ही भारत की असली ताकत है। प्रधान ने छात्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता जाहिर की और कहा कि किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में बने हालात का कोई राष्ट्रविरोधी ताकत फायदा न उठा सके, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है।

‘छात्र अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान दें’
धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों से अपील की कि वे अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें। उनके मुताबिक, देश की एकता बनी रहनी चाहिए और बच्चों का समय ऐसे विवादों में नहीं फंसना चाहिए, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो। उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि वह लंबे समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े रहे हैं और उनका विश्वास है कि मजबूत और सभी को साथ लेकर चलने वाली शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत देश की नींव है।

एक्स पर जारी किया इस्तीफे का पत्र
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने इस्तीफे से जुड़ा पत्र भी साझा किया। इसमें उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र से अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने हमेशा मजबूत, सबको साथ लेकर चलने वाली और भविष्य को ध्यान में रखने वाली शिक्षा व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने छात्रों के हित और देश की एकता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेजने की बात कही। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजा गया था और उस समय तक उसके स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई थी।

अब सरकार और छात्रों के बीच अगली लड़ाई किन मुद्दों पर?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर का आंदोलन एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ आंदोलनकारी इसे अपनी पहली बड़ी मांग की जीत मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अभिजीत दीपके ने दो और मांगें सामने रखकर साफ कर दिया है कि प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होने वाला। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, प्रधान के इस्तीफे ने लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राजनीतिक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

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VIDEO: ‘थैंक्स टू चीफ जस्टिस, आपने हमें कॉकरोच कहा, तभी प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा’, अभिजीत दीपके बोले- हम जीत गए

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 05:22 PM

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके ने मंच से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को ‘कॉकरोच’ नहीं कहा होता तो प्रधान इस्तीफा नहीं देते। दीपके ने कहा, “छात्र एकता जिंदाबाद, हम जीत गए।” उन्होंने कहा कि लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने कहा था- ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।’

अभिजीत दीपके ने मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने वह कर दिखाया, जिसे लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। उनके मुताबिक, लोग कह रहे थे कि इस सरकार में किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, लेकिन छात्रों के लंबे और शांतिपूर्ण आंदोलन ने दिखा दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने पर बदलाव संभव है। उन्होंने छात्रों के साथ मिलकर ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ का नारा भी लगाया और इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र की जीत बताया।

‘हम कॉकरोच हैं, एक बार घुस गए तो निकलते नहीं’
मंच से बोलते हुए अभिजीत दीपके ने अपने आंदोलन की शैली में ‘कॉकरोच’ वाले तंज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्हें ‘कॉकरोच’ कहा गया। दीपके ने इसी संदर्भ में कहा कि अगर उन्हें इस नाम से नहीं पुकारा जाता तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी डरने वाले नहीं हैं और यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर लोग बिना डरे अपनी बात पर टिके रहें तो जीत हासिल की जा सकती है।

प्रधान के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी दो और मांगें बाकी हैं और जब तक इन पर फैसला नहीं होता, प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से वापस नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन को केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि छात्रों से जुड़े उन मुद्दों का भी समाधान होना चाहिए, जिनको लेकर वे लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।

पहली मांग- प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर हो कार्रवाई
दीपके की ओर से रखी गई पहली प्रमुख मांग प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी है। उन्होंने मांग की कि आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कदम उठाया जाए। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी गई है। आंदोलनकारी संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों को मुकदमों और कानूनी कार्रवाई के डर में नहीं रहना चाहिए।

दूसरी मांग- जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मिले मुआवजा
अभिजीत दीपके ने दूसरी बड़ी मांग उन छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की रखी है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवाद और उससे पैदा हुए दबाव के बीच आत्महत्या की। उन्होंने प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। दीपके का कहना है कि छात्रों की परेशानी और उनके परिवारों के दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, सरकार को इन परिवारों की जिम्मेदारी लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।

इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
इस्तीफा भेजने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में हुए घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति ही भारत की असली ताकत है। प्रधान ने छात्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता जाहिर की और कहा कि किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में बने हालात का कोई राष्ट्रविरोधी ताकत फायदा न उठा सके, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है।

‘छात्र अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान दें’
धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों से अपील की कि वे अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें। उनके मुताबिक, देश की एकता बनी रहनी चाहिए और बच्चों का समय ऐसे विवादों में नहीं फंसना चाहिए, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो। उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि वह लंबे समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े रहे हैं और उनका विश्वास है कि मजबूत और सभी को साथ लेकर चलने वाली शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत देश की नींव है।

एक्स पर जारी किया इस्तीफे का पत्र
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने इस्तीफे से जुड़ा पत्र भी साझा किया। इसमें उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र से अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने हमेशा मजबूत, सबको साथ लेकर चलने वाली और भविष्य को ध्यान में रखने वाली शिक्षा व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने छात्रों के हित और देश की एकता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेजने की बात कही। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजा गया था और उस समय तक उसके स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई थी।

अब सरकार और छात्रों के बीच अगली लड़ाई किन मुद्दों पर?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर का आंदोलन एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ आंदोलनकारी इसे अपनी पहली बड़ी मांग की जीत मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अभिजीत दीपके ने दो और मांगें सामने रखकर साफ कर दिया है कि प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होने वाला। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, प्रधान के इस्तीफे ने लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राजनीतिक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

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