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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर, अब प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 08:42 PM

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का निर्देश दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे सीजेपी के आंदोलन के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड 2 के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है। इसके साथ ही प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के अलावा शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर छात्रों और युवाओं का आंदोलन लगातार चर्चा में था। आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था। ऐसे में इस्तीफा मंजूर होने के बाद पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है।

इस्तीफे के बाद सीजेपी ने आंदोलन वापस लिया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मंजूरी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है। संगठन की ओर से लंबे समय से नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जा रहे थे। आंदोलनकारी लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि जब तक शिक्षा मंत्री पद से हटते नहीं हैं, तब तक आंदोलन खत्म करने का कोई सवाल नहीं है।

सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत के कई दौर के बाद आंदोलन का रुख बदलता दिखाई दिया। इस्तीफे की मांग पर अड़े आंदोलनकारियों के लिए यह फैसला एक बड़ी मांग पूरी होने के तौर पर सामने आया। हालांकि, आंदोलन से जुड़ी बाकी मांगों को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का असर भी आगे की तस्वीर तय करेगा।

पहली बैठक में ही साफ हो गया था रुख
सीजेपी और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच हुई पहली बैठक में ही यह संकेत मिल गया था कि बातचीत आसान नहीं रहने वाली है। केंद्रीय मंत्रियों की ओर से आंदोलनकारियों की मांगों को समझने की कोशिश की गई, लेकिन बैठक में सीजेपी के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर रुख साफ रखा।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन को खत्म कराना मुश्किल होगा। आंदोलनकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल आश्वासन या बातचीत के भरोसे वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। इसके बाद बैठक में मौजूद केंद्रीय मंत्रियों की ओर से यह फीडबैक सरकार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया गया।

दो मांगों पर सरकार ने दिखाई सहमति
पहली बैठक में सीजेपी की ओर से रखी गई तीन प्रमुख मांगों में से दो को लेकर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया। इसके बाद हुई दूसरी बैठक में इन दोनों मांगों को सिद्धांत के स्तर पर स्वीकार करने की बात सामने आई। इससे बातचीत को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध कुछ कम होता दिखाई दिया।

हालांकि, तीसरी मांग सबसे बड़ा मुद्दा बनी रही। इसी मांग पर अंतिम फैसला नहीं होने के कारण बातचीत पूरी तरह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। सरकार की ओर से आंदोलनकारियों को भरोसा दिया गया कि इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और चौबीस घंटे के भीतर अंतिम निर्णय के साथ वापस आया जाएगा।

तीसरी मांग पर टिकी थी पूरी बातचीत
सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत का सबसे अहम मोड़ तीसरी मांग को लेकर था। पहली दो मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलनकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि सरकार तीसरी मांग पर क्या फैसला लेती है। इसी वजह से बातचीत के अगले दौर का इंतजार किया जा रहा था।

आंदोलनकारियों का कहना था कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मामले में केवल जांच या आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग थी कि जिम्मेदारी तय हो और सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए जाएं। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर दबाव लगातार बना हुआ था।

सरकार के लिए भी बढ़ता गया दबाव
नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन के साथ विपक्षी दलों की ओर से भी सरकार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था।

आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। इसी सवाल को लेकर सीजेपी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बनाया था। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू होने के बाद भी यह मांग लगातार बनी रही।

प्रह्लाद जोशी के सामने अब बड़ी जिम्मेदारी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मंजूरी के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना और प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों का भरोसा बहाल करना होगी।

नीट जैसी बड़ी परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं होगा। छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर है। ऐसे में नए प्रभार के साथ प्रह्लाद जोशी के सामने परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार का भरोसा मजबूत करने की चुनौती होगी।

आंदोलन खत्म, लेकिन सवाल अभी बाकी
सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है, लेकिन नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। छात्रों की मांगों पर सरकार की ओर से किए गए फैसलों को अब किस तरह लागू किया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

दरअसल, आंदोलन की शुरुआत केवल एक मंत्री के इस्तीफे की मांग से नहीं हुई थी। इसके पीछे परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की नाराजगी और भविष्य को लेकर उनकी चिंता भी जुड़ी थी। यही वजह है कि शिक्षा मंत्रालय में बदलाव के बाद भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही का मुद्दा चर्चा में बना रह सकता है।

बातचीत से निकला बड़ा राजनीतिक संदेश
पूरे घटनाक्रम को देखें तो सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत ने आखिरकार एक बड़े फैसले का रास्ता तैयार किया। पहली बैठक में जहां तीन मांगों में से दो पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया, वहीं तीसरी मांग पर अंतिम निर्णय के लिए समय मांगा गया। इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मंजूरी और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी में बदलाव हुआ।

सीजेपी के लिए यह फैसला आंदोलन की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि नीट और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच पैदा हुए अविश्वास को कैसे दूर किया जाए। आंदोलन भले ही वापस ले लिया गया हो, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की मांगों पर आगे की कार्रवाई अब इस पूरे विवाद का अगला अध्याय तय करेगी।

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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर, अब प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 08:42 PM

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का निर्देश दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे सीजेपी के आंदोलन के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड 2 के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है। इसके साथ ही प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के अलावा शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर छात्रों और युवाओं का आंदोलन लगातार चर्चा में था। आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था। ऐसे में इस्तीफा मंजूर होने के बाद पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है।

इस्तीफे के बाद सीजेपी ने आंदोलन वापस लिया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मंजूरी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है। संगठन की ओर से लंबे समय से नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जा रहे थे। आंदोलनकारी लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि जब तक शिक्षा मंत्री पद से हटते नहीं हैं, तब तक आंदोलन खत्म करने का कोई सवाल नहीं है।

सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत के कई दौर के बाद आंदोलन का रुख बदलता दिखाई दिया। इस्तीफे की मांग पर अड़े आंदोलनकारियों के लिए यह फैसला एक बड़ी मांग पूरी होने के तौर पर सामने आया। हालांकि, आंदोलन से जुड़ी बाकी मांगों को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का असर भी आगे की तस्वीर तय करेगा।

पहली बैठक में ही साफ हो गया था रुख
सीजेपी और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच हुई पहली बैठक में ही यह संकेत मिल गया था कि बातचीत आसान नहीं रहने वाली है। केंद्रीय मंत्रियों की ओर से आंदोलनकारियों की मांगों को समझने की कोशिश की गई, लेकिन बैठक में सीजेपी के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर रुख साफ रखा।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन को खत्म कराना मुश्किल होगा। आंदोलनकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल आश्वासन या बातचीत के भरोसे वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। इसके बाद बैठक में मौजूद केंद्रीय मंत्रियों की ओर से यह फीडबैक सरकार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया गया।

दो मांगों पर सरकार ने दिखाई सहमति
पहली बैठक में सीजेपी की ओर से रखी गई तीन प्रमुख मांगों में से दो को लेकर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया। इसके बाद हुई दूसरी बैठक में इन दोनों मांगों को सिद्धांत के स्तर पर स्वीकार करने की बात सामने आई। इससे बातचीत को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध कुछ कम होता दिखाई दिया।

हालांकि, तीसरी मांग सबसे बड़ा मुद्दा बनी रही। इसी मांग पर अंतिम फैसला नहीं होने के कारण बातचीत पूरी तरह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। सरकार की ओर से आंदोलनकारियों को भरोसा दिया गया कि इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और चौबीस घंटे के भीतर अंतिम निर्णय के साथ वापस आया जाएगा।

तीसरी मांग पर टिकी थी पूरी बातचीत
सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत का सबसे अहम मोड़ तीसरी मांग को लेकर था। पहली दो मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलनकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि सरकार तीसरी मांग पर क्या फैसला लेती है। इसी वजह से बातचीत के अगले दौर का इंतजार किया जा रहा था।

आंदोलनकारियों का कहना था कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मामले में केवल जांच या आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग थी कि जिम्मेदारी तय हो और सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए जाएं। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर दबाव लगातार बना हुआ था।

सरकार के लिए भी बढ़ता गया दबाव
नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन के साथ विपक्षी दलों की ओर से भी सरकार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था।

आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। इसी सवाल को लेकर सीजेपी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बनाया था। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू होने के बाद भी यह मांग लगातार बनी रही।

प्रह्लाद जोशी के सामने अब बड़ी जिम्मेदारी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मंजूरी के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना और प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों का भरोसा बहाल करना होगी।

नीट जैसी बड़ी परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं होगा। छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर है। ऐसे में नए प्रभार के साथ प्रह्लाद जोशी के सामने परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार का भरोसा मजबूत करने की चुनौती होगी।

आंदोलन खत्म, लेकिन सवाल अभी बाकी
सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है, लेकिन नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। छात्रों की मांगों पर सरकार की ओर से किए गए फैसलों को अब किस तरह लागू किया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

दरअसल, आंदोलन की शुरुआत केवल एक मंत्री के इस्तीफे की मांग से नहीं हुई थी। इसके पीछे परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की नाराजगी और भविष्य को लेकर उनकी चिंता भी जुड़ी थी। यही वजह है कि शिक्षा मंत्रालय में बदलाव के बाद भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही का मुद्दा चर्चा में बना रह सकता है।

बातचीत से निकला बड़ा राजनीतिक संदेश
पूरे घटनाक्रम को देखें तो सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत ने आखिरकार एक बड़े फैसले का रास्ता तैयार किया। पहली बैठक में जहां तीन मांगों में से दो पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया, वहीं तीसरी मांग पर अंतिम निर्णय के लिए समय मांगा गया। इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मंजूरी और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी में बदलाव हुआ।

सीजेपी के लिए यह फैसला आंदोलन की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि नीट और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच पैदा हुए अविश्वास को कैसे दूर किया जाए। आंदोलन भले ही वापस ले लिया गया हो, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की मांगों पर आगे की कार्रवाई अब इस पूरे विवाद का अगला अध्याय तय करेगी।

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