By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 10:07 AM
नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के दौरान एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया था। सूत्रों के मुताबिक, सरकार की ओर से बातचीत के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का विकल्प रखा गया था। लेकिन सीजेपी के प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद तीसरे दौर की बातचीत से कुछ समय पहले ही प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद हुई बैठक में आंदोलन खत्म करने पर सहमति बनी।
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के लिए सरकार ने दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को आगे किया था। दोनों पक्षों के बीच कुल तीन दौर की बातचीत हुई। इसी बातचीत के दौरान सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि किसी मंत्री को हटाना या उसका विभाग बदलना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। इसी आधार पर धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का विकल्प प्रदर्शनकारियों के सामने रखा गया था। लेकिन सीजेपी ने साफ कर दिया कि उसकी मुख्य मांग सिर्फ मंत्रालय बदलने से पूरी नहीं होगी।
इस्तीफे से पहले तक प्रधान को हटाने पर सहमति नहीं थी
बातचीत के दूसरे दौर के बाद सीजेपी की ओर से कहा गया था कि सरकार उनकी दो मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने के सवाल पर सहमति नहीं बनी है। प्रदर्शनकारियों ने इसे आंदोलन की सबसे अहम मांग बताते हुए स्पष्ट कर दिया था कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके बाद तीसरे दौर की बैठक से पहले भी सीजेपी ने अपना रुख सख्त रखा था।
तीसरी बैठक से ठीक पहले आया इस्तीफा
इसी गतिरोध के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई। प्रधान का इस्तीफा सीजेपी आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग थी। इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों ने इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर देखा और आंदोलन खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया।
तीन मांगों पर टिका था पूरा आंदोलन
सीजेपी के आंदोलन की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना और नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मुआवजे की मांग भी उठाई
सीजेपी की ओर से नीट पेपर लीक से प्रभावित होकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी गई थी। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान छात्रों और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी बातचीत का अहम हिस्सा रही। सरकार और सीजेपी के बीच सहमति बनने के बाद आंदोलन खत्म करने का रास्ता साफ हुआ।
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने संभाली बातचीत
सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत की जिम्मेदारी जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को दी गई थी। दोनों मंत्रियों ने सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ बैठक की। बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को विस्तार से रखा और खास तौर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। सरकार की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि मांगों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन प्रधान के इस्तीफे को लेकर तत्काल सहमति नहीं बनी थी।
दूसरे दौर की बातचीत में भी नहीं टूटा गतिरोध
दूसरे दौर की बैठक के बाद सीजेपी ने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसकी ऐसी मांग है, जिस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर इस मांग को स्वीकार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। दूसरी ओर, जेपी नड्डा ने कहा था कि सरकार ने सीजेपी की मांगों और सुझावों को सुना है और आगे फिर बातचीत की जाएगी।
सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारी भी की
प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा में पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों पर सख्ती के संकेत भी दिए गए थे। सरकार ने पेपर लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक वीडियो संदेश के जरिए संसद में इससे संबंधित विधेयक लाने की बात कही थी। यह कदम परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक पर कार्रवाई को लेकर सरकार की ओर से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना गया।
सीजेपी ने पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी सीजेपी ने बातचीत में उठाया। संगठन की ओर से भारत सरकार, त्वरित कार्रवाई बल के प्रमुख और दिल्ली पुलिस आयुक्त से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई थी। सीजेपी का आरोप था कि 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित तौर पर बर्बरता की गई। इस मांग को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
इस्तीफे के बाद बदला आंदोलन का रुख
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी और सरकार के बीच चल रहा गतिरोध खत्म होने लगा। प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि कई हफ्तों से चल रहा यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका था। सीजेपी के लिए प्रधान का इस्तीफा सबसे अहम मांग थी और सरकार के इस फैसले के बाद बाकी मुद्दों पर आगे बातचीत का रास्ता खुल गया।
मंत्रालय बदलने से क्यों नहीं बनी बात?
पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यही रहा कि सरकार की ओर से कथित तौर पर मंत्रालय बदलने का विकल्प सामने रखे जाने के बावजूद सीजेपी पीछे हटने को तैयार नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि विवाद सिर्फ किसी एक विभाग या मंत्रालय का नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी का है। इसलिए उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को ही अपनी मांगों के समाधान की पहली शर्त बनाए रखा। हालांकि मंत्रालय बदलने की पेशकश और बातचीत के भीतर हुए अन्य घटनाक्रमों को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, इसलिए इन दावों को सूत्रों के हवाले से ही देखा जाना चाहिए।
आंदोलन ने सरकार पर बढ़ाया दबाव
नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवाद ने धीरे-धीरे बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया था। जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन, छात्रों की मांगें और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक नतीजा बनकर सामने आया। इसके साथ ही सरकार ने परीक्षा में गड़बड़ियों पर सख्त कानून और सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत भी दिए। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार छात्रों की बाकी मांगों और परीक्षा सुधार से जुड़े प्रस्तावों को किस तरह लागू करती है।
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