National

spot_img

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखीं ये 3 छात्रा नेता कौन हैं? 23 दिन की भूख हड़ताल से लेकर कैंपस आंदोलन तक, जानिए पूरी कहानी

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 02:08 PM

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और 20 जुलाई को हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उनके साथ तीन छात्रा नेता भी नजर आईं। ये वही छात्राएं हैं, जो पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इनमें नेहा बोरा, अंजलि और दानिश अली के नाम प्रमुख हैं। तीनों का छात्र राजनीति और आंदोलनों से जुड़ा अलग-अलग अनुभव रहा है।

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इन तीन छात्रा नेताओं को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। जंतर-मंतर के प्रदर्शन में इनकी सक्रिय भूमिका रही है और छात्र आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों पर ये लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं। इनमें नेहा बोरा सबसे ज्यादा चर्चा में रही हैं, क्योंकि उन्होंने आंदोलन के दौरान 23 दिन तक भूख हड़ताल की।

23 दिन की भूख हड़ताल ने खींचा ध्यान
नेहा बोरा छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद आंबेडकर विश्वविद्यालय से परास्नातक किया। फिलहाल वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कला और सौंदर्यशास्त्र विद्यालय में पीएचडी कर रही हैं।

पढ़ाई के साथ थिएटर और सामाजिक मुद्दों से जुड़ाव
नेहा का जुड़ाव सिर्फ छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रहा है। वह थिएटर से भी जुड़ी रही हैं और कई सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखती रही हैं। शिक्षा के निजीकरण से लेकर भीड़ हिंसा, बिलकिस बानो मामले और गाजा में मानवीय संकट जैसे मुद्दों पर भी वह अपनी राय सामने रख चुकी हैं।

भूख हड़ताल में नेहा के साथ कौन थे?
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान तीन छात्रों ने भूख हड़ताल की थी। इनमें नेहा बोरा के अलावा मनीष कुमार और अमीन अमितोज शामिल थे। नेहा की 23 दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को देशभर में चर्चा दिलाई। इसके जरिए उन्होंने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की।

दूसरी छात्रा नेता हैं अंजलि
राहुल गांधी के साथ नजर आईं दूसरी छात्रा नेता अंजलि हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमन की छात्रा हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई के छात्र संगठन से जुड़ी हुई हैं। बिहार के गया जिले से आने वाली अंजलि ने छात्र राजनीति में धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और अब वह विश्वविद्यालय के छात्र आंदोलनों में सक्रिय चेहरा मानी जाती हैं।

कॉलेज के एक आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
अंजलि का छात्र राजनीति से जुड़ाव कॉलेज के दूसरे साल में हुआ। उस दौरान वह दिल्ली विश्वविद्यालय की जमीन पर व्यावसायिक ऊंची इमारत बनाए जाने के विरोध में हुए आंदोलन में शामिल हुई थीं। इसी दौरान उनका छात्र संगठन के सदस्यों से संपर्क हुआ और इसके बाद उन्होंने कैंपस से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया।

छात्राओं के मुद्दों पर भी रही हैं मुखर
अंजलि ने दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला छात्रावास से जुड़े मुद्दों को लेकर चलाए गए अभियानों में भी हिस्सा लिया। इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमन के उत्सव के दौरान सामने आए कथित यौन उत्पीड़न के मामलों के बाद हुए विरोध प्रदर्शन में भी वह सक्रिय रही थीं। इस मामले के बाद कॉलेज स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

फीस और छात्र विरोधी फैसलों का विरोध
अंजलि छात्रावासों से जुड़े फैसलों के अलावा फीस बढ़ोतरी और छात्रों की शिकायतों के समाधान जैसे मुद्दों को भी उठाती रही हैं। उन्होंने कुछ ऐसे पाठ्यक्रमों और आंतरिक मूल्यांकन व्यवस्था का विरोध किया, जिन्हें वह छात्र हितों के खिलाफ मानती हैं। साल 2025 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें इसमें जीत नहीं मिली।

अब बात तीसरी छात्रा नेता दानिश अली की
राहुल गांधी के साथ नजर आईं तीसरी छात्रा नेता दानिश अली हैं। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के इतिहास अध्ययन केंद्र में पीएचडी कर रही हैं। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक छोटे से गांव से आने वाली दानिश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गाडरवारा में की।

पढ़ाई के साथ खेलों में भी रही हैं आगे
दानिश का छात्र जीवन सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा। वह थ्रोबॉल और क्रिकेट में राज्य स्तर पर खेल चुकी हैं। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं, जबकि उनकी मां सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं। दानिश ने दिल्ली के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की।

हाशिए के समुदायों के मुद्दे उठाती रही हैं
दानिश अली अपने भाषणों और छात्र राजनीति में वंचित तबकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए जानी जाती हैं। दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों से जुड़े अधिकारों को लेकर वह लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं। छात्र आंदोलनों में उनके भाषणों को भी काफी चर्चा मिलती रही है।

छात्र राजनीति में भी दर्ज की बड़ी जीत
नवंबर 2025 में हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में दानिश अली ने संयुक्त सचिव पद के लिए चुनाव लड़ा था। उन्हें 1991 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। इस चुनाव में वामपंथी छात्र संगठनों के गठबंधन ने अपना दबदबा कायम रखा था।

तीनों की पृष्ठभूमि अलग, लेकिन आंदोलन ने जोड़ा
नेहा बोरा, अंजलि और दानिश अली की छात्र राजनीति की पृष्ठभूमि अलग-अलग रही है। कोई लंबे समय से छात्र आंदोलनों का हिस्सा रही है, तो किसी ने कैंपस के स्थानीय मुद्दों से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे मौजूदा छात्र आंदोलन ने इन तीनों को एक मंच पर ला दिया है।

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन तीनों छात्रा नेताओं की मौजूदगी ने एक बार फिर छात्र आंदोलन को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। खासकर नेहा बोरा की लंबी भूख हड़ताल और अंजलि व दानिश अली के कैंपस आंदोलनों में सक्रिय रहने के कारण इन तीनों की भूमिका पर अब लोगों की नजर है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि जंतर-मंतर का यह आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर छात्र संगठनों की अगली रणनीति क्या रहती है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखीं ये 3 छात्रा नेता कौन हैं? 23 दिन की भूख हड़ताल से लेकर कैंपस आंदोलन तक, जानिए पूरी कहानी

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 02:08 PM

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और 20 जुलाई को हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उनके साथ तीन छात्रा नेता भी नजर आईं। ये वही छात्राएं हैं, जो पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इनमें नेहा बोरा, अंजलि और दानिश अली के नाम प्रमुख हैं। तीनों का छात्र राजनीति और आंदोलनों से जुड़ा अलग-अलग अनुभव रहा है।

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इन तीन छात्रा नेताओं को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। जंतर-मंतर के प्रदर्शन में इनकी सक्रिय भूमिका रही है और छात्र आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों पर ये लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं। इनमें नेहा बोरा सबसे ज्यादा चर्चा में रही हैं, क्योंकि उन्होंने आंदोलन के दौरान 23 दिन तक भूख हड़ताल की।

23 दिन की भूख हड़ताल ने खींचा ध्यान
नेहा बोरा छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद आंबेडकर विश्वविद्यालय से परास्नातक किया। फिलहाल वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कला और सौंदर्यशास्त्र विद्यालय में पीएचडी कर रही हैं।

पढ़ाई के साथ थिएटर और सामाजिक मुद्दों से जुड़ाव
नेहा का जुड़ाव सिर्फ छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रहा है। वह थिएटर से भी जुड़ी रही हैं और कई सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखती रही हैं। शिक्षा के निजीकरण से लेकर भीड़ हिंसा, बिलकिस बानो मामले और गाजा में मानवीय संकट जैसे मुद्दों पर भी वह अपनी राय सामने रख चुकी हैं।

भूख हड़ताल में नेहा के साथ कौन थे?
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान तीन छात्रों ने भूख हड़ताल की थी। इनमें नेहा बोरा के अलावा मनीष कुमार और अमीन अमितोज शामिल थे। नेहा की 23 दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को देशभर में चर्चा दिलाई। इसके जरिए उन्होंने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की।

दूसरी छात्रा नेता हैं अंजलि
राहुल गांधी के साथ नजर आईं दूसरी छात्रा नेता अंजलि हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमन की छात्रा हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई के छात्र संगठन से जुड़ी हुई हैं। बिहार के गया जिले से आने वाली अंजलि ने छात्र राजनीति में धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और अब वह विश्वविद्यालय के छात्र आंदोलनों में सक्रिय चेहरा मानी जाती हैं।

कॉलेज के एक आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
अंजलि का छात्र राजनीति से जुड़ाव कॉलेज के दूसरे साल में हुआ। उस दौरान वह दिल्ली विश्वविद्यालय की जमीन पर व्यावसायिक ऊंची इमारत बनाए जाने के विरोध में हुए आंदोलन में शामिल हुई थीं। इसी दौरान उनका छात्र संगठन के सदस्यों से संपर्क हुआ और इसके बाद उन्होंने कैंपस से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया।

छात्राओं के मुद्दों पर भी रही हैं मुखर
अंजलि ने दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला छात्रावास से जुड़े मुद्दों को लेकर चलाए गए अभियानों में भी हिस्सा लिया। इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमन के उत्सव के दौरान सामने आए कथित यौन उत्पीड़न के मामलों के बाद हुए विरोध प्रदर्शन में भी वह सक्रिय रही थीं। इस मामले के बाद कॉलेज स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

फीस और छात्र विरोधी फैसलों का विरोध
अंजलि छात्रावासों से जुड़े फैसलों के अलावा फीस बढ़ोतरी और छात्रों की शिकायतों के समाधान जैसे मुद्दों को भी उठाती रही हैं। उन्होंने कुछ ऐसे पाठ्यक्रमों और आंतरिक मूल्यांकन व्यवस्था का विरोध किया, जिन्हें वह छात्र हितों के खिलाफ मानती हैं। साल 2025 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें इसमें जीत नहीं मिली।

अब बात तीसरी छात्रा नेता दानिश अली की
राहुल गांधी के साथ नजर आईं तीसरी छात्रा नेता दानिश अली हैं। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के इतिहास अध्ययन केंद्र में पीएचडी कर रही हैं। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक छोटे से गांव से आने वाली दानिश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गाडरवारा में की।

पढ़ाई के साथ खेलों में भी रही हैं आगे
दानिश का छात्र जीवन सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा। वह थ्रोबॉल और क्रिकेट में राज्य स्तर पर खेल चुकी हैं। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं, जबकि उनकी मां सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं। दानिश ने दिल्ली के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की।

हाशिए के समुदायों के मुद्दे उठाती रही हैं
दानिश अली अपने भाषणों और छात्र राजनीति में वंचित तबकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए जानी जाती हैं। दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों से जुड़े अधिकारों को लेकर वह लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं। छात्र आंदोलनों में उनके भाषणों को भी काफी चर्चा मिलती रही है।

छात्र राजनीति में भी दर्ज की बड़ी जीत
नवंबर 2025 में हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में दानिश अली ने संयुक्त सचिव पद के लिए चुनाव लड़ा था। उन्हें 1991 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। इस चुनाव में वामपंथी छात्र संगठनों के गठबंधन ने अपना दबदबा कायम रखा था।

तीनों की पृष्ठभूमि अलग, लेकिन आंदोलन ने जोड़ा
नेहा बोरा, अंजलि और दानिश अली की छात्र राजनीति की पृष्ठभूमि अलग-अलग रही है। कोई लंबे समय से छात्र आंदोलनों का हिस्सा रही है, तो किसी ने कैंपस के स्थानीय मुद्दों से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे मौजूदा छात्र आंदोलन ने इन तीनों को एक मंच पर ला दिया है।

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन तीनों छात्रा नेताओं की मौजूदगी ने एक बार फिर छात्र आंदोलन को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। खासकर नेहा बोरा की लंबी भूख हड़ताल और अंजलि व दानिश अली के कैंपस आंदोलनों में सक्रिय रहने के कारण इन तीनों की भूमिका पर अब लोगों की नजर है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि जंतर-मंतर का यह आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर छात्र संगठनों की अगली रणनीति क्या रहती है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES