By Malay Ojha | Published: 01 September 2026 at 04:36 PM
पटना में संवाददाता सम्मेलन के दौरान राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए नेताओं को घेरा। उन्होंने जीतन राम मांझी, चिराग पासवान, नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा पर आरक्षण के सवाल पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। तेजस्वी ने कहा कि बिहार में बढ़ाए गए 75 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में महागठबंधन सरकार के दौरान जातीय गणना के बाद पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत की गई थी। ईडब्ल्यूएस के 10 प्रतिशत आरक्षण को जोड़कर कुल आरक्षण 75 प्रतिशत हुआ। उनके मुताबिक इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, लेकिन एनडीए के नेताओं ने केंद्र पर पर्याप्त दबाव नहीं बनाया।
85 प्रतिशत आरक्षण की मांग दोहराई
तेजस्वी ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी आरक्षण की सीमा 75 से बढ़ाकर 85 प्रतिशत करने की बात कह चुकी है। उन्होंने एनडीए नेताओं से सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगने की अपील की।
‘आरक्षण का फायदा परिवार को’
राजद नेता ने आरोप लगाया कि कुछ नेता आरक्षण का राजनीतिक लाभ तो लेते हैं, लेकिन पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्गों के लिए आरक्षण बढ़ाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने आवाज नहीं उठाते। उन्होंने चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, रामदास आठवले और ओम प्रकाश राजभर से भी इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व का सवाल
तेजस्वी ने न्यायपालिका, विश्वविद्यालयों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ पदों में दलित समाज के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि देश की न्यायपालिका में दलित समाज से न्यायाधीशों की संख्या कम क्यों है और विश्वविद्यालयों में कुलपतियों तथा केंद्र में वरिष्ठ अधिकारियों के पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है।
सुरक्षित सीट छोड़कर चुनाव लड़ने की चुनौती
तेजस्वी यादव ने आरक्षण को लेकर बयान देने वाले नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में इस व्यवस्था के खिलाफ हैं तो सुरक्षित सीटों से इस्तीफा देकर सामान्य सीट पर चुनाव लड़कर दिखाएं। उन्होंने कहा कि आरक्षण के सवाल पर केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
पत्रकार कुंदन कुमार के मामले पर सरकार को घेरा
संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी ने बिहार में पुलिस कार्रवाई और पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने वैशाली के पातेपुर के यूट्यूब पत्रकार कुंदन कुमार के साथ कथित मारपीट और उन्हें फंसाने के लिए हथियार रखने के आरोपों का जिक्र किया। तेजस्वी ने कहा कि 29 अगस्त की घटना को लेकर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
DSP और थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की मांग
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि कुंदन कुमार ने पातेपुर में सड़क और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाया था, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने संबंधित डीएसपी और दोनों थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं हुई तो राजद सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा और वैशाली बंद का आह्वान भी किया जा सकता है।
पत्रकार ने सुनाई अपनी आपबीती
प्रेस वार्ता में पत्रकार कुंदन कुमार ने भी अपने साथ हुई कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई और बाद में हथियार रखकर उन्हें फंसाने की कोशिश की गई। उन्होंने पत्रकारों के सामने कथित मारपीट से जुड़े साक्ष्य भी रखे। उन्होंने बताया कि अदालत से उन्हें जमानत मिल चुकी है।
‘बिहार को पुलिस स्टेट नहीं बनने देंगे’
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में सवाल पूछने वालों और सरकार की आलोचना करने वालों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने पुलिस हिरासत में कथित मारपीट और फर्जी मुकदमों के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार को ‘पुलिस स्टेट’ बनाने की किसी कोशिश का राजद विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से सवाल पूछने का अधिकार होना चाहिए।
प्रेस वार्ता में कई नेता रहे मौजूद
इस मौके पर राज्यसभा सांसद संजय यादव, पूर्व विधायक प्रेम चौधरी, शक्ति सिंह यादव, डॉ. अनवर आलम, विनय कुमार यादव, एजाज अहमद और अनिल कुमार साधु समेत राजद के कई नेता मौजूद रहे।
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