Saturday, June 20, 2026

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भरत तिवारी एनकाउंटर में नया मोड़: पिता-भाई पर भी केस, आखिरी फेसबुक लाइव ने खड़े किए बड़े सवाल

By Malay Ojha | Published: 20 June 2026 at 08:40 AM

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस पूरे मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर वायरल भरत का आखिरी फेसबुक लाइव पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

पुलिस की ओर से दर्ज पहली एफआईआर में भरत तिवारी पर अवैध हथियार रखने, पुलिस टीम पर फायरिंग करने और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि 17 जून को उसे गिरफ्तार करने गई टीम पर उसने कई राउंड गोली चलाई थी।

पिता और भाई पर संरक्षण देने का आरोप
पुलिस का दावा है कि भरत के पिता और भाई को उसके पास अवैध हथियार होने की जानकारी थी और इसके बावजूद दोनों उसे संरक्षण दे रहे थे। इसी आधार पर दोनों को भी नामजद किया गया है। हालांकि परिवार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आखिरी फेसबुक लाइव बना पूरे विवाद का केंद्र
भरत तिवारी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था और अक्सर फेसबुक लाइव के जरिए प्रशासन और व्यवस्था पर अपनी राय रखता था। उसके कई वीडियो पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, जिनमें वह तीखी भाषा का इस्तेमाल करता दिखाई देता है।

लाइव वीडियो में दिखा चौंकाने वाला दृश्य
घटना वाले दिन भी भरत ने लगातार कई फेसबुक लाइव किए। वायरल हो रहे आखिरी वीडियो में वह पुलिस से घिरा दिखाई देता है और कुछ देर बाद अपना पिस्टल जमीन पर फेंकता नजर आता है। इसके बाद लाइव अचानक बंद हो जाता है। यही वीडियो अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

परिजनों ने लगाया फर्जी एनकाउंटर का आरोप
भरत के परिजनों का आरोप है कि जब उसने हथियार छोड़ दिया था तो फिर उसे गोली क्यों मारी गई। परिवार का कहना है कि यह फर्जी मुठभेड़ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पुलिस का दावा- आत्मरक्षा में चली गोली
दूसरी एफआईआर में पुलिस ने कहा है कि भरत हथियार लेकर भाग रहा था और पीछा करने के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का दावा है कि सरकारी गाड़ी के बोनट पर भी गोली लगी। कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बाद भी जब वह नहीं माना, तब जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

गांव में भड़का गुस्सा, सड़क जाम
भरत तिवारी की मौत के बाद बिलौटी गांव में भारी आक्रोश देखने को मिला। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही ग्रामीणों और परिजनों ने आरा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग-922 को जाम कर दिया। कई घंटे तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा और यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।

सड़क जाम मामले में भी दर्ज हुई एफआईआर
प्रदर्शन और हंगामे को लेकर पुलिस ने तीसरी एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में बिलौटी पंचायत के मुखिया बलिराम यादव समेत 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 50 से 60 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

आरा में निकला कैंडल मार्च
घटना के विरोध में आरा शहर में बड़ी संख्या में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की। लोगों का कहना है कि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल बिलौटी कांड में दर्ज तीन एफआईआर, मृतक के परिवार पर दर्ज केस और सोशल मीडिया पर वायरल आखिरी फेसबुक लाइव ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून के मुताबिक बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन इसे न्याय की लड़ाई कह रहे हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

‘एनकाउंटर के लिए उकसाने वाले मुख्यमंत्री पर भी मुकदमा दर्ज हो’
भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यदि यह फर्जी मुठभेड़ साबित होती है तो इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार हो रहे एनकाउंटर के लिए पुलिस को राजनीतिक संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसलिए केवल पुलिसकर्मियों पर ही नहीं, बल्कि एनकाउंटर के लिए पुलिस को उकसाने वाले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी मुकदमा दर्ज कर उनकी भूमिका की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

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भरत तिवारी एनकाउंटर में नया मोड़: पिता-भाई पर भी केस, आखिरी फेसबुक लाइव ने खड़े किए बड़े सवाल

By Malay Ojha | Published: 20 June 2026 at 08:40 AM

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस पूरे मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर वायरल भरत का आखिरी फेसबुक लाइव पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

पुलिस की ओर से दर्ज पहली एफआईआर में भरत तिवारी पर अवैध हथियार रखने, पुलिस टीम पर फायरिंग करने और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि 17 जून को उसे गिरफ्तार करने गई टीम पर उसने कई राउंड गोली चलाई थी।

पिता और भाई पर संरक्षण देने का आरोप
पुलिस का दावा है कि भरत के पिता और भाई को उसके पास अवैध हथियार होने की जानकारी थी और इसके बावजूद दोनों उसे संरक्षण दे रहे थे। इसी आधार पर दोनों को भी नामजद किया गया है। हालांकि परिवार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आखिरी फेसबुक लाइव बना पूरे विवाद का केंद्र
भरत तिवारी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था और अक्सर फेसबुक लाइव के जरिए प्रशासन और व्यवस्था पर अपनी राय रखता था। उसके कई वीडियो पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, जिनमें वह तीखी भाषा का इस्तेमाल करता दिखाई देता है।

लाइव वीडियो में दिखा चौंकाने वाला दृश्य
घटना वाले दिन भी भरत ने लगातार कई फेसबुक लाइव किए। वायरल हो रहे आखिरी वीडियो में वह पुलिस से घिरा दिखाई देता है और कुछ देर बाद अपना पिस्टल जमीन पर फेंकता नजर आता है। इसके बाद लाइव अचानक बंद हो जाता है। यही वीडियो अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

परिजनों ने लगाया फर्जी एनकाउंटर का आरोप
भरत के परिजनों का आरोप है कि जब उसने हथियार छोड़ दिया था तो फिर उसे गोली क्यों मारी गई। परिवार का कहना है कि यह फर्जी मुठभेड़ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पुलिस का दावा- आत्मरक्षा में चली गोली
दूसरी एफआईआर में पुलिस ने कहा है कि भरत हथियार लेकर भाग रहा था और पीछा करने के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का दावा है कि सरकारी गाड़ी के बोनट पर भी गोली लगी। कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बाद भी जब वह नहीं माना, तब जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

गांव में भड़का गुस्सा, सड़क जाम
भरत तिवारी की मौत के बाद बिलौटी गांव में भारी आक्रोश देखने को मिला। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही ग्रामीणों और परिजनों ने आरा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग-922 को जाम कर दिया। कई घंटे तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा और यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।

सड़क जाम मामले में भी दर्ज हुई एफआईआर
प्रदर्शन और हंगामे को लेकर पुलिस ने तीसरी एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में बिलौटी पंचायत के मुखिया बलिराम यादव समेत 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 50 से 60 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

आरा में निकला कैंडल मार्च
घटना के विरोध में आरा शहर में बड़ी संख्या में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की। लोगों का कहना है कि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल बिलौटी कांड में दर्ज तीन एफआईआर, मृतक के परिवार पर दर्ज केस और सोशल मीडिया पर वायरल आखिरी फेसबुक लाइव ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून के मुताबिक बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन इसे न्याय की लड़ाई कह रहे हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

‘एनकाउंटर के लिए उकसाने वाले मुख्यमंत्री पर भी मुकदमा दर्ज हो’
भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यदि यह फर्जी मुठभेड़ साबित होती है तो इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार हो रहे एनकाउंटर के लिए पुलिस को राजनीतिक संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसलिए केवल पुलिसकर्मियों पर ही नहीं, बल्कि एनकाउंटर के लिए पुलिस को उकसाने वाले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी मुकदमा दर्ज कर उनकी भूमिका की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

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