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बिहार में 22 हजार आंगनबाड़ी पदों पर बहाली का रास्ता साफ, सम्राट चौधरी कैबिनेट ने 24 बड़े फैसलों पर लगाई मुहर

By Malay Ojha | Published: 29 July 2026 at 08:43 PM

बिहार में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर बहाली का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 24 एजेंडों पर फैसला लिया गया। इसके अलावा बिहार खेल नीति 2026 को भी स्वीकृति मिली है, जिसके तहत खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति और प्रतिभा पहचान कार्यक्रम शुरू किए जाने की योजना है।

समेकित बाल विकास सेवाओं के तहत आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर नियुक्ति किए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। लंबे समय से आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका और सहायिका के खाली पदों को भरने की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में नियुक्ति का रास्ता खुल गया है। हालांकि, बहाली की प्रक्रिया, आवेदन की तारीख और चयन से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग की ओर से अलग से जारी की जाएगी।

खेल के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला
कैबिनेट बैठक में बिहार खेल नीति 2026 को भी मंजूरी दी गई। सरकार की योजना राज्य में खेल प्रतिभाओं को पहचान देने और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। इसके लिए बिहार राज्य खेल छात्रवृत्ति योजना और प्रतिभा पहचान कार्यक्रम जैसी पहल लागू किए जाने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि नई खेल नीति के जरिए राज्य के युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर देने पर जोर रहेगा।

खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानने पर जोर
नई खेल नीति के तहत कम उम्र में ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही उभरते खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता और जरूरी सहयोग देने के लिए छात्रवृत्ति योजना को भी आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य खेल के क्षेत्र में बिहार की भागीदारी को मजबूत करना और राज्य से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करना है।

सब्जी कारोबार के लिए 106 करोड़ रुपये की योजना
कैबिनेट ने बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत वेजफेड की तीन-स्तरीय सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने और उसका विस्तार करने के लिए 106.39 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस फैसले का सीधा संबंध सब्जी उत्पादक किसानों और कृषि से जुड़े कारोबार को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने से है।

प्रखंड स्तर पर बनेगा आधारभूत ढांचा
स्वीकृत योजना के तहत प्रखंड स्तर पर जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही सहकारी समितियों को कामकाज के लिए पूंजी उपलब्ध कराने और रीफर वाहनों की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। रीफर वाहन तापमान नियंत्रित वाहन होते हैं, जिनका इस्तेमाल जल्दी खराब होने वाली सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में किया जाता है।

जमुई में दो बड़े पुलों को मंजूरी
पथ निर्माण विभाग से जुड़े प्रस्तावों पर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जमुई जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 333ए पर दो उच्चस्तरीय आरसीसी पुलों के निर्माण की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इन दोनों पुलों के निर्माण से इलाके में आवागमन बेहतर होने और लोगों को आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

नरियाना घाट पर 93.82 करोड़ रुपये से बनेगा पुल
खैरा-सोनो मार्ग के 72वें किलोमीटर पर नरियाना घाट के पास क्यूल नदी पर नया पुल बनाया जाएगा। इस परियोजना पर 93.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पुल के निर्माण से इस क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाने के साथ-साथ बरसात और नदी के कारण आने वाली यातायात संबंधी परेशानियों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मंगोबंदर-सुकनर नदी पर भी बनेगा नया पुल
इसी मार्ग के 80वें किलोमीटर पर मंगोबंदर-सुकनर नदी पर भी नए पुल के निर्माण को मंजूरी मिली है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 55.96 करोड़ रुपये है। दोनों पुलों के निर्माण को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

बंद चीनी मिल परिसरों में फिर लौटेगी रौनक
कैबिनेट बैठक में दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित बंद पड़ी चीनी मिलों के परिसरों को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। इन परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने और गन्ने से जुड़े उपोत्पाद आधारित उद्योग विकसित करने के लिए परियोजनाओं को स्वीकृति देने का फैसला किया गया है।

गन्ना किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदा
सरकार की इस पहल का उद्देश्य बंद पड़ी चीनी मिलों के परिसरों का दोबारा इस्तेमाल करते हुए स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। नई सहकारी चीनी मिलों और गन्ना आधारित उद्योगों के शुरू होने से गन्ना किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे मिथिलांचल में औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

लखीसराय में 150 करोड़ से ज्यादा की जलापूर्ति योजना
केंद्र प्रायोजित अमृत 2.0 मिशन के तहत लखीसराय जलापूर्ति परियोजना को भी प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के लिए 150.96 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। योजना के जरिए शहर और संबंधित क्षेत्रों में लोगों को बेहतर जलापूर्ति सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

किशनगंज की जलापूर्ति योजना को भी मंजूरी
किशनगंज जलापूर्ति परियोजना के लिए भी कैबिनेट ने 53.71 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। दोनों जलापूर्ति परियोजनाओं का मकसद लोगों तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। इन योजनाओं के पूरा होने के बाद बड़ी आबादी को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

24 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने लिया फैसला
बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 24 एजेंडों पर निर्णय लिया गया। इनमें आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर बहाली, बिहार खेल नीति 2026, सब्जी प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने, जमुई में दो बड़े पुलों के निर्माण, बंद चीनी मिल परिसरों में नई औद्योगिक गतिविधियां शुरू करने और लखीसराय तथा किशनगंज की जलापूर्ति परियोजनाओं से जुड़े फैसले प्रमुख रहे।

रोजगार से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक फैसलों का असर
कैबिनेट के फैसलों को देखें तो सरकार ने एक तरफ बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी पदों पर बहाली का फैसला लिया है, वहीं दूसरी तरफ खेल, कृषि कारोबार, सड़क संपर्क, उद्योग और पेयजल जैसे क्षेत्रों में भी योजनाओं को मंजूरी दी है। आंगनबाड़ी बहाली से रोजगार का अवसर बढ़ेगा, जबकि खेल नीति से युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। वहीं पुल, जलापूर्ति और औद्योगिक परियोजनाओं से अलग-अलग जिलों में बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

कई जिलों में विकास योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
कैबिनेट के इन फैसलों का असर बिहार के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देने की उम्मीद है। जमुई में पुल निर्माण से सड़क संपर्क बेहतर होगा, दरभंगा और मधुबनी में चीनी उद्योग से जुड़ी गतिविधियां शुरू होने की संभावना है। लखीसराय और किशनगंज में जलापूर्ति योजनाओं से लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। वहीं सब्जी प्रसंस्करण और विपणन योजना के जरिए किसानों की उपज को बेहतर बाजार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

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बिहार में 22 हजार आंगनबाड़ी पदों पर बहाली का रास्ता साफ, सम्राट चौधरी कैबिनेट ने 24 बड़े फैसलों पर लगाई मुहर

By Malay Ojha | Published: 29 July 2026 at 08:43 PM

बिहार में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर बहाली का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 24 एजेंडों पर फैसला लिया गया। इसके अलावा बिहार खेल नीति 2026 को भी स्वीकृति मिली है, जिसके तहत खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति और प्रतिभा पहचान कार्यक्रम शुरू किए जाने की योजना है।

समेकित बाल विकास सेवाओं के तहत आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर नियुक्ति किए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। लंबे समय से आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका और सहायिका के खाली पदों को भरने की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में नियुक्ति का रास्ता खुल गया है। हालांकि, बहाली की प्रक्रिया, आवेदन की तारीख और चयन से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग की ओर से अलग से जारी की जाएगी।

खेल के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला
कैबिनेट बैठक में बिहार खेल नीति 2026 को भी मंजूरी दी गई। सरकार की योजना राज्य में खेल प्रतिभाओं को पहचान देने और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। इसके लिए बिहार राज्य खेल छात्रवृत्ति योजना और प्रतिभा पहचान कार्यक्रम जैसी पहल लागू किए जाने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि नई खेल नीति के जरिए राज्य के युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर देने पर जोर रहेगा।

खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानने पर जोर
नई खेल नीति के तहत कम उम्र में ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही उभरते खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता और जरूरी सहयोग देने के लिए छात्रवृत्ति योजना को भी आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य खेल के क्षेत्र में बिहार की भागीदारी को मजबूत करना और राज्य से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करना है।

सब्जी कारोबार के लिए 106 करोड़ रुपये की योजना
कैबिनेट ने बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत वेजफेड की तीन-स्तरीय सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने और उसका विस्तार करने के लिए 106.39 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस फैसले का सीधा संबंध सब्जी उत्पादक किसानों और कृषि से जुड़े कारोबार को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने से है।

प्रखंड स्तर पर बनेगा आधारभूत ढांचा
स्वीकृत योजना के तहत प्रखंड स्तर पर जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही सहकारी समितियों को कामकाज के लिए पूंजी उपलब्ध कराने और रीफर वाहनों की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। रीफर वाहन तापमान नियंत्रित वाहन होते हैं, जिनका इस्तेमाल जल्दी खराब होने वाली सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में किया जाता है।

जमुई में दो बड़े पुलों को मंजूरी
पथ निर्माण विभाग से जुड़े प्रस्तावों पर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जमुई जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 333ए पर दो उच्चस्तरीय आरसीसी पुलों के निर्माण की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इन दोनों पुलों के निर्माण से इलाके में आवागमन बेहतर होने और लोगों को आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

नरियाना घाट पर 93.82 करोड़ रुपये से बनेगा पुल
खैरा-सोनो मार्ग के 72वें किलोमीटर पर नरियाना घाट के पास क्यूल नदी पर नया पुल बनाया जाएगा। इस परियोजना पर 93.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पुल के निर्माण से इस क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाने के साथ-साथ बरसात और नदी के कारण आने वाली यातायात संबंधी परेशानियों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मंगोबंदर-सुकनर नदी पर भी बनेगा नया पुल
इसी मार्ग के 80वें किलोमीटर पर मंगोबंदर-सुकनर नदी पर भी नए पुल के निर्माण को मंजूरी मिली है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 55.96 करोड़ रुपये है। दोनों पुलों के निर्माण को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

बंद चीनी मिल परिसरों में फिर लौटेगी रौनक
कैबिनेट बैठक में दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित बंद पड़ी चीनी मिलों के परिसरों को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। इन परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने और गन्ने से जुड़े उपोत्पाद आधारित उद्योग विकसित करने के लिए परियोजनाओं को स्वीकृति देने का फैसला किया गया है।

गन्ना किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदा
सरकार की इस पहल का उद्देश्य बंद पड़ी चीनी मिलों के परिसरों का दोबारा इस्तेमाल करते हुए स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। नई सहकारी चीनी मिलों और गन्ना आधारित उद्योगों के शुरू होने से गन्ना किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे मिथिलांचल में औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

लखीसराय में 150 करोड़ से ज्यादा की जलापूर्ति योजना
केंद्र प्रायोजित अमृत 2.0 मिशन के तहत लखीसराय जलापूर्ति परियोजना को भी प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के लिए 150.96 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। योजना के जरिए शहर और संबंधित क्षेत्रों में लोगों को बेहतर जलापूर्ति सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

किशनगंज की जलापूर्ति योजना को भी मंजूरी
किशनगंज जलापूर्ति परियोजना के लिए भी कैबिनेट ने 53.71 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। दोनों जलापूर्ति परियोजनाओं का मकसद लोगों तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। इन योजनाओं के पूरा होने के बाद बड़ी आबादी को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

24 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने लिया फैसला
बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 24 एजेंडों पर निर्णय लिया गया। इनमें आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर बहाली, बिहार खेल नीति 2026, सब्जी प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने, जमुई में दो बड़े पुलों के निर्माण, बंद चीनी मिल परिसरों में नई औद्योगिक गतिविधियां शुरू करने और लखीसराय तथा किशनगंज की जलापूर्ति परियोजनाओं से जुड़े फैसले प्रमुख रहे।

रोजगार से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक फैसलों का असर
कैबिनेट के फैसलों को देखें तो सरकार ने एक तरफ बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी पदों पर बहाली का फैसला लिया है, वहीं दूसरी तरफ खेल, कृषि कारोबार, सड़क संपर्क, उद्योग और पेयजल जैसे क्षेत्रों में भी योजनाओं को मंजूरी दी है। आंगनबाड़ी बहाली से रोजगार का अवसर बढ़ेगा, जबकि खेल नीति से युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। वहीं पुल, जलापूर्ति और औद्योगिक परियोजनाओं से अलग-अलग जिलों में बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

कई जिलों में विकास योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
कैबिनेट के इन फैसलों का असर बिहार के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देने की उम्मीद है। जमुई में पुल निर्माण से सड़क संपर्क बेहतर होगा, दरभंगा और मधुबनी में चीनी उद्योग से जुड़ी गतिविधियां शुरू होने की संभावना है। लखीसराय और किशनगंज में जलापूर्ति योजनाओं से लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। वहीं सब्जी प्रसंस्करण और विपणन योजना के जरिए किसानों की उपज को बेहतर बाजार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

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