By aryavartalive | Published: 10 June 2026 at 05:01 PM
बिहार में जमीन से जुड़े लाखों लंबित मामलों को लेकर सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी अंचलों में 11 जून से 17 जून तक विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। इस दौरान भूमि अभिलेख सुधार, उत्तराधिकार नामांतरण और बंटवारा आधारित नामांतरण से जुड़े लंबित आवेदनों की स्कैनिंग, पोर्टल पर अपलोडिंग और उनके निपटारे की प्रक्रिया तेज की जाएगी। विभाग ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बुधवार को कहा कि राज्यभर में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन लंबित हैं, जिनका इंतजार आम रैयत लंबे समय से कर रहे हैं। ऐसे मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। सभी अंचल कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग करते हुए कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
लाखों लोगों की जमीन संबंधी समस्याएं फंसी हुई हैं
मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष विशेष महाअभियान के दौरान जमीन से संबंधित विभिन्न प्रकार के आवेदन लिए गए थे। इनमें डिजिटल जमाबंदी की त्रुटियां सुधारने, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन दर्ज कराने, उत्तराधिकार आधारित नामांतरण और बंटवारा आधारित नामांतरण के आवेदन शामिल थे। अभियान के दौरान करीब 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या अब भी विभिन्न चरणों में लंबित है।
तय समय सीमा के बावजूद नहीं मिली अपेक्षित प्रगति
विभाग की योजना थी कि प्राप्त सभी आवेदनों को स्कैन कर संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किया जाए और उसके बाद समयबद्ध तरीके से उनका निष्पादन किया जाए। इसके लिए मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि कई जिलों में काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया, जिससे बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह गए।
विभागीय समीक्षा में सामने आई चिंताजनक तस्वीर
राजस्व मंत्री ने बताया कि अब तक प्राप्त आवेदनों में केवल 81.91 प्रतिशत की स्कैनिंग हो सकी है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि मात्र 26.43 प्रतिशत आवेदन ही संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किए गए हैं। विभाग का मानना है कि यदि अपलोडिंग की प्रक्रिया ही धीमी रहेगी तो आगे का निष्पादन भी प्रभावित होगा और आम लोगों को राहत मिलने में देरी होगी।
दो प्रमुख लक्ष्यों पर रहेगा विशेष फोकस
विशेष अभियान के दौरान विभाग ने दो प्रमुख लक्ष्यों को प्राथमिकता दी है। पहला, महाअभियान के दौरान प्राप्त सभी आवेदनों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी की जाए। दूसरा, सभी आवेदनों को संबंधित ऑनलाइन व्यवस्था में पूरी तरह दर्ज किया जाए। इसके बाद अगले चरण में लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा ताकि लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
रविवार को भी जारी रहेगा काम
सरकार ने अभियान की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि इस दौरान रविवार को भी कार्य बंद नहीं रहेगा। सभी अंचलों को अतिरिक्त प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन जिलों में विशेष सर्वेक्षण का कार्य अपेक्षाकृत कम दबाव में है, वहां के अमीनों को भी स्कैनिंग और अपलोडिंग कार्य में लगाया जाएगा ताकि लंबित मामलों को तेजी से निपटाया जा सके।
कई जिलों के अमीनों की ली जाएगी मदद
विभाग के अनुसार शिवहर, शेखपुरा, लखीसराय, जहानाबाद और अरवल को छोड़कर अन्य जिलों के विशेष सर्वेक्षण अमीनों को इस अभियान में लगाया जाएगा। इससे अंचल कार्यालयों को अतिरिक्त मानव संसाधन मिलेगा और काम की गति बढ़ने की उम्मीद है।
अधिकारियों को दी गई कड़ी चेतावनी
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस अभियान को केवल औपचारिकता समझने की गलती कोई अधिकारी न करे। निर्धारित लक्ष्य हासिल करना संबंधित अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी की जाएगी और प्रत्येक जिले की प्रगति की समीक्षा भी होगी।
लाखों रैयतों को मिल सकती है बड़ी राहत
भूमि अभिलेखों में त्रुटि, नामांतरण और बंटवारे से जुड़े मामलों के कारण लंबे समय से परेशान लाखों रैयतों के लिए यह अभियान राहत भरा साबित हो सकता है। यदि निर्धारित समय के भीतर स्कैनिंग, अपलोडिंग और निष्पादन का काम पूरा होता है तो राज्य में जमीन संबंधी कई पुराने मामले तेजी से सुलझने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

