By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 10:18 PM
पटना: बिहार में घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने के काम में अब किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और यूएलए मॉडल के तहत तय लक्ष्य से पीछे चल रहे वेंडरों पर कार्रवाई की तैयारी है। ऊर्जा विभाग ने साफ कर दिया है कि अगर किसी वेंडर ने काम की रफ्तार नहीं बढ़ाई तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है और नियम के मुताबिक आगे की कार्रवाई भी होगी। इसके साथ ही हर दिन लगाए जा रहे सोलर संयंत्रों की संख्या और वास्तविक प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
यह फैसला सोमवार को बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक और इसके बाद ऊर्जा विभाग की वेंडरों के साथ हुई बैठक में लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा में पीएम सूर्य घर योजना के यूएलए मॉडल और मुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध योजना की जिला-वार प्रगति पर चर्चा हुई। अधिकारियों को तय समय के भीतर लक्ष्य पूरा करने और जमीन पर काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
रोज कितने सोलर पैनल लगे, अब देना होगा हिसाब
ऊर्जा विभाग के सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने वेंडरों के साथ हुई बैठक में कहा कि 100 दिवसीय लक्ष्य के मुताबिक हर वेंडर को रोजाना तय संख्या में रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने होंगे। इतना ही नहीं, दिनभर में हुए काम की प्रगति रिपोर्ट भी संबंधित बिजली वितरण कंपनी को देनी होगी। यानी अब सिर्फ कागजों पर लक्ष्य पूरा दिखाने के बजाय जमीन पर हुए काम का रोजाना हिसाब लिया जाएगा।
सुस्ती दिखी तो कारण बताओ नोटिस
बैठक में उन वेंडरों को खास तौर पर चेतावनी दी गई जो निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले पीछे चल रहे हैं। ऊर्जा विभाग ने कहा कि ऐसे वेंडरों को काम में तेजी लानी होगी। अगर अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई गई तो कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार जरूरी कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग का मकसद साफ है कि सोलर पैनल लगाने के काम को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।
हर दिन होगी वेंडरों के काम की समीक्षा
ऊर्जा सचिव ने अधिकारियों और वेंडरों को यह भी स्पष्ट किया कि आगे की समीक्षा सिर्फ साप्ताहिक या मासिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। हर दिन की उपलब्धि पर नजर रखी जाएगी। वेंडर को जितना लक्ष्य दिया गया है, उसके मुकाबले उसने वास्तव में कितना काम किया, इसका आकलन किया जाएगा। इस व्यवस्था से उन एजेंसियों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी जो लक्ष्य के मुताबिक काम नहीं कर रही हैं।
प्रदर्शन के आधार पर तय होगी जवाबदेही
विभाग की ओर से कहा गया कि सभी वेंडरों की जवाबदेही उनके प्रदर्शन के आधार पर तय की जाएगी। इससे सोलर संयंत्र लगाने के काम में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक परिवारों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिले और इसके लिए घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।
मुख्य सचिव ने सत्यापन जल्द पूरा करने को कहा
इससे पहले मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यूएलए मॉडल के तहत पात्र कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के सत्यापन पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र परिवारों की पहचान और सत्यापन का काम जल्द पूरा किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का फायदा मिल सके। उन्होंने सभी जिलों को तय लक्ष्य समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए।
पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने पर जोर
बैठक में ऊर्जा सचिव अजय यादव ने दोनों योजनाओं की जिला-वार प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूएलए मॉडल के तहत पात्र लाभार्थियों के सत्यापन से लेकर रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने तक के काम की लगातार निगरानी की जा रही है। संयंत्रों की गुणवत्ता और काम की स्थिति पर भी मुख्यालय स्तर से नजर रखी जा रही है। जिलों को निर्देश दिया गया है कि काम की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ जमीन पर नियमित निरीक्षण भी किया जाए।
जिलों में भी तेज करनी होगी काम की रफ्तार
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह भी कहा गया कि सिर्फ मुख्यालय स्तर पर निगरानी से काम पूरा नहीं होगा। जिला स्तर पर अधिकारियों को मौके पर जाकर काम की स्थिति देखनी होगी। जहां लाभार्थियों का सत्यापन लंबित है, वहां प्रक्रिया तेज करनी होगी और जहां सोलर संयंत्र लगाने का काम धीमा है, वहां संबंधित एजेंसी और वेंडर से जवाब मांगा जाएगा।
सोलर योजना के बड़े लक्ष्य पर सरकार की नजर
बिहार सरकार पहले ही पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत बड़ी संख्या में घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य तय कर चुकी है। जून में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ढाई लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने के काम को गति देने और 20 नवंबर तक लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया था। इसके अलावा मई में हुई ऊर्जा विभाग की समीक्षा में भी कुटीर ज्योति योजना के तहत 10 लाख उपभोक्ताओं के परिसरों में सोलर संयंत्र लगाने के लक्ष्य पर तेजी से काम करने की बात कही गई थी।
अब सिर्फ लक्ष्य नहीं, काम की रफ्तार भी अहम
ताजा समीक्षा के बाद संकेत साफ हैं कि सरकार अब सोलर संयंत्र लगाने के लक्ष्य को सिर्फ कागजी आंकड़ों में पूरा होता नहीं देखना चाहती। लाभार्थी का सत्यापन, संयंत्र की स्थापना, गुणवत्ता जांच और रोजाना की प्रगति—हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। खासकर पीछे चल रहे वेंडरों पर कार्रवाई की चेतावनी से यह साफ है कि आने वाले दिनों में काम की गति और एजेंसियों के प्रदर्शन को लेकर सख्ती और बढ़ सकती है।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में उत्तर बिहार बिजली वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार, दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक सौरव जोरवाल के साथ सभी जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, वेंडरों के साथ हुई बैठक में ऊर्जा विभाग ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक तेजी से काम करने और रोजाना की प्रगति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
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