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नालंदा में बिजली व्यवस्था को बड़ी मजबूती, चंडी ग्रिड उपकेंद्र शुरू; 2 पावर ट्रांसफॉर्मर और 132 केवी लाइन भी चालू

By Malay Ojha | Published: 30 July 2026 at 01:58 PM

नालंदा जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ने 29 जुलाई को चंडी के 132/33 केवी ग्रिड उपकेंद्र को चालू कर दिया। इसके साथ ही 132 केवी डबल सर्किट चंडी-हरनौत ट्रांसमिशन लाइन और 50 एमवीए क्षमता वाले दो पावर ट्रांसफॉर्मर भी ऊर्जान्वित किए गए हैं। नई व्यवस्था शुरू होने से चंडी समेत आसपास के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।

नए ग्रिड उपकेंद्र के चालू होने का सीधा फायदा चंडी और उसके आसपास के बिजली उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना से चंडी के अलावा चैनपुर, बिरनावां, नगरनौसा, नूरसराय, भोभी, इंदौत, दियावां और थरथरी जैसे क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बिजली की मांग बढ़ने के साथ इन इलाकों में आपूर्ति व्यवस्था को संभालने में भी नई परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है।

दो 50 एमवीए ट्रांसफॉर्मर से बढ़ेगी बिजली संभालने की क्षमता
इस परियोजना के तहत 50 एमवीए क्षमता वाले दो पावर ट्रांसफॉर्मर भी चालू किए गए हैं। इन ट्रांसफॉर्मरों के शुरू होने से क्षेत्र में बिजली के बढ़ते भार को संभालने की क्षमता बढ़ेगी। खास तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ खेती, कारोबार और उद्योग से जुड़ी बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

132 केवी डबल सर्किट लाइन से ट्रांसमिशन नेटवर्क को सहारा
चंडी-हरनौत के बीच 132 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन भी परियोजना का अहम हिस्सा है। इसके चालू होने से चंडी ग्रिड उपकेंद्र को मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे बिजली के संचरण को बेहतर तरीके से संभालने और अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के भार को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

वोल्टेज में सुधार और बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद होने की उम्मीद
ग्रिड उपकेंद्र के शुरू होने से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद जताई गई है। नई व्यवस्था के कारण वोल्टेज से जुड़ी दिक्कतों को कम करने और बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है। इसका असर उन उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है, जिन्हें बिजली की मांग बढ़ने के समय आपूर्ति में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।

बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने की तैयारी
नालंदा के ग्रामीण और शहरी इलाकों में समय के साथ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। घरों में बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ खेती, छोटे कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी अधिक बिजली की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में नए ग्रिड उपकेंद्र और अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई व्यवस्था का हिस्सा हैं।

ओवरलोडिंग कम करने में मिल सकती है मदद
नई ट्रांसमिशन व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि मौजूदा नेटवर्क पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को बांटा जा सकेगा। बिजली के भार का बेहतर संतुलन होने से ट्रांसमिशन व्यवस्था पर ओवरलोडिंग का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे बिजली आपूर्ति के दौरान तकनीकी समस्याओं की संभावना को भी कम किया जा सकता है।

हजारों उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली मिलने की उम्मीद
चंडी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घरेलू, कृषि और व्यावसायिक उपभोक्ता बिजली पर निर्भर हैं। नए ग्रिड उपकेंद्र के चालू होने के बाद इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की सुविधा मिलेगी। हालांकि वास्तविक असर बिजली वितरण व्यवस्था और स्थानीय मांग पर भी निर्भर करेगा, लेकिन ट्रांसमिशन स्तर पर यह परियोजना क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

ऊर्जा सचिव ने बताया महत्वपूर्ण कदम
ऊर्जा सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय कुमार यादव ने कहा कि राज्य में मजबूत और आधुनिक बिजली ढांचा तैयार करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, चंडी ग्रिड उपकेंद्र का चालू होना गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मजबूत बिजली ढांचा राज्य के विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाता है।

नालंदा की ट्रांसमिशन व्यवस्था होगी और मजबूत
बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि चंडी ग्रिड उपकेंद्र के चालू होने से नालंदा जिले की ट्रांसमिशन व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। उनके मुताबिक, इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ वोल्टेज में सुधार लाने में मदद मिलेगी और क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

घरेलू से औद्योगिक जरूरत तक संभालने में मदद
नई व्यवस्था का असर सिर्फ घरेलू बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र में कृषि गतिविधियों, दुकानों, छोटे कारोबार और उद्योगों की बिजली जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रांसमिशन क्षमता इन सभी क्षेत्रों की मांग को बेहतर तरीके से संभालने में मदद कर सकती है। भविष्य में बिजली की खपत बढ़ने पर भी इस ढांचे का उपयोग किया जा सकेगा।

बिहार में बिजली नेटवर्क के विस्तार पर जोर
राज्य में बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए ग्रिड उपकेंद्र, ट्रांसमिशन लाइन और पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन केंद्रों से वितरण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने की व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है। चंडी परियोजना भी इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके जरिए बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप ट्रांसमिशन ढांचे की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

आने वाले समय में बिजली की बढ़ती मांग के लिए तैयार होगा ढांचा
बिजली की मांग हर साल बढ़ रही है और आने वाले समय में घरेलू खपत के साथ कृषि, कारोबार और उद्योगों में भी इसकी जरूरत बढ़ने की संभावना है। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे उपभोक्ताओं तक भरोसेमंद तरीके से पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क भी जरूरी है। चंडी में शुरू की गई नई व्यवस्था इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम है।

सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति का लक्ष्य
बिहार में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है। चंडी ग्रिड उपकेंद्र, 132 केवी डबल सर्किट लाइन और दो 50 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर के चालू होने से नालंदा के इस हिस्से में बिजली ढांचे की क्षमता बढ़ी है। अब आने वाले समय में इस परियोजना का वास्तविक लाभ क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की स्थिरता, बेहतर वोल्टेज और बढ़ती मांग को संभालने की क्षमता के रूप में मिलने की उम्मीद है।

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नालंदा में बिजली व्यवस्था को बड़ी मजबूती, चंडी ग्रिड उपकेंद्र शुरू; 2 पावर ट्रांसफॉर्मर और 132 केवी लाइन भी चालू

By Malay Ojha | Published: 30 July 2026 at 01:58 PM

नालंदा जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ने 29 जुलाई को चंडी के 132/33 केवी ग्रिड उपकेंद्र को चालू कर दिया। इसके साथ ही 132 केवी डबल सर्किट चंडी-हरनौत ट्रांसमिशन लाइन और 50 एमवीए क्षमता वाले दो पावर ट्रांसफॉर्मर भी ऊर्जान्वित किए गए हैं। नई व्यवस्था शुरू होने से चंडी समेत आसपास के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।

नए ग्रिड उपकेंद्र के चालू होने का सीधा फायदा चंडी और उसके आसपास के बिजली उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना से चंडी के अलावा चैनपुर, बिरनावां, नगरनौसा, नूरसराय, भोभी, इंदौत, दियावां और थरथरी जैसे क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बिजली की मांग बढ़ने के साथ इन इलाकों में आपूर्ति व्यवस्था को संभालने में भी नई परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है।

दो 50 एमवीए ट्रांसफॉर्मर से बढ़ेगी बिजली संभालने की क्षमता
इस परियोजना के तहत 50 एमवीए क्षमता वाले दो पावर ट्रांसफॉर्मर भी चालू किए गए हैं। इन ट्रांसफॉर्मरों के शुरू होने से क्षेत्र में बिजली के बढ़ते भार को संभालने की क्षमता बढ़ेगी। खास तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ खेती, कारोबार और उद्योग से जुड़ी बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

132 केवी डबल सर्किट लाइन से ट्रांसमिशन नेटवर्क को सहारा
चंडी-हरनौत के बीच 132 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन भी परियोजना का अहम हिस्सा है। इसके चालू होने से चंडी ग्रिड उपकेंद्र को मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे बिजली के संचरण को बेहतर तरीके से संभालने और अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के भार को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

वोल्टेज में सुधार और बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद होने की उम्मीद
ग्रिड उपकेंद्र के शुरू होने से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद जताई गई है। नई व्यवस्था के कारण वोल्टेज से जुड़ी दिक्कतों को कम करने और बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है। इसका असर उन उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है, जिन्हें बिजली की मांग बढ़ने के समय आपूर्ति में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।

बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने की तैयारी
नालंदा के ग्रामीण और शहरी इलाकों में समय के साथ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। घरों में बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ खेती, छोटे कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी अधिक बिजली की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में नए ग्रिड उपकेंद्र और अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई व्यवस्था का हिस्सा हैं।

ओवरलोडिंग कम करने में मिल सकती है मदद
नई ट्रांसमिशन व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि मौजूदा नेटवर्क पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को बांटा जा सकेगा। बिजली के भार का बेहतर संतुलन होने से ट्रांसमिशन व्यवस्था पर ओवरलोडिंग का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे बिजली आपूर्ति के दौरान तकनीकी समस्याओं की संभावना को भी कम किया जा सकता है।

हजारों उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली मिलने की उम्मीद
चंडी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घरेलू, कृषि और व्यावसायिक उपभोक्ता बिजली पर निर्भर हैं। नए ग्रिड उपकेंद्र के चालू होने के बाद इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की सुविधा मिलेगी। हालांकि वास्तविक असर बिजली वितरण व्यवस्था और स्थानीय मांग पर भी निर्भर करेगा, लेकिन ट्रांसमिशन स्तर पर यह परियोजना क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

ऊर्जा सचिव ने बताया महत्वपूर्ण कदम
ऊर्जा सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय कुमार यादव ने कहा कि राज्य में मजबूत और आधुनिक बिजली ढांचा तैयार करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, चंडी ग्रिड उपकेंद्र का चालू होना गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मजबूत बिजली ढांचा राज्य के विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाता है।

नालंदा की ट्रांसमिशन व्यवस्था होगी और मजबूत
बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि चंडी ग्रिड उपकेंद्र के चालू होने से नालंदा जिले की ट्रांसमिशन व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। उनके मुताबिक, इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ वोल्टेज में सुधार लाने में मदद मिलेगी और क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

घरेलू से औद्योगिक जरूरत तक संभालने में मदद
नई व्यवस्था का असर सिर्फ घरेलू बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र में कृषि गतिविधियों, दुकानों, छोटे कारोबार और उद्योगों की बिजली जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रांसमिशन क्षमता इन सभी क्षेत्रों की मांग को बेहतर तरीके से संभालने में मदद कर सकती है। भविष्य में बिजली की खपत बढ़ने पर भी इस ढांचे का उपयोग किया जा सकेगा।

बिहार में बिजली नेटवर्क के विस्तार पर जोर
राज्य में बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए ग्रिड उपकेंद्र, ट्रांसमिशन लाइन और पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन केंद्रों से वितरण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने की व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है। चंडी परियोजना भी इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके जरिए बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप ट्रांसमिशन ढांचे की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

आने वाले समय में बिजली की बढ़ती मांग के लिए तैयार होगा ढांचा
बिजली की मांग हर साल बढ़ रही है और आने वाले समय में घरेलू खपत के साथ कृषि, कारोबार और उद्योगों में भी इसकी जरूरत बढ़ने की संभावना है। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे उपभोक्ताओं तक भरोसेमंद तरीके से पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क भी जरूरी है। चंडी में शुरू की गई नई व्यवस्था इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम है।

सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति का लक्ष्य
बिहार में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है। चंडी ग्रिड उपकेंद्र, 132 केवी डबल सर्किट लाइन और दो 50 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर के चालू होने से नालंदा के इस हिस्से में बिजली ढांचे की क्षमता बढ़ी है। अब आने वाले समय में इस परियोजना का वास्तविक लाभ क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की स्थिरता, बेहतर वोल्टेज और बढ़ती मांग को संभालने की क्षमता के रूप में मिलने की उम्मीद है।

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