By Malay Ojha | Published: 17 June 2026 at 07:39 PM
बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र किए जाने की चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसकी वजह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी सोच एक ‘बड़े पटना’ की है और भविष्य में उसकी पहचान पाटलिपुत्र के रूप में स्थापित होनी चाहिए। जीर्ण-शीर्ण शहरों की जगह आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की योजना के बीच दिए गए इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजधानी के विस्तार और नई टाउनशिप परियोजनाओं पर बात करते हुए कहा कि बिहार के विकास के लिए बड़े स्तर पर आधुनिक नगर बसाए जा रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने पाटलिपुत्र का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों की लंबे समय से यह मांग रही है कि जिस शहर की पहचान कभी मगध साम्राज्य की राजधानी के रूप में थी, उसे फिर से उसी ऐतिहासिक नाम से जाना जाए।
‘बड़े पटना’ की परिकल्पना पर क्या बोले मुख्यमंत्री?
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सोच केवल वर्तमान पटना तक सीमित नहीं है, बल्कि एक विस्तारित और आधुनिक राजधानी विकसित करने की है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस बड़े शहरी क्षेत्र की पहचान पाटलिपुत्र के रूप में स्थापित की जा सकती है। हालांकि उन्होंने नाम बदलने की किसी औपचारिक प्रक्रिया या सरकारी निर्णय की घोषणा नहीं की।
टाउनशिप परियोजनाओं पर भी दिया बड़ा संदेश
सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य में विकसित की जा रही नई टाउनशिप परियोजनाओं का उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और निवेश को बढ़ावा देना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विकास कार्यों के दौरान किसी भी नागरिक के हितों को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा। सरकार पुनर्वास और जनहित के सभी पहलुओं का ध्यान रखेगी।
बयान के बाद क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?
मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या सरकार भविष्य में राजधानी का नाम बदलने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन बयान को संभावित पहल के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा फिर से सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है।
करीब 3 हजार साल पुराना है शहर का इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार पटना का इतिहास लगभग तीन हजार वर्ष पुराना माना जाता है। प्राचीन भारत में यह शिक्षा, संस्कृति, प्रशासन और व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था। यही वह भूमि थी जहां से मगध साम्राज्य ने अपनी शक्ति का विस्तार किया और जिसने भारतीय इतिहास को नई दिशा दी।
चंद्रगुप्त और अशोक की राजधानी रहा पाटलिपुत्र
मौर्य काल में पाटलिपुत्र दुनिया के प्रमुख नगरों में गिना जाता था। महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक ने यहीं से शासन किया। उस समय यह राजनीतिक शक्ति का केंद्र होने के साथ-साथ ज्ञान, संस्कृति और व्यापार का भी प्रमुख केंद्र था। विदेशी यात्रियों ने भी अपने विवरणों में इसकी समृद्धि का उल्लेख किया है।
कैसे पड़ा पाटलिपुत्र नाम?
इतिहास से जुड़े कई विवरण बताते हैं कि शुरुआती दौर में यह इलाका पाटलि नामक पौधों की अधिकता के कारण पाटलिग्राम कहलाता था। समय के साथ यह गांव एक बड़े नगर में तब्दील हुआ और इसका नाम पाटलिपुत्र पड़ गया। गंगा के किनारे स्थित होने के कारण यह व्यापार का बड़ा केंद्र भी बना, जहां जलमार्ग से व्यापक कारोबार होता था।
पाटलिपत्तन से पटना बनने तक का सफर
व्यापारिक महत्व बढ़ने के बाद इस नगर को पाटलिपत्तन भी कहा जाने लगा। इतिहासकारों का मानना है कि समय के साथ पत्तन शब्द का उच्चारण बदलता गया और धीरे-धीरे यही नाम पटना के रूप में प्रचलित हो गया। बाद की सदियों में यह नाम पूरी तरह स्थापित हो गया।
कब पड़ा पटना नाम?
ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान इस शहर को आधिकारिक रूप से पटना नाम दिया गया। तब से लेकर आज तक यह शहर इसी नाम से जाना जाता है। हालांकि बीच-बीच में इसे फिर से पाटलिपुत्र नाम देने की मांग उठती रही है।
अब आगे क्या?
मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भविष्य में राजधानी के नाम को लेकर कोई औपचारिक पहल होगी। फिलहाल सरकार की ओर से ऐसा कोई निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन इतना तय है कि ‘पटना बनाम पाटलिपुत्र’ की बहस एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।
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