By aryavartalive | Published: 27 July 2026 at 08:35 AM
पटना: सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने को जरूरी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन करने के बाद सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ा है। अगर वह अनशन जारी रखते तो उनकी जान भी जा सकती थी। ऐसे में अनशन खत्म करना प्राथमिकता थी।
‘सवाल उठाने वालों को विवेक से सोचना चाहिए’
धनंजय सिन्हा ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने को लेकर सवाल उठाने वाले बुद्धिजीवियों से विवेकपूर्ण तरीके से सोचने और बोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे को समझते समय यह देखना जरूरी है कि प्राथमिकता क्या है और कौन-सी बातें बाद की हैं।
‘किससे जूस पिया, यह सेकेंडरी सवाल’
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद इस बात पर चर्चा करना कि उन्होंने किससे जूस पिया, गिलास से पिया या चम्मच से, यह मूल मुद्दे से हटकर है। धनंजय सिन्हा ने कहा कि ऐसे सवालों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।
‘एक सप्ताह अनशन करके खुद समझ जाएंगे’
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि जो लोग प्राथमिक और द्वितीयक मुद्दों के बीच अंतर नहीं समझ पा रहे हैं, उन्हें एक सप्ताह का अनशन करके देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें खुद उनके प्रश्नों का उत्तर मिल जायेगा।
‘ऐसे रवैये से लोकतंत्र के सामने खड़ा हुआ संकट’
धनंजय सिन्हा ने कहा कि देश के बुद्धिजीवियों ने अनेकों मुद्दों पर विवेकपूर्ण ढंग से न सोचकर तर्कों को प्राथमिकता देते आए हैं और मुख्य लक्ष्यों को नजरअंदाज किया, जिस कारण आज देश तानाशाही के चौराहे पर आकर खड़ा हो गया है, और तब मजबूर होकर छात्र-युवाओं को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
‘सोनम वांगचुक ने मंत्री नहीं, इंसान के हाथ से जूस पिया’
धनंजय सिन्हा ने कहा कि सोनम वांगचुक ने किसी मंत्री के हाथ से नहीं, बल्कि एक इंसान के हाथ से जूस पिया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर एक इंसान होता है, चाहे वह जागा हुआ हो या सोया हुआ। उनके मुताबिक इस घटना को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है। 
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