By Malay Ojha | Published: 11 June 2026 at 04:23 PM
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया गुरुवार को अहम मोड़ पर पहुंच गई। नामांकन वापसी की आखिरी तारीख गुजरने के बाद किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया। इसके साथ ही सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया। सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी के नए चेहरे पवन सिंह को लेकर है, जिन्हें पहली बार विधान परिषद भेजा गया है।
निर्वाचन कार्यक्रम के तहत गुरुवार को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि थी। पूरे दिन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद यह साफ हो गया कि मैदान में मौजूद सभी उम्मीदवार चुनाव लड़ने की स्थिति में बने रहेंगे। चूंकि जितनी सीटें थीं उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए मतदान की जरूरत ही नहीं पड़ी।
निर्वाची पदाधिकारी ने किया औपचारिक ऐलान
नामांकन वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद निर्वाची पदाधिकारी ने सभी उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। इसके साथ ही विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो गई। अब इन सभी उम्मीदवारों के नाम परिषद के नए सदस्यों के रूप में दर्ज हो जाएंगे।
पवन सिंह पर सबसे ज्यादा चर्चा
इस चुनाव में सबसे अधिक सुर्खियां पवन सिंह ने बटोरी हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पहली बार विधान परिषद के लिए उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के इस फैसले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्विरोध जीत के बाद पवन सिंह अब राज्य की राजनीति में नई भूमिका निभाते नजर आएंगे।
भाजपा के लिए अहम संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पवन सिंह को विधान परिषद भेजकर भाजपा ने कई सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। पार्टी संगठन भी इस फैसले को आने वाले समय की रणनीति से जोड़कर देख रहा है। ऐसे में उनकी जीत सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
सभी सीटों पर निर्विरोध चुनाव
इस बार विधान परिषद की जिन 10 सीटों पर चुनाव होना था, वहां उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर रही। यही वजह रही कि मुकाबले की नौबत नहीं आई। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नामांकन और जांच की कार्रवाई पूरी होने के बाद सभी उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
मतदान की नहीं पड़ी जरूरत
आमतौर पर विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने पर मतदान कराया जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। किसी भी सीट पर अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं होने से निर्वाचन आयोग को मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इससे चुनावी प्रक्रिया भी कम समय में पूरी हो गई।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खासकर पवन सिंह की एंट्री को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उनकी भूमिका और सक्रियता पर सबकी नजर रहेगी।
आगे क्या होगा?
अब निर्वाचित उम्मीदवारों के नामों की औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद वे विधान परिषद सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। नई राजनीतिक परिस्थितियों में परिषद की कार्यवाही और विभिन्न मुद्दों पर इन सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है।

