By Malay Ojha | Published: 12 June 2026 at 08:48 AM
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं सत्ताधारी दल इन आरोपों को खारिज कर रहा है। इसी बीच संत समाज और कुछ प्रमुख नेताओं के बयानों ने विवाद को और हवा दे दी है।
राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर शुरू हुए विवाद ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी का दावा है कि मंदिर के दानपात्र से बड़ी रकम गायब हुई है और इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय पर किसी भी तरह की अनियमितता गंभीर चिंता का विषय है।
अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली प्रभावी होती तो इस तरह के आरोप सामने नहीं आते। उनके अनुसार, श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब जनता को मिलना चाहिए।
संत समाज के बयान से बढ़ी चर्चा
विवाद उस समय और गहरा गया जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े संतों की ओर से भी सवाल उठने लगे। महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने जांच प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनके बयान के बाद राजनीतिक दलों को सरकार और ट्रस्ट पर निशाना साधने का नया अवसर मिल गया।
बृजभूषण के बयान ने बढ़ाई हलचल
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि वह अभी पूरी बात बताएंगे तो मुश्किल में पड़ सकते हैं और समय आने पर सच सामने लाएंगे। उनके इस बयान के बाद विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि आखिर वे किन लोगों की ओर इशारा कर रहे हैं और वह समय कब आएगा जब पूरा सच सामने रखा जाएगा।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी समाजवादी पार्टी का समर्थन किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि चढ़ावे को लेकर कोई अनियमितता हुई है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस मामले में स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
सत्ताधारी दल ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि विपक्ष बिना तथ्यों के राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि राम मंदिर और उससे जुड़े सभी प्रबंध पारदर्शी तरीके से संचालित किए जा रहे हैं तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
चुनावी राजनीति में अयोध्या फिर केंद्र में
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या लंबे समय से प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रही है। ऐसे में राम मंदिर से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करता है। विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आते ही विभिन्न दल अयोध्या से जुड़े मुद्दों पर अधिक आक्रामक रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है बहस
फिलहाल राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ताधारी दल आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। माना जा रहा है कि चुनावी माहौल के बीच अयोध्या एक बार फिर प्रमुख राजनीतिक केंद्र बनने जा रही है।

