Monday, June 29, 2026

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पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा दांव! विधानसभा चुनाव लड़ेंगे बृजेश सिंह, किस सीट से उतरेंगे? बढ़ी सियासी हलचल

By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 11:37 AM

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से पूर्वांचल की सियासत के प्रभावशाली चेहरे रहे पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके इस बयान के बाद वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर समेत पूरे पूर्वांचल में नए राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।

वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर रविवार को बृजेश सिंह अचानक लोगों के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और जल्द ही यह भी बता देंगे कि किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने जनता से वादा करते हुए कहा कि लोगों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहेंगे और जनसेवा के लिए ही सक्रिय राजनीति में आए हैं।

पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे
अब तक बृजेश सिंह पर्दे के पीछे रहकर राजनीति की बिसात बिछाते रहे हैं। वे और उनका परिवार लंबे समय से पूर्वांचल की राजनीति में प्रभाव रखते हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में खुद उम्मीदवार के तौर पर उतरने की घोषणा पहली बार हुई है। इससे पहले उनका राजनीतिक सफर मुख्य रूप से विधान परिषद चुनावों और अपने समर्थकों को चुनाव लड़ाने तक सीमित रहा।

किस पार्टी से लड़ेंगे चुनाव?
बृजेश सिंह ने अभी यह नहीं बताया है कि वह किस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, उनके हालिया बयानों और राष्ट्रवाद तथा धर्म से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को देखते हुए राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के किसी दल से चुनाव लड़ सकते हैं। यह भी माना जा रहा है कि वह सीधे किसी बड़ी पार्टी के बजाय सहयोगी दल के टिकट पर मैदान में उतरने का विकल्प चुन सकते हैं।

परिवार का कई इलाकों में मजबूत प्रभाव
बृजेश सिंह के परिवार का पूर्वांचल की राजनीति में लंबा प्रभाव रहा है। उनके बड़े भाई चुलबुल सिंह और खुद बृजेश सिंह कई बार निर्दलीय एमएलसी रहे हैं। वर्तमान में उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह वाराणसी से विधान परिषद सदस्य हैं, जबकि उनके भतीजे सुशील सिंह चंदौली की सैयदराजा सीट से विधायक हैं। ऐसे में उनका चुनावी मैदान में उतरना सिर्फ एक सीट का मामला नहीं माना जा रहा।

पूर्वांचल की राजनीति में बदल सकते हैं समीकरण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बृजेश सिंह के सक्रिय होने से वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, भदोही, मऊ और जौनपुर के कई क्षेत्रों में नए समीकरण बन सकते हैं। खासकर सवर्ण मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनका चुनाव लड़ना कई दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

मुख्तार अंसारी के बाद खाली हुई राजनीतिक जमीन पर नजर
पूर्वांचल की राजनीति लंबे समय तक मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की प्रतिद्वंद्विता के इर्द-गिर्द घूमती रही है। मुख्तार अंसारी के निधन के बाद पूर्वांचल में जो नई राजनीतिक स्थिति बनी है, उसमें बृजेश सिंह की सक्रियता को एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह इस मौके को अपने पक्ष में भुनाने की तैयारी कर रहे हैं।

विपक्ष के लिए बढ़ सकती है चुनौती
पिछले कुछ चुनावों में समाजवादी पार्टी ने गैर-यादव पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच मजबूत आधार बनाया है। लेकिन बृजेश सिंह के सीधे मैदान में उतरने से कई सीटों पर मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। खासकर उन इलाकों में, जहां स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव और संगठनात्मक नेटवर्क मजबूत माना जाता है।

अब सबकी नजर एक सवाल पर
बृजेश सिंह ने चुनाव लड़ने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह किस सीट से और किस पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरेंगे। आने वाले दिनों में उनके अगले कदम पर पूरे पूर्वांचल की राजनीति की नजर टिकी रहेगी।

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पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा दांव! विधानसभा चुनाव लड़ेंगे बृजेश सिंह, किस सीट से उतरेंगे? बढ़ी सियासी हलचल

By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 11:37 AM

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से पूर्वांचल की सियासत के प्रभावशाली चेहरे रहे पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके इस बयान के बाद वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर समेत पूरे पूर्वांचल में नए राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।

वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर रविवार को बृजेश सिंह अचानक लोगों के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और जल्द ही यह भी बता देंगे कि किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने जनता से वादा करते हुए कहा कि लोगों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहेंगे और जनसेवा के लिए ही सक्रिय राजनीति में आए हैं।

पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे
अब तक बृजेश सिंह पर्दे के पीछे रहकर राजनीति की बिसात बिछाते रहे हैं। वे और उनका परिवार लंबे समय से पूर्वांचल की राजनीति में प्रभाव रखते हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में खुद उम्मीदवार के तौर पर उतरने की घोषणा पहली बार हुई है। इससे पहले उनका राजनीतिक सफर मुख्य रूप से विधान परिषद चुनावों और अपने समर्थकों को चुनाव लड़ाने तक सीमित रहा।

किस पार्टी से लड़ेंगे चुनाव?
बृजेश सिंह ने अभी यह नहीं बताया है कि वह किस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, उनके हालिया बयानों और राष्ट्रवाद तथा धर्म से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को देखते हुए राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के किसी दल से चुनाव लड़ सकते हैं। यह भी माना जा रहा है कि वह सीधे किसी बड़ी पार्टी के बजाय सहयोगी दल के टिकट पर मैदान में उतरने का विकल्प चुन सकते हैं।

परिवार का कई इलाकों में मजबूत प्रभाव
बृजेश सिंह के परिवार का पूर्वांचल की राजनीति में लंबा प्रभाव रहा है। उनके बड़े भाई चुलबुल सिंह और खुद बृजेश सिंह कई बार निर्दलीय एमएलसी रहे हैं। वर्तमान में उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह वाराणसी से विधान परिषद सदस्य हैं, जबकि उनके भतीजे सुशील सिंह चंदौली की सैयदराजा सीट से विधायक हैं। ऐसे में उनका चुनावी मैदान में उतरना सिर्फ एक सीट का मामला नहीं माना जा रहा।

पूर्वांचल की राजनीति में बदल सकते हैं समीकरण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बृजेश सिंह के सक्रिय होने से वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, भदोही, मऊ और जौनपुर के कई क्षेत्रों में नए समीकरण बन सकते हैं। खासकर सवर्ण मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनका चुनाव लड़ना कई दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

मुख्तार अंसारी के बाद खाली हुई राजनीतिक जमीन पर नजर
पूर्वांचल की राजनीति लंबे समय तक मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की प्रतिद्वंद्विता के इर्द-गिर्द घूमती रही है। मुख्तार अंसारी के निधन के बाद पूर्वांचल में जो नई राजनीतिक स्थिति बनी है, उसमें बृजेश सिंह की सक्रियता को एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह इस मौके को अपने पक्ष में भुनाने की तैयारी कर रहे हैं।

विपक्ष के लिए बढ़ सकती है चुनौती
पिछले कुछ चुनावों में समाजवादी पार्टी ने गैर-यादव पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच मजबूत आधार बनाया है। लेकिन बृजेश सिंह के सीधे मैदान में उतरने से कई सीटों पर मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। खासकर उन इलाकों में, जहां स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव और संगठनात्मक नेटवर्क मजबूत माना जाता है।

अब सबकी नजर एक सवाल पर
बृजेश सिंह ने चुनाव लड़ने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह किस सीट से और किस पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरेंगे। आने वाले दिनों में उनके अगले कदम पर पूरे पूर्वांचल की राजनीति की नजर टिकी रहेगी।

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