By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 12:33 PM
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया कि इस मामले के किसी भी आरोपी की पैरवी कोई वकील नहीं करेगा। इतना ही नहीं, तीन प्रमुख लोगों को तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने का अल्टीमेटम भी दे दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि ऐसा नहीं होने पर पूरे शहर को जाम कर दिया जाएगा।
सोमवार को अयोध्या बार एसोसिएशन की अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनका पक्ष अदालत में कोई अधिवक्ता नहीं रखेगा।
केस लड़ने पर पांच लाख रुपये जुर्माना
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा कि अगर कोई वकील संगठन के फैसले के खिलाफ जाकर आरोपियों की पैरवी करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस फैसले के बाद अयोध्या में राजनीतिक और सामाजिक हलचल और तेज हो गई है।
तीन लोगों को अयोध्या छोड़ने का अल्टीमेटम
बैठक के दौरान कई वकीलों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राय को तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ देनी चाहिए। वकीलों का कहना है कि अगर तय समय में ऐसा नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
शहर जाम करने की चेतावनी
बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर अयोध्या को पूरी तरह बंद और जाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों के शहर में प्रवेश को भी रोका जा सकता है। इस ऐलान के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों ने चढ़ावे के इस्तेमाल और उसके प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इस मामले में अभी तक संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
अयोध्या की सियासत में बढ़ी हलचल
राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा बड़ा विषय है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े विवाद और उसके बाद बार एसोसिएशन के इस सख्त रुख ने अयोध्या की राजनीति और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि वकीलों ने अपने फैसले से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं।
प्रशासन की बढ़ सकती है मुश्किल
अगर तीन दिन बाद आंदोलन और शहर जाम की चेतावनी पर अमल होता है, तो प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगले कुछ दिनों में आरोपित पक्ष और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।
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