By Malay Ojha | Published: 08 August 2026 at 02:55 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया। समारोह में मेडल पाने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने छात्राओं की कम संख्या पर खास तौर पर ध्यान खींचा। पीएम मोदी ने कहा कि मेडल पाने वालों में सिर्फ एक-दो लड़कियां क्यों हैं, उपलब्धि हासिल करने वाली छात्राओं की संख्या इससे कहीं ज्यादा होनी चाहिए थी। उनके इस बयान ने समारोह में मौजूद छात्रों के बीच खास चर्चा पैदा कर दी।
मेडल पाने वाली छात्राओं पर पीएम का सवाल
नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को उनकी मेहनत और उपलब्धियों के लिए सम्मान मिला है, वे सभी बधाई के पात्र हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुशी होती अगर सम्मान पाने वाले विद्यार्थियों में और ज्यादा लड़कियां शामिल होतीं। प्रधानमंत्री ने इस बात को केवल बधाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उच्च शिक्षा और पेशेवर क्षेत्र में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया।
सिर्फ एक-दो क्यों?’ पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि अगर मेडल पाने वालों में एक-दो छात्राएं हैं तो यह संख्या और बढ़नी चाहिए। उनका इशारा इस बात की ओर था कि देश के बड़े तकनीकी संस्थानों में पढ़ाई से लेकर उपलब्धियों तक छात्राओं की भागीदारी मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने पुरस्कार पाने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं, लेकिन साथ ही लड़कियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत को साफ शब्दों में सामने रखा।
छात्रों के मन में क्या चल रहा, मोदी ने बताया
दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री ने छात्रों के भविष्य को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस समय यहां मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी तस्वीर जरूर होगी। किसी को पहली नौकरी और पहली तनख्वाह का इंतजार होगा, तो कोई नए शहर में नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला कारोबार शुरू करने का सपना देख रहे होंगे, जबकि कुछ ने आगे की प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी शुरू करने का मन बना लिया होगा।
हर छात्र का रास्ता अलग, सपना भी अलग
PM मोदी ने कहा कि आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थियों के रास्ते एक जैसे नहीं होंगे। किसी का लक्ष्य नौकरी होगा, किसी का कारोबार और कोई शोध या आगे की पढ़ाई की ओर जाएगा। लेकिन इन अलग-अलग रास्तों के बावजूद सभी के सामने एक जैसी चुनौती होगी—बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार तैयार रखना। प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपनी जिज्ञासा और सीखने की आदत को कभी खत्म न होने दें।
बड़ी चुनौती आए तो घबराने की जरूरत नहीं
जेन जी के युवाओं को सलाह देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भी जिंदगी में कोई बड़ी चुनौती सामने आए तो उससे घबराने के बजाय उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर देखना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी बड़ी समस्या को एक साथ हल करने की कोशिश करने के बजाय उसे अलग-अलग हिस्सों में समझना ज्यादा आसान होता है। इससे चुनौती को संभालने का रास्ता भी साफ दिखाई देने लगता है।
चुनौती को अवसर में बदलने की बात
प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें सतर्क रहने के साथ-साथ नए समाधान खोजने का साहस भी रखना चाहिए। उनका कहना था कि जो लोग नई परिस्थितियों में नए रास्ते तलाशने का हौसला रखते हैं, वे मुश्किल हालात को भी अवसर में बदल सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आने वाले समय में तकनीक और काम करने के तरीके तेजी से बदलेंगे, इसलिए केवल आज की जानकारी के भरोसे आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा।
पहली नौकरी से लेकर अपना कारोबार तक
प्रधानमंत्री ने छात्रों के सामने उनके आने वाले जीवन की कई तस्वीरें रखीं। उन्होंने कहा कि किसी के लिए आज का दिन पढ़ाई पूरी होने की खुशी का है तो किसी के लिए यह नौकरी की शुरुआत का पड़ाव है। कई विद्यार्थी अपने परिवार के साथ सफलता साझा करेंगे, जबकि कुछ जल्द ही घर से दूर जाकर नए शहर में काम शुरू करेंगे। कुछ ऐसे भी होंगे जो नौकरी के बजाय अपना कारोबार खड़ा करने का रास्ता चुनेंगे।
बागेश्वर बाबा का जिक्र कर हंसा दिया
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का एक हल्का-फुल्का अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने वहां मौजूद छात्रों और दूसरे लोगों से कहा कि सभी के मन में इस समय कुछ न कुछ चल रहा होगा। इसके बाद मुस्कुराते हुए उन्होंने मजाक में कहा कि वह बाबा बागेश्वर तो हैं नहीं कि मन की बात जान लें, लेकिन कुछ तो जरूर चल रहा होगा। प्रधानमंत्री की इस बात पर समारोह में मौजूद लोग हंस पड़े और माहौल कुछ देर के लिए बेहद हल्का हो गया।
दीक्षांत के मंच से भविष्य की बात
आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह का यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के एक बड़े पड़ाव के खत्म होने और नई शुरुआत का मौका था। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इसी बदलाव को केंद्र में रखा। उन्होंने छात्रों को सिर्फ डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहने, बल्कि बदलती परिस्थितियों को समझने और उनके मुताबिक खुद को तैयार करने की बात कही। आईआईटी दिल्ली की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 57वां दीक्षांत समारोह 8 अगस्त 2026 को आयोजित किया गया।
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