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स्याही और धमकी से युवाओं की आवाज नहीं दबाई जा सकती: सोशलिस्ट पार्टी

By aryavartalive | Published: 08 August 2026 at 03:46 PM

पटना/नई दिल्ली: आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोहरा पर स्याही फेंके जाने की घटना को लेकर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे युवाओं और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि ऐसे किसी भी दबाव से संविधान, लोकतंत्र और न्याय के मुद्दों पर उठ रही आवाज को रोका नहीं जा सकता। पार्टी ने इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

‘स्याही किसी विचार को नहीं मिटा सकती’
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव संदीप पाण्डेय ने कहा कि स्याही फेंकने या धमकी देने से किसी विचारधारा को खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में छात्र और युवा संविधान, लोकतंत्र, समानता और नागरिक अधिकारों को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। उनके मुताबिक, कई युवाओं को विरोध-प्रदर्शन के दौरान एफआईआर और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार को युवाओं से संवाद करना चाहिए
संदीप पाण्डेय ने कहा कि असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और सरकार को विरोध की आवाज सुनने की कोशिश करनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि प्रदर्शन करने वाले युवाओं को लगातार दबाव, गिरफ्तारी और डर के माहौल का सामना करना पड़ेगा तो इससे आंदोलन खत्म होने के बजाय और व्यापक हो सकता है। उन्होंने सरकार से युवाओं के साथ संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।

‘दमन से बढ़ सकता है गुस्सा’
संदीप पाण्डेय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार असहमति को जगह देने के बजाय उसे दबाने की नीति पर आगे बढ़ती है तो इसके राजनीतिक और सामाजिक असर गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं में पहले से मौजूद नाराजगी को नजरअंदाज करना स्थिति को और कठिन बना सकता है।

राजनीतिक हिंसा और नफरत पर भी सवाल
पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सैयद तहसीन अहमद ने राजनीतिक हिंसा और नफरत के बढ़ते माहौल को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्याही फेंकने जैसी घटनाओं से लेकर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या और भीड़ हिंसा से जुड़े मामलों तक, देश को यह सोचना होगा कि सार्वजनिक जीवन में असहमति और विरोध के लिए कितनी जगह बची है।

‘सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार’
तहसीन अहमद ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और उनसे असहमति जताना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी सरकार को असहमति रखने वाले हर व्यक्ति को विरोधी या दुश्मन मानकर उसके खिलाफ ताकत का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए।

युवाओं के कानून हाथ में लेने पर पार्टी ने जताई चिंता
सोशलिस्ट पार्टी ने यह भी कहा कि लगातार यह महसूस होना कि न्याय नहीं मिल रहा और शांतिपूर्ण विरोध के रास्ते बंद हो रहे हैं, युवाओं में निराशा पैदा कर सकता है। पार्टी ने साफ किया कि किसी भी स्थिति में कानून अपने हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उसने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर उसके पीछे के कारणों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

‘देश को अराजकता की ओर नहीं ले जाना चाहिए’
संदीप पाण्डेय ने कहा कि देश को ऐसी स्थिति से बचाना जरूरी है, जहां असहमति राजनीतिक टकराव और हिंसा में बदल जाए। उन्होंने कहा कि यदि अराजकता और अस्थिरता की स्थिति पैदा होती है तो उसका नुकसान किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोकतंत्र और आने वाली पीढ़ियों पर भी इसका असर पड़ेगा।

शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने युवाओं और छात्रों से अपील की कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से संघर्ष जारी रखें। पार्टी ने लोगों से उकसावे में आकर कानून हाथ में नहीं लेने को कहा। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का रास्ता हिंसा नहीं, बल्कि संविधान, न्याय, अहिंसा और संवाद होना चाहिए।

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स्याही और धमकी से युवाओं की आवाज नहीं दबाई जा सकती: सोशलिस्ट पार्टी

By aryavartalive | Published: 08 August 2026 at 03:46 PM

पटना/नई दिल्ली: आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोहरा पर स्याही फेंके जाने की घटना को लेकर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे युवाओं और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि ऐसे किसी भी दबाव से संविधान, लोकतंत्र और न्याय के मुद्दों पर उठ रही आवाज को रोका नहीं जा सकता। पार्टी ने इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

‘स्याही किसी विचार को नहीं मिटा सकती’
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव संदीप पाण्डेय ने कहा कि स्याही फेंकने या धमकी देने से किसी विचारधारा को खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में छात्र और युवा संविधान, लोकतंत्र, समानता और नागरिक अधिकारों को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। उनके मुताबिक, कई युवाओं को विरोध-प्रदर्शन के दौरान एफआईआर और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार को युवाओं से संवाद करना चाहिए
संदीप पाण्डेय ने कहा कि असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और सरकार को विरोध की आवाज सुनने की कोशिश करनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि प्रदर्शन करने वाले युवाओं को लगातार दबाव, गिरफ्तारी और डर के माहौल का सामना करना पड़ेगा तो इससे आंदोलन खत्म होने के बजाय और व्यापक हो सकता है। उन्होंने सरकार से युवाओं के साथ संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।

‘दमन से बढ़ सकता है गुस्सा’
संदीप पाण्डेय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार असहमति को जगह देने के बजाय उसे दबाने की नीति पर आगे बढ़ती है तो इसके राजनीतिक और सामाजिक असर गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं में पहले से मौजूद नाराजगी को नजरअंदाज करना स्थिति को और कठिन बना सकता है।

राजनीतिक हिंसा और नफरत पर भी सवाल
पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सैयद तहसीन अहमद ने राजनीतिक हिंसा और नफरत के बढ़ते माहौल को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्याही फेंकने जैसी घटनाओं से लेकर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या और भीड़ हिंसा से जुड़े मामलों तक, देश को यह सोचना होगा कि सार्वजनिक जीवन में असहमति और विरोध के लिए कितनी जगह बची है।

‘सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार’
तहसीन अहमद ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और उनसे असहमति जताना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी सरकार को असहमति रखने वाले हर व्यक्ति को विरोधी या दुश्मन मानकर उसके खिलाफ ताकत का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए।

युवाओं के कानून हाथ में लेने पर पार्टी ने जताई चिंता
सोशलिस्ट पार्टी ने यह भी कहा कि लगातार यह महसूस होना कि न्याय नहीं मिल रहा और शांतिपूर्ण विरोध के रास्ते बंद हो रहे हैं, युवाओं में निराशा पैदा कर सकता है। पार्टी ने साफ किया कि किसी भी स्थिति में कानून अपने हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उसने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर उसके पीछे के कारणों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

‘देश को अराजकता की ओर नहीं ले जाना चाहिए’
संदीप पाण्डेय ने कहा कि देश को ऐसी स्थिति से बचाना जरूरी है, जहां असहमति राजनीतिक टकराव और हिंसा में बदल जाए। उन्होंने कहा कि यदि अराजकता और अस्थिरता की स्थिति पैदा होती है तो उसका नुकसान किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोकतंत्र और आने वाली पीढ़ियों पर भी इसका असर पड़ेगा।

शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने युवाओं और छात्रों से अपील की कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से संघर्ष जारी रखें। पार्टी ने लोगों से उकसावे में आकर कानून हाथ में नहीं लेने को कहा। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का रास्ता हिंसा नहीं, बल्कि संविधान, न्याय, अहिंसा और संवाद होना चाहिए।

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