By Malay Ojha | Published: 13 August 2026 at 01:44 PM
पंजाब में सरकारी नौकरियों की भर्ती को लेकर भगवंत मान सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 85 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक दिया है। अदालत के इस कदम के बाद 41 ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक और 44 क्लस्टर समन्वयक पदों की भर्ती की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब एक दूसरी भर्ती को लेकर भी अदालत में मामला चल रहा है।
ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत निकाली गई इस भर्ती में कुल 85 पद शामिल थे। इनमें 41 पद ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक और 44 पद क्लस्टर समन्वयक के थे। भर्ती का विज्ञापन जनवरी 2026 में जारी किया गया था और लिखित परीक्षा के बाद फरवरी में परिणाम भी सामने आया था। आधिकारिक भर्ती सूचना में इन दोनों पदों की संख्या और चयन प्रक्रिया का विवरण दर्ज है।
अंक देने के तरीके पर उठा सवाल
मामला केवल भर्ती रुकने तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया में अंक दिए जाने के तरीके पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि उम्मीदवारों का कुल परिणाम तो बताया गया, लेकिन लिखित परीक्षा के अलावा बाकी अंकों का पूरा ब्योरा साफ तौर पर सामने नहीं रखा गया। इसी बिंदु ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर विवाद खड़ा किया।
100 अंकों में कैसे हुआ चयन?
इस भर्ती में कुल 100 अंक रखे गए थे। इनमें 70 अंक लिखित परीक्षा के लिए और बाकी 30 अंक साक्षात्कार, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के आधार पर निर्धारित किए गए थे। याचिकाकर्ताओं की आपत्ति मुख्य रूप से इसी 30 अंकों के इस्तेमाल और उनके बंटवारे को लेकर है। उनका तर्क है कि जब उम्मीदवारों को यह साफ नहीं बताया गया कि अलग-अलग आधार पर कितने अंक मिले, तो अंतिम चयन को समझना मुश्किल हो जाता है।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड मंगाए
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती से जुड़े मूल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने और पूरी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए थे। जुलाई में अदालत ने प्रथमदृष्टया यह माना था कि चयन के लिए तय मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। इसके बाद भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के लिए समिति की व्यवस्था की गई।
जांच में अंक आवंटन पर भी नजर
रिकॉर्ड की जांच का सबसे अहम हिस्सा उम्मीदवारों को दिए गए अंकों से जुड़ा है। अदालत की निगरानी में हुई पड़ताल में अंक आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल सामने आए। यही वजह है कि अब अदालत ने आगे की भर्ती प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। हालांकि, अंतिम फैसला आने से पहले इसे भर्ती में पूरी गड़बड़ी साबित हो जाना कहना सही नहीं होगा। मामले पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी है।
फरवरी में आया था लिखित परीक्षा का परिणाम
इस भर्ती की लिखित परीक्षा 22 फरवरी 2026 को हुई थी। आधिकारिक परिणाम में लिखित परीक्षा के अंक 70 में से दर्ज किए गए थे। इसके बाद उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए बुलाने की प्रक्रिया शुरू हुई। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक और क्लस्टर समन्वयक पदों के लिए फरवरी में आगे की प्रक्रिया का कार्यक्रम भी दर्ज है।
उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ी
भर्ती प्रक्रिया पर रोक का सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ेगा, जो महीनों से चयन और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक भर्ती प्रक्रिया का अदालत में अटक जाना केवल कानूनी विवाद नहीं होता, बल्कि उनकी उम्र, तैयारी और रोजगार की योजना से भी जुड़ा होता है। ऐसे में अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग यही रहती है कि चयन प्रक्रिया में शुरू से अंत तक साफ व्यवस्था हो।
दूसरी भर्ती भी अदालत की निगरानी में
पंजाब में भर्ती को लेकर यह अकेला मामला नहीं है। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग में 454 फार्मेसी अधिकारी पदों की भर्ती भी अदालत की निगरानी में पहुंच चुकी है। इस मामले में परीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल कराने के आरोप सामने आए थे। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की मांग की थी। अदालत ने आगे की चयन प्रक्रिया को मामले के नतीजे के अधीन कर दिया था।
फार्मेसी अधिकारी भर्ती में क्या हुआ था?
19 जुलाई 2026 को 454 फार्मेसी अधिकारी पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि परीक्षा के दौरान छिपे हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए प्रश्नपत्र की तस्वीर बाहर भेजी गई और वहां से उत्तर वापस उम्मीदवारों तक पहुंचाए गए। पुलिस कार्रवाई में कई लोगों को पकड़े जाने और उपकरण बरामद होने का भी उल्लेख याचिका में किया गया। हालांकि, इस मामले में भी अंतिम न्यायिक फैसला अभी नहीं आया है।
लगातार विवाद से सरकार पर सवाल
एक भर्ती में अंक आवंटन को लेकर सवाल और दूसरी में परीक्षा के दौरान नकल के आरोपों के बाद पंजाब की सरकारी भर्ती व्यवस्था पर राजनीतिक बहस तेज होना स्वाभाविक है। उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परीक्षा और चयन की प्रक्रिया ऐसी हो, जिसमें किसी भी स्तर पर पक्षपात या गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती
भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का असर केवल मौजूदा 85 पदों तक सीमित नहीं रह सकता। यदि अदालत की जांच में चयन प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर गंभीर खामियां सामने आती हैं, तो आगे की कार्रवाई पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल अदालत ने रिकॉर्ड की जांच और प्रक्रिया की निगरानी के जरिए स्थिति साफ करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
2 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को प्रस्तावित है। उस दिन अदालत के सामने भर्ती रिकॉर्ड और जांच से जुड़े पहलुओं पर आगे की स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल 85 पदों की भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक के कारण उम्मीदवारों को अदालत के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।
भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता बनी सबसे बड़ा मुद्दा
पंजाब में लगातार सामने आ रहे भर्ती विवादों ने एक बुनियादी सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा देने वाले युवाओं को क्या उनके प्रदर्शन और चयन के हर चरण की पूरी जानकारी मिल रही है? लिखित परीक्षा के अंक, साक्षात्कार, योग्यता और अनुभव के आधार पर दिए गए अंक यदि स्पष्ट रूप से सामने हों, तो विवाद की गुंजाइश काफी कम हो सकती है। अब निगाह हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है, जहां यह मामला आगे किस दिशा में जाता है, इसका पता चलेगा।
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