By Malay Ojha | Published: 13 August 2026 at 03:19 PM
बिहार में विकास और सुशासन के दावों के बीच नवादा जिले की बदहाल सड़कें, पलायन, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं और दूरसंचार व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। SSN चैनल को दिए इंटरव्यू में भाजपा के जिला प्रवक्ता के. प्रभाकर ने नवादा में विकास की स्थिति पर अपनी ही सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने कई सवाल रखे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा डस्टबिन की कथित रूप से ऊंची कीमत पर खरीद के मामले में जांच की मांग भी की।
इंटरव्यू के दौरान नवादा के विकास को लेकर पूछे गए सवाल पर के. प्रभाकर ने कहा कि मौजूदा सांसद विवेक ठाकुर ने पिछड़े नवादा को विकसित नवादा की ओर ले जाने को लक्ष्य बनाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जिले में विकास और समृद्धि बढ़ेगी। हालांकि, बातचीत के दौरान उन्होंने जिले में मौजूद कई बुनियादी समस्याओं को भी स्वीकार किया।
पलायन और रोजगार पर चिंता
के. प्रभाकर ने नवादा में पलायन को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि दक्षिण बिहार में पलायन के मामले में नवादा की स्थिति गंभीर है। उन्होंने एक समाचार पत्र की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि दक्षिण बिहार के जिलों में नवादा से सबसे ज्यादा पलायन हो रहा है।
उन्होंने नवादा के कौआकोल क्षेत्र में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग लगाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि क्षेत्र में बांस और अन्य कच्चे माल की उपलब्धता को देखते हुए कागज या दूसरे छोटे उद्योग लगाए जा सकते हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है और गरीबी कम करने में मदद मिलेगी।
जाम और आरओबी का मुद्दा
नवादा में जाम की समस्या को भी इंटरव्यू में प्रमुखता से उठाया गया। कहा गया कि अस्पताल वाले इलाकों में जाम के कारण एंबुलेंस तक फंस जाती हैं। लंबे समय से आरओबी निर्माण की मांग के बावजूद काम पूरा नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए।
के. प्रभाकर ने आरओबी से जुड़ी योजना को लेकर कहा कि इसकी योजना पहले की सरकार के समय बनी थी, लेकिन उनके अनुसार जमीन पर काम आगे बढ़ाने का श्रेय वर्तमान सरकार को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी योजना का स्वीकृत होना और उसे जमीन पर उतारना दो अलग-अलग बातें हैं।
नवादा शहर की सड़कों और अस्पताल की स्थिति पर सवाल
इंटरव्यू में नवादा शहर की खराब सड़कों और मोहल्लों की समस्याओं का भी उल्लेख किया गया। खास तौर पर व्यवहार न्यायालय के पीछे के इलाकों, पोस्टमार्टम रोड और न्यू एरिया की सड़कों की स्थिति पर सवाल उठाए गए।
नवादा सदर अस्पताल की साफ-सफाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। बातचीत में अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास कचरा जमा होने और अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों के घूमने का दावा किया गया। इसे गरीब मरीजों के लिए गंभीर समस्या बताया गया।
के. प्रभाकर ने कहा कि सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निकाय और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जनता को भी अपने प्रतिनिधियों से काम का हिसाब मांगना चाहिए।
गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या
नवादा के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी बातचीत का हिस्सा रही। के. प्रभाकर ने खुद अपने क्षेत्र में नेटवर्क की परेशानी का जिक्र करते हुए बताया कि कई गांवों में किसी भी प्रमुख मोबाइल कंपनी की सेवा ठीक से नहीं मिलती।
उन्होंने छनौन पंचायत के धनमा और वजीरगंज विधानसभा क्षेत्र के चंडीपुर इलाके में मोबाइल टावर की समस्या का उल्लेख किया। उन्होंने सांसद विवेक ठाकुर और दूरसंचार विभाग से इन इलाकों का सर्वे कराकर नेटवर्क की समस्या दूर करने की मांग की।
डस्टबिन खरीद को लेकर जांच की मांग
इंटरव्यू का सबसे अहम हिस्सा बिहार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा डस्टबिन खरीद से जुड़ा रहा। बातचीत में दावा किया गया कि करीब 45 लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक डस्टबिन, जिनकी बाजार कीमत लगभग 1,200 से 1,500 रुपये बताई गई, स्वास्थ्य विभाग ने करीब 15,450 रुपये प्रति डस्टबिन की दर से खरीदे हैं। यह भी दावा किया गया कि ऐसे 200 से अधिक, जबकि कुछ जगहों पर 300 से अधिक डस्टबिन लगाए जाने हैं।
इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए के. प्रभाकर ने कहा कि उनके पास इसकी पूरी जानकारी नहीं है और वह इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि यदि आरोप सही है तो यह भ्रष्टाचार का मामला हो सकता है और इसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी पैसा जनता का है और यदि खरीद में अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अतिक्रमण और सरकारी जमीन पर निर्माण का मुद्दा
बातचीत के अंतिम हिस्से में नवादा में आरओबी और अतिक्रमण का मुद्दा भी उठा। के. प्रभाकर ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीन पर लंबे समय से बने मकानों और कारोबार की वजह से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग जनप्रतिनिधियों के विकास कार्यों में बाधा डालेंगे तो सरकार को कार्रवाई करनी होगी।
वहीं, बातचीत में यह भी सवाल उठाया गया कि सड़क निर्माण के नाम पर कई जगह लोगों के मकानों पर बुलडोजर चल रहा है। सवाल यह है कि आखिर विकास कार्यों में बाधा कौन बन रहा है और क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समान रूप से हो रही है।
विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाएं बनी चुनौती
पूरी बातचीत में नवादा के विकास को लेकर एक तस्वीर सामने आई—एक तरफ सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर से विकास के प्रयासों के दावे हैं, तो दूसरी तरफ पलायन, रोजगार, खराब सड़क, जाम, अस्पताल की सफाई, मोबाइल नेटवर्क और उद्योगों की कमी जैसी बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं।
खास तौर पर डस्टबिन खरीद के कथित मूल्य अंतर ने सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा किया है। हालांकि, इंटरव्यू में मौजूद भाजपा नेता ने भी स्पष्ट किया कि इस मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही सामने आ सकती है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग या सरकार इस कथित खरीद मामले की जांच कराती है या नहीं।
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