By Malay Ojha | Published: 12 June 2026 at 04:20 PM
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। चुनाव में हार के बाद जहां पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है, वहीं अब उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज शिकायत में उन पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक एक कारोबारी ने ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता था। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
पहले भी दर्ज हो चुकी है शिकायत
यह पहली बार नहीं है जब इस मामले को लेकर ममता बनर्जी कानूनी विवाद में फंसी हों। इससे पहले भी उनके खिलाफ सिलीगुड़ी के साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दो जून को कोलकाता के रानी रासमनी रोड पर आयोजित एक सभा में बांग्लादेश में हुई एक हत्या की घटना का जिक्र करते हुए विवादित टिप्पणी की थी।
चुनावी बयान बना विवाद की वजह
बताया जा रहा है कि इसी साल चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। एक चुनावी सभा में ममता बनर्जी ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी मौजूदगी के कारण लोग सुरक्षित हैं। उनके इस बयान को विपक्षी दलों ने आक्रामक और विवादित बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी।
सोशल मीडिया पर मचा था बवाल
ममता बनर्जी का बयान सामने आने के बाद उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था। इसके बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाते हुए कहा था कि किसी बड़े संवैधानिक पद पर रह चुके नेता को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कई राजनीतिक नेताओं ने इसे समाज में तनाव बढ़ाने वाला बयान बताया था।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। जांच के दौरान पुलिस शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर सकती है। यह भी चर्चा है कि जरूरत पड़ने पर ममता बनर्जी को नोटिस या समन भेजा जा सकता है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पार्टी के भीतर भी बढ़ रही चुनौती
कानूनी विवादों के बीच तृणमूल कांग्रेस के अंदर भी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। चुनावी हार के बाद कुछ विधायक और सांसद नेतृत्व के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने लगे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ विधायकों ने अलग गुट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ सांसद भी संगठन के भीतर अलग रणनीति तैयार कर रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी भी जांच के घेरे में
राजनीतिक और कानूनी दबाव केवल ममता बनर्जी तक सीमित नहीं है। उनके करीबी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी भी इन दिनों जांच एजेंसियों के सवालों का सामना कर रहे हैं। विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े मामले में जांच चल रही है और इसी सिलसिले में उनसे कई घंटों तक पूछताछ की जा चुकी है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई गई हैं।
धारा 196 (1) – दो समुदायों के बीच दुश्मनी या वैमनस्य फैलाने से संबंधित प्रावधान। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
धमकी और उकसावे का आरोप
धारा 351 (2) के तहत धमकी देने या भड़काने से जुड़े आरोप शामिल किए गए हैं। इस धारा में दोष सिद्ध होने पर दो साल तक की सजा का प्रावधान है।
शांति भंग करने का मामला
धारा 352 के तहत शांति भंग करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। इस धारा में भी दो साल तक की सजा हो सकती है।
आगे क्या होगा?
राजनीतिक संकट, पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और लगातार दर्ज हो रहे मामलों के बीच ममता बनर्जी के सामने चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और इस मामले का राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

