By Malay Ojha | Published: 13 June 2026 at 10:02 AM
पश्चिम बंगाल की सियासत में शनिवार को उस वक्त हलचल मच गई जब पश्चिम मेदिनीपुर जिले की सालबोनी थाना पुलिस टीम कोलकाता के कालीघाट स्थित तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। इस टीम में महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल थीं। यह कार्रवाई कथित जमीन कब्जा और उगाही से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में की गई बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक यह पूरा मामला अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित राय से जुड़ा है, जिन्हें इस केस में संदिग्ध माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि सुमित राय के मोबाइल की लोकेशन कालीघाट इलाके में मिली थी, जिसके बाद टीम सीधे आवास पर पहुंची।
हालांकि घर के अंदर से पुलिस को बताया गया कि सुमित राय वहां मौजूद नहीं हैं। इसके बावजूद पुलिस ने तलाशी और पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
घर में प्रवेश को लेकर बड़ा दावा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जानकारी के अनुसार, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़े कुछ कर्मियों ने आवास के भीतर प्रवेश के लिए ताला खोलने की प्रक्रिया भी अपनाई। इस दौरान यह भी चर्चा रही कि घर के भीतर उस समय खुद अभिषेक बनर्जी मौजूद थे और उनके साथ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी मौजूद हो सकती हैं।
बाहर उनकी आधिकारिक गाड़ी देखे जाने की भी बात सामने आई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पहले भी नोटिस और पूछताछ, लगातार बढ़ रही जांच
इससे एक दिन पहले ही शुक्रवार को राज्य की जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी के आवास पर नोटिस देने की कोशिश की थी। यह नोटिस कथित तौर पर “चार तारीख को डीजे बजेगा” वाले बयान से जुड़े मामले में दिया जाना था।
उस समय अभिषेक घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन बाद में लौटने पर नोटिस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि उन्हें आगामी 16 तारीख को सुबह 11 बजे जांच एजेंसी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है।
छह घंटे की पूछताछ, फर्जी हस्ताक्षर मामला भी जांच में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी सामने आया है कि अभिषेक बनर्जी से पहले भी फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े एक मामले में लगभग छह घंटे तक पूछताछ की जा चुकी है। यह मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े दस्तावेजों पर कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा बताया जा रहा है।
आरोप है कि कुछ विधायकों की गैरमौजूदगी में उनके नाम से हस्ताक्षर किए गए, जिससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
भर्ती घोटाले में भी कार्रवाई, विधायक मदन मित्रा पर ईडी की रेड
इसी बीच एक अलग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता और आसपास के कई इलाकों में छापेमारी की। यह कार्रवाई नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़े स्थान भी शामिल थे।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस घोटाले में अयोग्य उम्मीदवारों की भर्ती के बदले नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली गई थी। जांच में लगभग 125 से अधिक अवैध नियुक्तियों से संबंध होने की बात भी सामने आई है।

