By Malay Ojha | Published: 14 June 2026 at 03:04 PM
देश की बेटियों के लिए 13 जून 2026 एक खास तारीख बन गई, जब हरियाणा की इशिता सांगवान भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में शामिल हो गईं। खास बात यह है कि उन्होंने उस ऐतिहासिक फैसले से प्रेरणा ली थी, जिसके बाद महिलाओं के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का रास्ता खुला था। महज कुछ साल पहले 12वीं की छात्रा रहीं इशिता आज लड़ाकू विमान उड़ाने वाली अधिकारी बन चुकी हैं।
साल 2021 में महिलाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिली थी। उसी दौरान इशिता सांगवान स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं। परिवार के मुताबिक, जब उनके पिता ने उन्हें इस फैसले की जानकारी दी तो उन्होंने उसी समय देश सेवा का लक्ष्य तय कर लिया। इसके बाद उन्होंने बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ रक्षा सेवाओं में जाने के लिए भी लगातार मेहनत शुरू कर दी।
पहली कोशिश में पार किए कठिन पड़ाव
फाइटर पायलट बनने का रास्ता आसान नहीं माना जाता। लिखित परीक्षा से लेकर साक्षात्कार, मेडिकल जांच और पायलट चयन से जुड़े कठिन परीक्षणों तक कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इशिता ने इन सभी चुनौतियों को पहली ही कोशिश में पार कर लिया। परिवार का कहना है कि उनकी मेहनत और अनुशासन ने इस सफलता की मजबूत नींव रखी।
पढ़ाई में टॉपर, खेल में भी अव्वल
इशिता सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं बल्कि खेलों में भी आगे रही हैं। वह राज्य स्तर की बास्केटबॉल खिलाड़ी रह चुकी हैं। खेलों ने उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ मानसिक दृढ़ता भी दी। यही वजह रही कि सैन्य प्रशिक्षण के दौरान आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना करने में उन्हें काफी मदद मिली।
बचपन की आदतों ने बढ़ाया आत्मविश्वास
परिवार के लोगों के अनुसार इशिता बचपन से ही चुनौतियों को स्वीकार करने वाली लड़की रही हैं। पेड़ों पर चढ़ना, नए काम सीखना और जोखिम भरे कामों से घबराने के बजाय उन्हें आजमाना उनकी आदतों में शामिल था। यही स्वभाव आगे चलकर सैन्य जीवन के लिए उनके काम आया।
शिक्षा से जुड़ा है पूरा परिवार
इशिता का परिवार मूल रूप से हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव का रहने वाला है। उनके पिता चरण सिंह सांगवान एक स्कूल के प्रधानाचार्य हैं, जबकि मां अनीता सांगवान हिंदी शिक्षिका हैं। परिवार के शिक्षा से जुड़े होने का असर इशिता की पढ़ाई पर भी साफ दिखाई दिया। उनकी स्कूली शिक्षा राजस्थान के विभिन्न जिलों में हुई।
जुड़वां बहन ने बताया प्रेरणास्रोत
इशिता की जुड़वां बहन आस्था सांगवान इस समय चिकित्सा की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार के अनुसार दोनों बहनों में केवल दो मिनट का अंतर है, लेकिन आस्था हमेशा इशिता को अपना प्रेरणास्रोत मानती रही हैं। उनका कहना है कि इशिता शुरू से ही कुछ अलग और बड़ा करने का सपना देखती थीं।
दादी से किया वादा हुआ पूरा
इस सफलता के पीछे एक भावुक कहानी भी जुड़ी हुई है। बचपन में इशिता अपनी दादी के बेहद करीब थीं। वह अक्सर उनसे कहती थीं कि एक दिन सेना में बड़ी अधिकारी बनेंगी। कई साल पहले दादी का निधन हो गया, लेकिन परिवार का मानना है कि उनका आशीर्वाद हमेशा इशिता के साथ रहा। आज जब इशिता फाइटर पायलट बन गई हैं तो परिवार इसे उस अधूरे वादे के पूरा होने के रूप में देख रहा है।
तीन साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद मिली सफलता
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में कई वर्षों की कड़ी सैन्य ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इशिता ने वायुसेना की विशेष उड़ान ट्रेनिंग भी सफलतापूर्वक पूरी की। इसके बाद उन्हें फाइटर स्ट्रीम के लिए चुना गया। 13 जून 2026 को वह आधिकारिक रूप से भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन गईं।
लाखों बेटियों के लिए बनी नई प्रेरणा
इशिता सांगवान की कहानी सिर्फ एक युवती की सफलता नहीं है, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर भी है। जिस रास्ते पर कभी केवल पुरुष अधिकारियों का दबदबा माना जाता था, वहां अब बेटियां भी अपने सपनों को हकीकत में बदल रही हैं। उनकी उपलब्धि आने वाले समय में लाखों लड़कियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देगी।

