By Malay Ojha | Published: 30 July 2026 at 09:06 PM
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक टिप्पणी अब सियासी विवाद से आगे बढ़कर संसदीय कार्रवाई के घेरे में पहुंचती दिख रही है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने 29 जुलाई को सदन में राहुल गांधी की ओर से ‘स्टूडेंट’, ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ शब्दों के इस्तेमाल को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने की बात कही है। ठाकुर ने इस भाषा को संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताते हुए आपत्तिजनक और मानहानिकारक करार दिया है।
इस पूरे विवाद के बीच एक अहम घटनाक्रम यह भी है कि राहुल गांधी की ओर से सदन में इस्तेमाल किए गए ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों को संसद की कार्यवाही से हटा दिया गया है। यानी जिन शब्दों को लेकर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई थी, वे अब आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, मामला यहीं खत्म होता नहीं दिख रहा है, क्योंकि अनुराग ठाकुर ने इसे विशेषाधिकार के उल्लंघन से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है।
जंतर-मंतर की बातचीत का दिया था हवाला
राहुल गांधी ने सदन में यह टिप्पणी किसी सांसद या व्यक्ति का नाम लेकर नहीं की थी। उन्होंने जंतर-मंतर पर एक महिला छात्र से हुई बातचीत का हवाला देते हुए अपनी बात रखी थी। राहुल गांधी ने छात्रों के बीच बातचीत के आधार पर लोगों की तीन अलग-अलग श्रेणियों का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, एक वर्ग ऐसा है जो सवाल करता है, खुलकर सोचता है और सच्चाई को समझने की कोशिश करता है।
राहुल ने तीन तरह के लोगों का किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए कहा था कि एक ‘स्टूडेंट’ वह है जो खुले दिमाग से सोचता है और सच्चाई को जानने की कोशिश करता है। इसके बाद उन्होंने ‘इडियट’ शब्द का इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए किया, जो खुद को ही सबसे सही मानता है और किसी दूसरे की बात सुनने को तैयार नहीं होता। तीसरी श्रेणी के तौर पर उन्होंने ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसा व्यक्ति उस व्यक्ति को भी सही मानता है, जिसे वह खुद अंधे तौर पर सही मानता है।
सत्ता पक्ष ने सदन में जताई थी आपत्ति
राहुल गांधी की इस टिप्पणी के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाया था। सत्ता पक्ष का तर्क था कि सदन के भीतर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल संसदीय परंपराओं और मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इसके बाद बयान को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तकरार देखने को मिली।
राहुल गांधी ने दी थी अपनी सफाई
विवाद बढ़ने पर राहुल गांधी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने सदन में किसी सांसद या किसी खास व्यक्ति का नाम लेकर यह टिप्पणी नहीं की है। उनका कहना था कि वह जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई बातचीत का संदर्भ दे रहे थे और उसी बातचीत में इस्तेमाल किए गए शब्दों को सदन के सामने रख रहे थे।
अनुराग ठाकुर ने नियमों का दिया हवाला
अनुराग ठाकुर की ओर से दिए गए नोटिस में कथित तौर पर लोकसभा के नियम 352 के कुछ प्रावधानों का हवाला दिया गया है। इनमें नियम 352 के उपनियम (ii), (iii) और (vii) शामिल हैं। ठाकुर का आरोप है कि राहुल गांधी की टिप्पणी सदन की गरिमा और संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने इसे अपमानजनक और मानहानिकारक भाषा बताते हुए विशेषाधिकार हनन का मामला उठाया है।
क्या होता है विशेषाधिकार हनन?
विशेषाधिकार हनन को आसान भाषा में समझें तो संसद के सदस्यों और सदन को मिले विशेष अधिकारों में किसी तरह की बाधा या उल्लंघन को इससे जोड़ा जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद और उसके सदस्यों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं। इसी तरह राज्य विधानमंडलों के लिए अनुच्छेद 194 में विशेषाधिकारों का प्रावधान किया गया है। इन अधिकारों का मकसद सांसदों और विधायकों को बिना किसी बाहरी दबाव के सदन में अपने कर्तव्यों का पालन करने की सुविधा देना है।
कब माना जाता है विशेषाधिकार का उल्लंघन?
किसी सांसद को उसके संसदीय कामकाज से रोकना, सदन की कार्यवाही में बाधा डालना या सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि को विशेषाधिकार के उल्लंघन के दायरे में देखा जा सकता है। इसके अलावा सदन, उसकी समितियों या सदस्यों के खिलाफ गंभीर और निराधार आरोप लगाना, सदन के आदेशों की अनदेखी करना या संसद की कार्यवाही को गलत तरीके से पेश करना भी विशेषाधिकार के सवाल से जुड़ सकता है।
नोटिस के बाद क्या होता है?
विशेषाधिकार हनन का मामला उठाने के लिए संबंधित सांसद लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष नोटिस देता है। राज्यसभा के मामले में नोटिस सभापति को दिया जाता है। इसके बाद यह तय किया जाता है कि मामला विशेषाधिकार के दायरे में आता है या नहीं। यदि अध्यक्ष या सभापति मामले को आगे बढ़ाने योग्य मानते हैं तो इसे विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है।
जांच के बाद तय होती है आगे की कार्रवाई
विशेषाधिकार समिति मामले की जांच कर संबंधित पक्षों से जवाब मांग सकती है। जांच के दौरान यह देखा जाता है कि वास्तव में सदन या उसके किसी सदस्य के विशेषाधिकार का उल्लंघन हुआ है या नहीं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सदन आगे की कार्रवाई पर फैसला कर सकता है। मामले की गंभीरता के आधार पर चेतावनी या अन्य संसदीय कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
अब आगे क्या होगा, सबकी नजर इस पर
फिलहाल राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद के साथ-साथ संसदीय प्रक्रिया का पहलू भी सामने आ गया है। एक तरफ राहुल गांधी का कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लेकर टिप्पणी नहीं की थी और वह छात्रों से हुई बातचीत का संदर्भ दे रहे थे। दूसरी तरफ अनुराग ठाकुर ने इसे सदन की मर्यादा से जोड़ते हुए विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि लोकसभा अध्यक्ष इस नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या मामला विशेषाधिकार समिति तक पहुंचता है। इस पूरे विवाद में सबसे अहम तथ्य यह भी है कि विवादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया है, लेकिन उन्हें लेकर राजनीतिक और संसदीय विवाद अभी थमा नहीं है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

