By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 at 03:18 PM
पटना में बढ़ती गर्मी और उमस के बीच जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जिला पदाधिकारी ने आदेश जारी कर कक्षा 5 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों, प्री-स्कूल तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में शैक्षणिक गतिविधियों पर 20 जून तक रोक लगा दी है। वहीं कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई भी निर्धारित समय सीमा के भीतर ही कराई जाएगी।
राजधानी में लगातार बढ़ रहे तापमान और उमस को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है। जारी आदेश के अनुसार जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में कक्षा 5 तक की कक्षाएं 20 जून तक संचालित नहीं होंगी। यह आदेश बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।
कक्षा 6 से 8 के लिए भी समय सीमा तय
प्रशासन ने केवल छोटे बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि ऊपरी कक्षाओं के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक कक्षा 6 से 8 तक की शैक्षणिक गतिविधियां सुबह 10:30 बजे के बाद नहीं चलेंगी। विद्यालयों को अपनी समय-सारिणी में बदलाव कर छात्रों को गर्मी के प्रभाव से बचाने के निर्देश दिए गए हैं।
20 जून तक प्रभावी रहेगा आदेश
जिला प्रशासन की ओर से जारी निर्देश 15 जून से 20 जून 2026 तक प्रभावी रहेंगे। सभी विद्यालय प्रबंधन को आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि तक किसी भी स्थिति में निर्देशों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
कानून के तहत जारी किया गया आदेश
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है। प्रशासन का मानना है कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए बच्चों को स्कूल भेजना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। इसी कारण एहतियाती कदम के तौर पर यह निर्णय लिया गया है।
गर्मी की छुट्टियों के बाद खुल रहे हैं स्कूल
राज्य के कई विद्यालयों में हाल ही में गर्मी की छुट्टियां समाप्त हुई हैं। कुछ स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में विद्यालय अगले सप्ताह से खुलने वाले हैं। ऐसे समय में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी थी।
उमस और तेज धूप ने बढ़ाई परेशानी
पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और भारी उमस का असर देखने को मिल रहा है। दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो जाती है और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।
अस्पतालों में भी बढ़ रहे मरीज
गर्मी का असर केवल आम जनजीवन तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य संस्थानों में भी गर्मी और निर्जलीकरण से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टर लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दे रहे हैं।
मानसून से पहले बढ़ी बेचैनी
हालांकि मानसून के आगमन की संभावना जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल लोगों को राहत मिलती नहीं दिख रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान में बहुत अधिक गिरावट की उम्मीद नहीं है। ऐसे में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर गर्मी का असर अधिक पड़ता है। इसलिए प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को तेज धूप में बाहर भेजने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी तथा तरल पदार्थ देते रहें।
अभिभावकों को मिली राहत
जिला प्रशासन के इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। उनका मानना है कि मौजूदा मौसम को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। अब सभी विद्यालयों को संशोधित समय-सारिणी के अनुसार शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करनी होंगी।

