By Malay Ojha | Published: 17 June 2026 at 10:31 AM
झारखंड के गिरिडीह जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों को हैरान भी कर दिया है और भावुक भी। प्रेम विवाह से नाराज एक पिता ने अपनी जीवित बेटी का प्रतीकात्मक श्राद्ध और पिंडदान कर दिया। यह अनोखी घटना सरिया स्थित प्रसिद्ध राजदह धाम में हुई, जहां पिता ने परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में धार्मिक रीति-रिवाज निभाए। घटना की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है और सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक मामला कोडरमा जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाली एक युवती ने परिवार की जानकारी के बिना अपने प्रेमी के साथ घर छोड़ दिया और बाद में उससे विवाह कर लिया। कुछ दिनों बाद दोनों का एक वीडियो सामने आया, जिसके जरिए परिवार को शादी की जानकारी मिली।
युवती के घरवालों का कहना है कि उसकी शादी पहले से तय थी और 20 जून को विवाह होना था। परिवार कई महीनों से तैयारियों में जुटा था। रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजे जा चुके थे और शादी से जुड़ी अधिकांश व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी थीं।
तय शादी से पहले घर छोड़ने पर टूटा परिवार
परिजनों के अनुसार 12 जून की रात युवती अचानक घर से चली गई। शुरुआत में परिवार को उसके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में प्रेम विवाह की बात सामने आने के बाद घर में तनाव का माहौल बन गया।
पिता का कहना है कि उन्होंने बेटी की शादी को लेकर कई सपने देखे थे। विवाह की तैयारियों में काफी पैसा और मेहनत लगी थी। ऐसे समय में बेटी के इस फैसले ने पूरे परिवार को गहरा झटका दिया।
राजदह धाम पहुंचकर कराया प्रतीकात्मक पिंडदान
मंगलवार को पिता अपने परिवार के कुछ सदस्यों और गांव के लोगों के साथ सरिया स्थित राजदह धाम पहुंचे। यहां उत्तरवाहिनी बराकर नदी के किनारे पुरोहितों की मौजूदगी में बेटी का प्रतीकात्मक चित्र बनाया गया और विधि-विधान से श्राद्ध तथा पिंडदान की रस्म पूरी की गई।
आमतौर पर पिंडदान मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। लेकिन किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर इस तरह का धार्मिक अनुष्ठान किए जाने की घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
इलाके में छिड़ी नई बहस
घटना सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोग इसे एक पिता की भावनात्मक पीड़ा और सामाजिक दबाव का नतीजा मान रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार की उम्मीदों के टूटने से पिता ने यह कदम उठाया।
वहीं कई लोगों का मानना है कि बदलते दौर में युवाओं और परिवारों के बीच संवाद की कमी ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रही है। उनका कहना है कि रिश्तों में बातचीत और भरोसा मजबूत हो तो ऐसे विवादों से बचा जा सकता है।
प्रेम विवाह बनाम पारिवारिक परंपरा
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि प्रेम विवाह, पारिवारिक सम्मान और सामाजिक सोच को लेकर नई बहस का कारण बन गई है। एक तरफ युवाओं को अपने जीवनसाथी चुनने की आजादी की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ परिवार की भावनाओं और सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल भी उठ रहा है।
फिलहाल यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अपने-अपने नजरिए से इस घटना को देख रहे हैं।
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