By Malay Ojha | Published: 18 June 2026 at 10:01 AM
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक को समाप्त कर दिया है। हाई कोर्ट ने यह फैसला उस समय सुनाया जब सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोई प्रभावी पैरवी नहीं की गई। इस आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ ने अभिषेक बनर्जी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता इस मामले को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। अदालत ने नवंबर 2025 में दी गई अंतरिम राहत को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया। इसके साथ ही गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर लगी रोक भी हट गई है।
सुनवाई के दौरान नहीं पहुंचा कोई वकील
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने इसे गंभीरता से लिया और अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से मामले को लेकर पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई जा रही है। इसी आधार पर अदालत ने लंबित याचिका को निरस्त कर दिया।
विशेष अदालत को भेजे गए आदेश
हाई कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति भोपाल स्थित जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। अब विशेष अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। अदालत के इस फैसले को मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है।
किस मामले में जारी हुआ था वारंट?
यह पूरा मामला नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक राजनीतिक सभा से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उस सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसी टिप्पणी को लेकर आकाश विजयवर्गीय ने भोपाल की विशेष अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के बाद शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
शिकायत पर सुनवाई के दौरान विशेष अदालत ने अभिषेक बनर्जी को कई बार पेश होने के निर्देश दिए थे। अदालत में उपस्थिति नहीं होने के बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सांसद होने का दिया गया था तर्क
हाई कोर्ट में दायर याचिका में अभिषेक बनर्जी की ओर से कहा गया था कि वह लोकसभा सांसद हैं और उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। इसी दलील को देखते हुए अदालत ने नवंबर 2025 में गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट द्वारा राहत वापस लिए जाने के बाद मामला फिर से विशेष अदालत के दायरे में पहुंच गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अब अदालत की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। यदि आगे कोई नई राहत नहीं मिलती है तो अभिषेक बनर्जी को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बता रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक इस फैसले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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