By Malay Ojha | Published: 19 June 2026 at 08:53 AM
करीब साढ़े तीन महीने तक चले समुद्री तनाव के बाद भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता होने तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से नाकेबंदी हटने के बाद हजारों टन एलएनजी लेकर एक बड़ा गैस जहाज सुरक्षित रूप से गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंच गया है। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
माल्टा के झंडे वाला एलएनजीसी दिशा नामक सुपरटैंकर गुजरात के भरूच स्थित दहेज बंदरगाह पर पहुंचा। खास बात यह है कि ईरान-अमेरिका समझौते के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंचने वाला यह पहला एलएनजी जहाज बताया जा रहा है। जहाज के सुरक्षित पहुंचने से ऊर्जा क्षेत्र में राहत की उम्मीद बढ़ गई है।
गैस आपूर्ति पर पड़ेगा सीधा असर
हजारों टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस भारत पहुंचने से गैस आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से समुद्री मार्गों पर बने तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, उसमें अब काफी कमी आ सकती है। इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
दहेज बंदरगाह के लिए भी अहम उपलब्धि
गुजरात का दहेज बंदरगाह देश के प्रमुख ऊर्जा आयात केंद्रों में शामिल है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बनी हुई थी, तब इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना बंदरगाह संचालन और आपूर्ति श्रृंखला दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हॉर्मुज का महत्व
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। पश्चिम एशिया से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के कारण इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई थी।
समुद्र में फंसे थे हजारों जहाज
तनावपूर्ण हालात के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। समुद्री व्यापार से जुड़े जानकारों के अनुसार बड़ी संख्या में मालवाहक जहाजों को अपने निर्धारित मार्ग बदलने पड़े, जबकि कई जहाजों को लंबे समय तक समुद्र में इंतजार करना पड़ा। इससे परिवहन लागत और आपूर्ति समय दोनों पर असर पड़ा था।
समझौते के बाद सामान्य हो रहे हालात
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने तथा समुद्री मार्गों पर स्थिति सामान्य होने के बाद अब जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। भारत पहुंचा यह एलएनजी जहाज उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जो यह संकेत देता है कि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्थिर हो सकती है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों को मिलेगा सहारा
भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में गैस का आयात करता है। ऐसे में एलएनजी से भरे जहाजों का समय पर पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में शांति बनी रहती है तो आने वाले दिनों में गैस और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार में और अधिक स्थिरता देखने को मिल सकती है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

