By aryavartalive | Published: 29 July 2026 at 10:16 PM
पटना: बिहार में बिजली वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए चल रही आरडीएसएस परियोजनाओं के काम की गुणवत्ता पर पटना में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। आरईसी के पटना क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनियों से जुड़े करीब 150 अभियंताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में परियोजनाओं की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन, जांच व्यवस्था और काम को तय समय पर पूरा करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आरडीएसएस के तहत चल रहे बिजली वितरण से जुड़े काम में गुणवत्ता सुनिश्चित करना था। इसमें अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से लेकर निर्माण कार्य और उसके निरीक्षण तक हर स्तर पर तय मानकों का पालन होना चाहिए। साथ ही, काम की निगरानी और उसकी जानकारी से जुड़े दस्तावेज भी सही तरीके से तैयार किए जाने चाहिए।
150 अभियंताओं ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के करीब 150 विद्युत अभियंताओं ने भाग लिया। इसके अलावा टर्नकी ठेकेदार, परियोजना प्रबंधन एजेंसी, विभिन्न निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि और बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े अन्य लोग भी कार्यशाला में शामिल हुए। इस दौरान अलग-अलग स्तर पर काम कर रही एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को लेकर भी चर्चा हुई।
गुणवत्ता को बताया परियोजनाओं की सफलता की पहली शर्त
कार्यशाला में उत्तर बिहार बिजली वितरण कंपनी के परियोजना निदेशक आई. सी. यादव और दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी के परियोजना निदेशक दीपक कुमार मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी बिजली परियोजना की सफलता केवल समय पर काम पूरा करने से तय नहीं होती, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों ने तकनीकी मानकों के पालन पर दिया जोर
अधिकारियों ने संबंधित एजेंसियों से अपील की कि बिजली वितरण से जुड़ी परियोजनाओं में निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बिजली ढांचा तैयार होने से बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिलती है। इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलता है और लंबे समय तक टिकाऊ बिजली ढांचा तैयार किया जा सकता है।
गुणवत्ता जांच से लेकर सामग्री की निगरानी तक हुई चर्चा
कार्यशाला के दौरान गुणवत्ता जांच और निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से बातचीत हुई। इसमें बिजली परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता, काम की जांच, जरूरी दस्तावेज तैयार करने, सुरक्षा नियमों और तकनीकी निर्देशों के पालन जैसे विषय प्रमुख रहे। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने परियोजनाओं के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों पर भी चर्चा की और उनके समाधान के तरीके बताए।
काम की गुणवत्ता के साथ दस्तावेज भी जरूरी
बैठक में यह बात भी सामने आई कि किसी परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केवल मौके पर जाकर काम की जांच करना पर्याप्त नहीं है। निरीक्षण से जुड़ी पूरी जानकारी और जरूरी रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से रखना भी जरूरी है। इससे परियोजना की प्रगति पर नजर रखने के साथ-साथ भविष्य में किसी तरह की समस्या आने पर उसके कारणों की पहचान करने में भी मदद मिलती है।
आरईसी अधिकारियों ने साझा की निगरानी की बेहतर व्यवस्था
आरईसी की ओर से मुख्य कार्यक्रम प्रबंधक एस. के. बागे, गुणवत्ता प्रभाग के विभागाध्यक्ष योगेन्द्र सिंह, पंकज कपासिया और गुरप्रीत कौर समेत अन्य अधिकारियों ने कार्यशाला में प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बिजली परियोजनाओं की गुणवत्ता पर नजर रखने, निरीक्षण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी साझा की।
जवाबदेही तय करने पर भी रहा जोर
आरईसी अधिकारियों ने कहा कि आरडीएसएस के तहत चल रही परियोजनाओं को बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी और बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने गुणवत्ता से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने और काम की निगरानी को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यशाला का संचालन अभय भारती ने किया।
कार्यशाला के बाद अधिकारियों ने किया परियोजना स्थल का दौरा
कार्यशाला के बाद प्रतिभागियों के लिए परियोजना स्थलों का दौरा भी कराया गया। इस दौरान अभियंताओं और अन्य प्रतिभागियों को मौके पर चल रहे काम की गुणवत्ता जांच और उससे जुड़े दस्तावेज तैयार करने की वास्तविक प्रक्रिया दिखाई गई। इससे कार्यशाला में हुई सैद्धांतिक चर्चा को जमीन पर चल रहे काम से जोड़ने में मदद मिली।
मौके पर समझाई गई गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया
परियोजना स्थल के दौरे के दौरान आरईसी के पटना क्षेत्रीय कार्यालय से जुड़े सुवन, मनीष, अभिषेक, दिलीप और अक्षय ने अलग-अलग टीमों का मार्गदर्शन किया। प्रतिभागियों को काम की प्रगति की जांच, गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड और अभिलेखों को व्यवस्थित रखने के तरीके के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान परियोजना के अलग-अलग चरणों में गुणवत्ता की निगरानी किस तरह की जाती है, इसे भी मौके पर समझाया गया।
बिजली वितरण ढांचे के लिए अहम माना गया आयोजन
कार्यशाला में हुई चर्चा का मकसद केवल मौजूदा परियोजनाओं की खामियों को दूर करना ही नहीं था, बल्कि आगे होने वाले काम में गुणवत्ता को शुरुआत से ही प्राथमिकता देना भी था। आरडीएसएस के तहत बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किए जा रहे हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, निर्माण की गुणवत्ता और तय मानकों का पालन सीधे तौर पर बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।
सुझावों को परियोजनाओं में लागू करने पर जोर
कार्यशाला के दौरान अभियंताओं, ठेकेदारों, परियोजना प्रबंधन एजेंसियों और अन्य हितधारकों की ओर से दिए गए सुझावों को आरडीएसएस परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए उपयोगी बताया गया। अधिकारियों का मानना है कि अलग-अलग स्तर पर काम कर रही टीमों के अनुभव और सुझावों को साझा करने से परियोजनाओं में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा सकता है।
गुणवत्ता संस्कृति मजबूत करने की दिशा में कदम
कार्यक्रम में शामिल विद्युत अभियंताओं ने इस आयोजन को बिजली वितरण क्षेत्र में गुणवत्ता की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उनका कहना था कि बिजली के ढांचे का विकास केवल नई लाइनें और उपकरण लगाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए मजबूत निर्माण, नियमित जांच, सुरक्षा नियमों का पालन और लंबे समय तक टिकाऊ व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी है।
बिहार में बेहतर बिजली व्यवस्था की उम्मीद
आरईसी और दोनों बिजली वितरण कंपनियों की इस पहल से आरडीएसएस के तहत चल रही परियोजनाओं में काम की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद है। कार्यशाला में सामने आए सुझावों और अनुभवों का इस्तेमाल परियोजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में किया जा सकता है। इससे आने वाले समय में बिहार की बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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