By Malay Ojha | Published: 21 June 2026 at 01:41 PM
अमेरिका के साथ हुए नए समझौते के बाद ईरान के अंदर सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। समझौते का विरोध कर रहे कट्टरपंथी नेताओं और संगठनों के बीच उस वक्त हलचल मच गई, जब सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के नाम से एक संदेश जारी हुआ। इस संदेश में साफ कहा गया कि ऐसे बयान और कदम, जो लोगों के बीच निराशा और अविश्वास पैदा करें, वे देश के दुश्मनों को फायदा पहुंचाने वाले हैं।
राजनीतिक जानकार इस बयान को समझौते का विरोध कर रहे नेताओं और संगठनों के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं। पिछले कई हफ्तों से ईरान के भीतर ऐसे समूह लगातार अमेरिका से बातचीत का विरोध कर रहे थे और सरकार की वार्ता प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे।
सरकार ने नेतृत्व के फैसले का समर्थन किया
खामेनेई के संदेश के कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिका के साथ बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि वे सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। दोनों नेताओं ने बातचीत की प्रक्रिया को देश के हित में बताते हुए उसका समर्थन किया।
कट्टरपंथी गुटों ने पहले किया था कड़ा विरोध
ईरान में कई कट्टरपंथी धार्मिक और राजनीतिक समूह लंबे समय से अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत के खिलाफ रहे हैं। उनका कहना है कि वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं किया जा सकता और इस तरह के समझौते से ईरान को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रमुख नेताओं ने उठाए सवाल
अमेरिका के साथ बातचीत के आलोचकों में प्रमुख अखबार ‘कायहान’ के संपादक हुसैन शरीयत मदारी और सांसद इस्माइल कोसारी जैसे नेता शामिल हैं। इन नेताओं ने बार-बार कहा है कि अमेरिका के साथ समझौता करना ईरान की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।
रिपोर्ट में सामने आया बड़ा दावा
ईरानी वेबसाइट ‘खबर ऑनलाइन’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि समझौते का विरोध केवल सामान्य राजनीतिक आलोचना नहीं है, बल्कि बातचीत की प्रक्रिया को कमजोर करने और देश के भीतर मतभेद बढ़ाने की एक संगठित कोशिश भी हो सकती है। रिपोर्ट में सरकारी प्रसारण संस्था आईआरआईबी को समझौते का सबसे बड़ा विरोधी बताया गया है।
धार्मिक नेताओं ने भी जताई नाराजगी
रिपोर्ट के मुताबिक, कई धार्मिक नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका से बातचीत का विरोध किया। मौलवी गुलामरेज़ा गासेमियन ने अमेरिका से बातचीत को गलत बताया, जबकि शेख इस्माइल रमजानी ने कहा कि वॉशिंगटन के साथ स्थायी और अच्छे संबंध कभी संभव नहीं हो सकते।
पायदारी पार्टी लगातार बना रही दबाव
कट्टरपंथी पायदारी पार्टी भी इस समझौते की मुखर विरोधी मानी जा रही है। पार्टी से जुड़े सांसद और उससे जुड़े मीडिया मंच लगातार सरकार की वार्ता टीम पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि विरोध सिर्फ इसी दल तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य धार्मिक और राजनीतिक समूह भी अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकियों से असहमत हैं।
गालिबाफ ने दी सख्त चेतावनी
मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि जो लोग सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों के खिलाफ जाएंगे, उन्हें जनता की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। उनके इस बयान को सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि समझौते पर अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मतभेद अभी भी खत्म नहीं
हालांकि खामेनेई के संदेश के बाद विरोध की आवाजें कुछ धीमी जरूर पड़ी हैं, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने को लेकर गहरे मतभेद अभी भी बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा ईरान की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है और देश की विदेश नीति की दिशा भी तय कर सकता है।
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