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गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर पर 2,130 करोड़ की योजना से बदलेगी बिहार की पर्यटन तस्वीर, संतोष सुमन बोले- युवाओं को मिलेगा रोजगार

By Malay Ojha | Published: 11 August 2026 at 07:43 PM

बिहार में पर्यटन को नई रफ्तार देने के लिए गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर के समग्र विकास की 2,130 करोड़ रुपये की बड़ी योजना सामने आई है। इसमें गया-बोधगया के लिए 1,080 करोड़ रुपये और नालंदा-राजगीर के लिए 1,050 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार ने इन दोनों योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से जल्द सैद्धांतिक मंजूरी देने का अनुरोध किया है। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे बिहार की ऐतिहासिक विरासत और आर्थिक विकास के लिए अहम कदम बताया है।

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर केवल बिहार के पर्यटन स्थल नहीं हैं, बल्कि इनका संबंध भारत की ऐतिहासिक, धार्मिक और ज्ञान परंपरा से रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों का विकास सिर्फ पर्यटकों की सुविधा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यहां आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।

बोधगया से नालंदा तक पर्यटन का दायरा बढ़ाने की जरूरत
बोधगया दुनिया भर में भगवान बुद्ध से जुड़ी आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसी तरह प्राचीन नालंदा भारत की उस ज्ञान परंपरा की पहचान है, जिसने सदियों पहले दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थियों को अपनी ओर आकर्षित किया था। मंत्री ने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार बिहार की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत कर सकता है।

राजगीर, पावापुरी और वैशाली को भी जोड़ने पर जोर
डॉ. सुमन ने कहा कि पर्यटन की संभावनाएं केवल गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर तक सीमित नहीं हैं। राजगीर, पावापुरी, वैशाली और पटना साहिब जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को भी बेहतर तरीके से एक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए बिहार में अधिक दिनों तक रुकने और एक साथ कई ऐतिहासिक स्थलों को देखने का अवसर तैयार होगा।

सिर्फ सड़क और इमारतों से नहीं बदलेगा पर्यटन
मंत्री के मुताबिक किसी भी पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए केवल नई इमारतें और सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों के लिए साफ-सफाई, सुरक्षित माहौल, ठहरने की अच्छी व्यवस्था, आने-जाने की सुविधा और स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाएं भी जरूरी हैं। इन सुविधाओं में सुधार होने पर बिहार आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।

पर्यटन बढ़ेगा तो स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा फायदा
बिहार में पर्यटन के विस्तार का सीधा असर स्थानीय कारोबार पर पड़ सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, छोटे भोजनालय, वाहन सेवा, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और दूसरे छोटे कारोबारों की मांग बढ़ेगी। इससे उन लोगों को भी फायदा मिलेगा, जो पर्यटन स्थलों के आसपास छोटे स्तर पर अपना काम करते हैं।

युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने पर्यटन विकास को युवाओं के रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि इसका लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटक मार्गदर्शक, होटल और खान-पान से जुड़ी सेवाओं, परिवहन, हस्तशिल्प और दूसरे कामों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही कई युवा छोटे कारोबार शुरू कर स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।

बिहार की विरासत को आर्थिक ताकत बनाने की कोशिश
बिहार के पास धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन लंबे समय से इन संभावनाओं को पूरी तरह इस्तेमाल करने की चुनौती बनी हुई है। गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर के लिए प्रस्तावित 2,130 करोड़ रुपये की योजना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।

केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
मंत्री ने कहा कि बिहार की पर्यटन क्षमता को विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। राज्य सरकार ने दोनों योजनाओं के लिए केंद्र से जल्द सैद्धांतिक मंजूरी का अनुरोध किया है। मंजूरी मिलने के बाद इन क्षेत्रों में विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है।

बिहार की पहचान को नया विस्तार देने की तैयारी
बिहार की पहचान केवल राजनीतिक और प्रशासनिक खबरों तक सीमित नहीं है। बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली और पटना साहिब जैसे स्थान राज्य की ऐसी विरासत हैं, जिन्हें दुनिया के सामने और मजबूती से रखा जा सकता है। बेहतर पर्यटन सुविधाओं और मजबूत संपर्क व्यवस्था के साथ इन स्थलों को विकसित करने से बिहार की छवि बदलने में मदद मिल सकती है।

विरासत से विकास तक पहुंचने की उम्मीद
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक विरासत को विकास का आधार बनाया जा सकता है। उनके अनुसार पर्यटन को बढ़ावा मिलने से केवल पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों की आमदनी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर के लिए प्रस्तावित 2,130 करोड़ रुपये की योजना इसी सोच को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर पर 2,130 करोड़ की योजना से बदलेगी बिहार की पर्यटन तस्वीर, संतोष सुमन बोले- युवाओं को मिलेगा रोजगार

By Malay Ojha | Published: 11 August 2026 at 07:43 PM

बिहार में पर्यटन को नई रफ्तार देने के लिए गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर के समग्र विकास की 2,130 करोड़ रुपये की बड़ी योजना सामने आई है। इसमें गया-बोधगया के लिए 1,080 करोड़ रुपये और नालंदा-राजगीर के लिए 1,050 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार ने इन दोनों योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से जल्द सैद्धांतिक मंजूरी देने का अनुरोध किया है। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे बिहार की ऐतिहासिक विरासत और आर्थिक विकास के लिए अहम कदम बताया है।

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर केवल बिहार के पर्यटन स्थल नहीं हैं, बल्कि इनका संबंध भारत की ऐतिहासिक, धार्मिक और ज्ञान परंपरा से रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों का विकास सिर्फ पर्यटकों की सुविधा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यहां आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।

बोधगया से नालंदा तक पर्यटन का दायरा बढ़ाने की जरूरत
बोधगया दुनिया भर में भगवान बुद्ध से जुड़ी आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसी तरह प्राचीन नालंदा भारत की उस ज्ञान परंपरा की पहचान है, जिसने सदियों पहले दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थियों को अपनी ओर आकर्षित किया था। मंत्री ने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार बिहार की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत कर सकता है।

राजगीर, पावापुरी और वैशाली को भी जोड़ने पर जोर
डॉ. सुमन ने कहा कि पर्यटन की संभावनाएं केवल गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर तक सीमित नहीं हैं। राजगीर, पावापुरी, वैशाली और पटना साहिब जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को भी बेहतर तरीके से एक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए बिहार में अधिक दिनों तक रुकने और एक साथ कई ऐतिहासिक स्थलों को देखने का अवसर तैयार होगा।

सिर्फ सड़क और इमारतों से नहीं बदलेगा पर्यटन
मंत्री के मुताबिक किसी भी पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए केवल नई इमारतें और सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों के लिए साफ-सफाई, सुरक्षित माहौल, ठहरने की अच्छी व्यवस्था, आने-जाने की सुविधा और स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाएं भी जरूरी हैं। इन सुविधाओं में सुधार होने पर बिहार आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।

पर्यटन बढ़ेगा तो स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा फायदा
बिहार में पर्यटन के विस्तार का सीधा असर स्थानीय कारोबार पर पड़ सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, छोटे भोजनालय, वाहन सेवा, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और दूसरे छोटे कारोबारों की मांग बढ़ेगी। इससे उन लोगों को भी फायदा मिलेगा, जो पर्यटन स्थलों के आसपास छोटे स्तर पर अपना काम करते हैं।

युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने पर्यटन विकास को युवाओं के रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि इसका लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटक मार्गदर्शक, होटल और खान-पान से जुड़ी सेवाओं, परिवहन, हस्तशिल्प और दूसरे कामों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही कई युवा छोटे कारोबार शुरू कर स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।

बिहार की विरासत को आर्थिक ताकत बनाने की कोशिश
बिहार के पास धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन लंबे समय से इन संभावनाओं को पूरी तरह इस्तेमाल करने की चुनौती बनी हुई है। गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर के लिए प्रस्तावित 2,130 करोड़ रुपये की योजना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।

केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
मंत्री ने कहा कि बिहार की पर्यटन क्षमता को विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। राज्य सरकार ने दोनों योजनाओं के लिए केंद्र से जल्द सैद्धांतिक मंजूरी का अनुरोध किया है। मंजूरी मिलने के बाद इन क्षेत्रों में विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है।

बिहार की पहचान को नया विस्तार देने की तैयारी
बिहार की पहचान केवल राजनीतिक और प्रशासनिक खबरों तक सीमित नहीं है। बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली और पटना साहिब जैसे स्थान राज्य की ऐसी विरासत हैं, जिन्हें दुनिया के सामने और मजबूती से रखा जा सकता है। बेहतर पर्यटन सुविधाओं और मजबूत संपर्क व्यवस्था के साथ इन स्थलों को विकसित करने से बिहार की छवि बदलने में मदद मिल सकती है।

विरासत से विकास तक पहुंचने की उम्मीद
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक विरासत को विकास का आधार बनाया जा सकता है। उनके अनुसार पर्यटन को बढ़ावा मिलने से केवल पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों की आमदनी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। गया-बोधगया और नालंदा-राजगीर के लिए प्रस्तावित 2,130 करोड़ रुपये की योजना इसी सोच को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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