Sunday, June 21, 2026

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पिता चलाते हैं छोटी किराना दुकान, तीसरी बार बीपीएससी पास कर बेटी बनी डीएसपी

By Malay Ojha | Published: 21 June 2026 at 02:04 PM

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली जया कुमारी ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में डीएसपी पद हासिल कर सफलता की नई मिसाल कायम की है। सबसे खास बात यह है कि यह बीपीएससी में उनकी लगातार तीसरी सफलता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद जया ने अपने दम पर पढ़ाई की, ट्यूशन पढ़ाकर खर्च निकाला और आखिरकार अपने सपने को हकीकत में बदल दिया।

बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन राज्य स्तरीय परीक्षाओं में गिना जाता है। ऐसे में लगातार तीन बार इस परीक्षा में सफलता हासिल करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। जया कुमारी ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में 934वीं रैंक हासिल कर डीएसपी पद के लिए चयनित होकर पूरे मुजफ्फरपुर का नाम रोशन कर दिया है।

साधारण परिवार से निकलकर हासिल की बड़ी मंजिल
जया मुजफ्फरपुर के गोबरसाही इलाके की रहने वाली हैं। उनके पिता सुनील कुमार एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं और उसी से परिवार का खर्च चलता है। उनकी मां दुर्गा रानी गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने कभी बेटी की पढ़ाई में रुकावट नहीं आने दी।

पढ़ाई के लिए दिल्ली गईं, खुद कमाकर पूरा किया सपना
जया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली चली गईं, जहां उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। आर्थिक तंगी के कारण वह किसी महंगे कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं ले सकीं।

ऐसे में उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। ट्यूशन से जो पैसे मिले, उसी से उन्होंने अपनी पढ़ाई, किताबों और टेस्ट सीरीज का खर्च उठाया। मेहनत और अनुशासन के दम पर उन्होंने खुद को प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार किया।

पहली नौकरी छोड़कर नहीं छोड़ा बड़ा सपना
जया की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पहले भी दो बार बीपीएससी परीक्षा पास की थी। 67वीं बीपीएससी परीक्षा में उनका चयन राजस्व अधिकारी पद के लिए हुआ था, लेकिन उन्होंने उस पद पर योगदान नहीं दिया।

इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और दिव्यांग विभाग में सहायक निदेशक पद के लिए चयनित हुईं। वर्तमान में वह सीतामढ़ी में इसी पद पर कार्यरत थीं। नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अपनी कमजोरियों को दूर करते हुए एक बार फिर परीक्षा दी।

आखिरकार पूरा हुआ डीएसपी बनने का सपना
जया का लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में ऊंचे पद पर पहुंचना था। तीसरे प्रयास में उन्हें वह मुकाम मिल गया, जिसका सपना वह कई वर्षों से देख रही थीं। डीएसपी बनने के बाद उनके घर में खुशी का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

भाई और परिवार बने सबसे बड़ी ताकत
जया की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। उनके भाई अभिजीत कुमार भी उच्च शिक्षा से जुड़े हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध कर रहे हैं। परिवार ने हर मुश्किल दौर में जया का मनोबल बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

बिहार की बेटियों के लिए बनीं नई प्रेरणा
जया कुमारी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक परेशानियों को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। आज उनकी कामयाबी पूरे बिहार की बेटियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई है।

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पिता चलाते हैं छोटी किराना दुकान, तीसरी बार बीपीएससी पास कर बेटी बनी डीएसपी

By Malay Ojha | Published: 21 June 2026 at 02:04 PM

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली जया कुमारी ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में डीएसपी पद हासिल कर सफलता की नई मिसाल कायम की है। सबसे खास बात यह है कि यह बीपीएससी में उनकी लगातार तीसरी सफलता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद जया ने अपने दम पर पढ़ाई की, ट्यूशन पढ़ाकर खर्च निकाला और आखिरकार अपने सपने को हकीकत में बदल दिया।

बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन राज्य स्तरीय परीक्षाओं में गिना जाता है। ऐसे में लगातार तीन बार इस परीक्षा में सफलता हासिल करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। जया कुमारी ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में 934वीं रैंक हासिल कर डीएसपी पद के लिए चयनित होकर पूरे मुजफ्फरपुर का नाम रोशन कर दिया है।

साधारण परिवार से निकलकर हासिल की बड़ी मंजिल
जया मुजफ्फरपुर के गोबरसाही इलाके की रहने वाली हैं। उनके पिता सुनील कुमार एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं और उसी से परिवार का खर्च चलता है। उनकी मां दुर्गा रानी गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने कभी बेटी की पढ़ाई में रुकावट नहीं आने दी।

पढ़ाई के लिए दिल्ली गईं, खुद कमाकर पूरा किया सपना
जया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली चली गईं, जहां उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। आर्थिक तंगी के कारण वह किसी महंगे कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं ले सकीं।

ऐसे में उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। ट्यूशन से जो पैसे मिले, उसी से उन्होंने अपनी पढ़ाई, किताबों और टेस्ट सीरीज का खर्च उठाया। मेहनत और अनुशासन के दम पर उन्होंने खुद को प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार किया।

पहली नौकरी छोड़कर नहीं छोड़ा बड़ा सपना
जया की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पहले भी दो बार बीपीएससी परीक्षा पास की थी। 67वीं बीपीएससी परीक्षा में उनका चयन राजस्व अधिकारी पद के लिए हुआ था, लेकिन उन्होंने उस पद पर योगदान नहीं दिया।

इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और दिव्यांग विभाग में सहायक निदेशक पद के लिए चयनित हुईं। वर्तमान में वह सीतामढ़ी में इसी पद पर कार्यरत थीं। नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अपनी कमजोरियों को दूर करते हुए एक बार फिर परीक्षा दी।

आखिरकार पूरा हुआ डीएसपी बनने का सपना
जया का लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में ऊंचे पद पर पहुंचना था। तीसरे प्रयास में उन्हें वह मुकाम मिल गया, जिसका सपना वह कई वर्षों से देख रही थीं। डीएसपी बनने के बाद उनके घर में खुशी का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

भाई और परिवार बने सबसे बड़ी ताकत
जया की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। उनके भाई अभिजीत कुमार भी उच्च शिक्षा से जुड़े हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध कर रहे हैं। परिवार ने हर मुश्किल दौर में जया का मनोबल बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

बिहार की बेटियों के लिए बनीं नई प्रेरणा
जया कुमारी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक परेशानियों को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। आज उनकी कामयाबी पूरे बिहार की बेटियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई है।

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