By Malay Ojha | Published: 22 June 2026 at 11:58 AM
कैंसर के इलाज की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब मरीजों के लिए ‘एक जैसा इलाज’ देने का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में मरीज की बीमारी की प्रकृति, उसके जीन और शरीर की जैविक बनावट के आधार पर इलाज तय किया जाएगा। इसी आधुनिक पद्धति को प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है, जो कैंसर के उपचार में नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, समस्तीपुर की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में कैंसर के आधुनिक इलाज पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का विषय था- “प्रिसिजन मेडिसिन : द फ्यूचर ऑफ ऑन्कोलॉजी”। इसमें नारायणा कैंसर सेंटर, पटना और पारस एचएमआरआई के निदेशक (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. अभिषेक आनंद ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
अब हर मरीज के लिए अलग होगी उपचार की योजना
डॉ. अभिषेक आनंद ने कहा कि पहले ज्यादातर कैंसर मरीजों को लगभग एक जैसी दवाएं और उपचार दिए जाते थे, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान व्यक्तिगत इलाज की दिशा में आगे बढ़ चुका है। अब डॉक्टर मरीज के कैंसर की मॉलिक्यूलर जांच, बीमारी के प्रकार और उसकी जैविक विशेषताओं को समझने के बाद उपचार की योजना तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस नई पद्धति से इलाज अधिक सटीक होता है, मरीज को अनावश्यक दुष्प्रभाव कम झेलने पड़ते हैं और बीमारी पर बेहतर नियंत्रण की संभावना बढ़ जाती है।
जीन जांच और नई तकनीकों ने बदली तस्वीर
कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक, जीनोमिक प्रोफाइलिंग, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी नई तकनीकों ने कैंसर उपचार को पूरी तरह बदल दिया है। इन तकनीकों की मदद से डॉक्टर यह पता लगा पाते हैं कि मरीज के शरीर में कौन-सा बदलाव कैंसर की वजह बना है और उसी के अनुसार दवाओं का चयन किया जाता है।
इससे कई मरीजों में उपचार के नतीजे पहले की तुलना में कहीं बेहतर देखने को मिल रहे हैं।
इन कैंसर मरीजों को ज्यादा फायदा
डॉ. आनंद ने बताया कि फेफड़े, स्तन, बड़ी आंत और अंडाशय के कैंसर में प्रिसिजन मेडिसिन के काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। कई मामलों में मरीजों की जीवन अवधि बढ़ी है और उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक और अधिक प्रभावी होगी तथा कैंसर के इलाज की दिशा ही बदल सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से और आसान होगा इलाज
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जीन आधारित शोध के बढ़ते इस्तेमाल से कैंसर की पहचान और उपचार पहले से अधिक तेज और सटीक होगा। इससे डॉक्टरों को मरीज के लिए सबसे बेहतर उपचार चुनने में मदद मिलेगी और बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ना भी आसान हो सकेगा।
बड़ी संख्या में शामिल हुए चिकित्सक
कार्यक्रम में आईएमए समस्तीपुर के अध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह, सचिव डॉ. रेनू राणा और साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ. राजेश कुमार झा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कैंसर उपचार में हो रहे नए बदलावों और आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
क्या है प्रिसिजन मेडिसिन?
प्रिसिजन मेडिसिन ऐसी उपचार पद्धति है, जिसमें सभी मरीजों को एक जैसी दवा देने के बजाय उनकी बीमारी, जीन और शरीर की विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग इलाज तय किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही तकनीक आने वाले वर्षों में कैंसर उपचार की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
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