By Malay Ojha | Published: 22 June 2026 at 04:46 PM
इंसान की मौत कब होगी, यह सवाल सदियों से रहस्य बना हुआ है। अब वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो शरीर के अंदर चल रही जैविक प्रक्रियाओं को देखकर यह अनुमान लगाने में मदद कर सकती है कि कोई व्यक्ति कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है और उसका शरीर कितने समय तक स्वस्थ रह सकता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह तकनीक भविष्य में इलाज और दवाओं की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकती है।
अब तक किसी व्यक्ति की उम्र का हिसाब उसके जन्म के बाद बीते वर्षों से लगाया जाता था, जिसे सामान्य उम्र माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर की वास्तविक स्थिति इससे अलग हो सकती है। इसी को समझने के लिए उन्होंने एक नया ‘ट्रांसक्रिप्टोमिक क्लॉक’ तैयार किया है, जो कोशिकाओं की गतिविधियों के आधार पर शरीर की जैविक उम्र का पता लगाता है।
हजारों जीन का किया गया अध्ययन
इस तकनीक को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने इंसानों और कई अन्य जीवों के करीब 11 हजार जीन प्रोफाइल का अध्ययन किया। शोध के दौरान शरीर के 25 अलग-अलग ऊतकों की जांच की गई। वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि उम्र बढ़ने के दौरान कौन-कौन से जीन सक्रिय होते हैं और कौन से जीन धीमे पड़ जाते हैं।
पुरानी तकनीक से ज्यादा सटीक होने का दावा
इससे पहले उम्र का अनुमान लगाने के लिए डीएनए में होने वाले रासायनिक बदलावों को आधार बनाया जाता था। वैज्ञानिकों के अनुसार नई तकनीक इससे कहीं अधिक सटीक साबित हो सकती है, क्योंकि यह सीधे कोशिकाओं की मौजूदा गतिविधियों को पढ़ती है और शरीर के भीतर चल रहे बदलावों की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है।
हर कोशिका में दिखा एक जैसा पैटर्न
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं को एक दिलचस्प बात पता चली। चाहे शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाएं हों, मांसपेशियां हों, लिवर की कोशिकाएं हों या स्टेम सेल, सभी में उम्र बढ़ने के दौरान लगभग एक जैसे बदलाव देखने को मिले। इससे वैज्ञानिकों को शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
कौन तेजी से बूढ़ा हो रहा, यह भी चलेगा पता
शोधकर्ताओं के मुताबिक जिन कोशिकाओं में शरीर की मरम्मत और नई कोशिकाएं बनाने वाले जीन ज्यादा सक्रिय थे, वे धीरे-धीरे बूढ़ी हो रही थीं। इसके विपरीत जिन कोशिकाओं में सूजन और कोशिका क्षति से जुड़े जीन अधिक सक्रिय मिले, उनमें तेजी से उम्र बढ़ने के संकेत दिखाई दिए। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी आधार पर किसी व्यक्ति के भविष्य के स्वास्थ्य जोखिम और जीवनकाल का अनुमान लगाया जा सकता है।
इलाज की दुनिया में आ सकता है बड़ा बदलाव
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक डॉक्टरों को किसी व्यक्ति की वास्तविक जैविक स्थिति समझने में मदद करेगी। इससे मरीज की जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत इलाज देना आसान होगा। इसके अलावा बुढ़ापा रोकने वाली दवाओं और नई चिकित्सा पद्धतियों की जांच भी कम समय में की जा सकेगी।
अभी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है तकनीक
वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह तकनीक अभी केवल शोध के स्तर पर है। इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने से पहले कई और परीक्षण किए जाएंगे। साथ ही यह तकनीक केवल प्राकृतिक रूप से उम्र बढ़ने और बीमारी के कारण होने वाले जोखिम का अनुमान लगा सकती है। किसी दुर्घटना, आपदा या अचानक होने वाली घटना की भविष्यवाणी यह नहीं कर सकती।
शरीर की सेहत समझने का नया रास्ता
हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक लोगों को यह समझने में मदद कर सकती है कि उनका शरीर अंदर से कितना स्वस्थ है और अगर कोई गंभीर बीमारी या दुर्घटना न हो तो उनके शरीर में कितने समय तक स्वस्थ रहने की क्षमता मौजूद है। यही वजह है कि इस खोज को चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

