By Malay Ojha | Published: 27 June 2026 at 10:30 AM
बिहार की राजनीति में शनिवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह अचानक मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। दोनों नेताओं की इस मुलाकात ने एक बार फिर सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच दूरी बनी हुई थी, ऐसे में यह मुलाकात कई सवाल खड़े कर रही है।
सात सर्कुलर रोड स्थित आवास पर हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक जानकार अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। हालांकि, अभी तक दोनों नेताओं की ओर से बातचीत के विषय को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन मुलाकात के समय और परिस्थितियों ने इसे खास बना दिया है।
क्या फिर करीब आ रहे हैं दोनों नेता?
आरसीपी सिंह कभी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक, दोनों के बीच गहरी राजनीतिक समझ दिखाई देती थी। यही वजह थी कि आरसीपी सिंह को पार्टी की कमान भी सौंपी गई और वह राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी तक पहुंचे।
लेकिन बाद के वर्षों में दोनों नेताओं के रिश्तों में खटास आ गई। पार्टी के भीतर मतभेद बढ़े और हालात ऐसे बने कि आरसीपी सिंह को जनता दल यूनाइटेड से बाहर होना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अलग राजनीतिक राह चुन ली।
बिहार में नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा
आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट मानने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की राजनीति में कोई भी मुलाकात बिना संदेश के नहीं होती। इसलिए इस बैठक के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
पहले भी एक-दूसरे के बेहद करीबी रहे हैं दोनों नेता
नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की जोड़ी कभी जनता दल यूनाइटेड की सबसे मजबूत राजनीतिक जोड़ियों में मानी जाती थी। संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में आरसीपी सिंह की अहम भूमिका मानी जाती रही है।
इसी वजह से जब दोनों के बीच दूरियां बढ़ीं तो यह राज्य की राजनीति का बड़ा घटनाक्रम बन गया था। अब वर्षों बाद हुई इस मुलाकात ने पुराने रिश्तों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अभी कई सवालों के जवाब बाकी
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की ओर से होने वाले बयान इस मुलाकात के असली मायने स्पष्ट कर सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि इस एक मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

