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धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, नीट विवाद के बीच बड़ा फैसला; जंतर-मंतर पर समर्थकों ने मनाया जश्न

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 02:39 PM

नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है। लंबे समय से उनके इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र संगठन और विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहे थे। ऐसे में आंदोलन के बीच उनका इस्तीफा सियासी तौर पर बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का माहौल भी बदल गया। यहां नीट विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों में खुशी देखने को मिली। समर्थक एक-दूसरे को बधाई देते और जश्न मनाते नजर आए। दरअसल, प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रमुख मांगों में शामिल था और अब इस मांग के पूरा होने के बाद समर्थकों में उत्साह बढ़ गया।

तीसरे दौर की बातचीत से पहले आया बड़ा फैसला
सबसे अहम बात यह है कि सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच आज बातचीत का तीसरा दौर होना था। बातचीत से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में यह फैसला आंदोलन और सरकार के बीच चल रही बातचीत के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस्तीफे के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।

छात्र लंबे समय से उठा रहे थे इस्तीफे की मांग
नीट परीक्षा को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद से ही छात्र संगठनों की ओर से लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में सामने आई कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे आरोपों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया और धीरे-धीरे यह मुद्दा राजनीतिक बहस का भी बड़ा हिस्सा बन गया।

जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जुटे थे छात्र
नीट विवाद के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र जुटे थे। प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए और कथित पेपर लीक मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। इसके साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी लगातार जोर पकड़ती गई।

राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी सरकार पर लगातार निशाना साध रहे थे। उन्होंने नीट विवाद को लेकर छात्रों की आवाज उठाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। राहुल गांधी के अलावा विपक्ष के कई अन्य नेताओं और दलों ने भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष का आरोप था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मामले में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।

विपक्ष के दबाव के बीच बढ़ता गया विवाद
नीट पेपर लीक का मुद्दा धीरे-धीरे सिर्फ छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं रहा। विपक्षी दलों ने भी इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। संसद से लेकर सड़क तक सरकार पर सवाल उठाए गए। विपक्ष की ओर से लगातार यह मांग की जाती रही कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हो और छात्रों को न्याय मिले। इसी दौरान धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी विपक्ष की राजनीति का अहम हिस्सा बन गई।

बातचीत के बीच इस्तीफे ने बढ़ाई सियासी हलचल
सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बातचीत के कई दौर होने के बाद भी आंदोलन से जुड़े मुद्दों का पूरी तरह समाधान नहीं हो पाया था। ऐसे समय में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सामने आना काफी अहम माना जा रहा है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार दबाव बनाए हुए थे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और आंदोलनकारी अपनी बाकी मांगों को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

क्या अब खत्म होगा छात्रों का आंदोलन?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या छात्रों का आंदोलन अब खत्म होगा या उनकी बाकी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों की मांग सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रही है। वे नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग भी कर रहे हैं।

इस्तीफे के बाद आगे की रणनीति पर नजर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर रहेगी। तीसरे दौर की वार्ता से पहले आए इस फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। जंतर-मंतर पर समर्थकों के जश्न के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकार छात्रों की बाकी मांगों पर क्या फैसला लेती है।

फिलहाल नीट विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सबसे बड़ा घटनाक्रम बनकर सामने आया है। एक तरफ छात्रों और प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग पूरी होती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अब सरकार के सामने परीक्षा व्यवस्था से जुड़े दूसरे सवालों का समाधान करने की चुनौती है। इस्तीफे के बाद आंदोलन की दिशा क्या होगी और सरकार आगे कौन सा कदम उठाएगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, नीट विवाद के बीच बड़ा फैसला; जंतर-मंतर पर समर्थकों ने मनाया जश्न

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 02:39 PM

नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है। लंबे समय से उनके इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र संगठन और विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहे थे। ऐसे में आंदोलन के बीच उनका इस्तीफा सियासी तौर पर बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का माहौल भी बदल गया। यहां नीट विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों में खुशी देखने को मिली। समर्थक एक-दूसरे को बधाई देते और जश्न मनाते नजर आए। दरअसल, प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रमुख मांगों में शामिल था और अब इस मांग के पूरा होने के बाद समर्थकों में उत्साह बढ़ गया।

तीसरे दौर की बातचीत से पहले आया बड़ा फैसला
सबसे अहम बात यह है कि सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच आज बातचीत का तीसरा दौर होना था। बातचीत से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में यह फैसला आंदोलन और सरकार के बीच चल रही बातचीत के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस्तीफे के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।

छात्र लंबे समय से उठा रहे थे इस्तीफे की मांग
नीट परीक्षा को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद से ही छात्र संगठनों की ओर से लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में सामने आई कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे आरोपों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया और धीरे-धीरे यह मुद्दा राजनीतिक बहस का भी बड़ा हिस्सा बन गया।

जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जुटे थे छात्र
नीट विवाद के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र जुटे थे। प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए और कथित पेपर लीक मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। इसके साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी लगातार जोर पकड़ती गई।

राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी सरकार पर लगातार निशाना साध रहे थे। उन्होंने नीट विवाद को लेकर छात्रों की आवाज उठाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। राहुल गांधी के अलावा विपक्ष के कई अन्य नेताओं और दलों ने भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष का आरोप था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मामले में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।

विपक्ष के दबाव के बीच बढ़ता गया विवाद
नीट पेपर लीक का मुद्दा धीरे-धीरे सिर्फ छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं रहा। विपक्षी दलों ने भी इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। संसद से लेकर सड़क तक सरकार पर सवाल उठाए गए। विपक्ष की ओर से लगातार यह मांग की जाती रही कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हो और छात्रों को न्याय मिले। इसी दौरान धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी विपक्ष की राजनीति का अहम हिस्सा बन गई।

बातचीत के बीच इस्तीफे ने बढ़ाई सियासी हलचल
सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बातचीत के कई दौर होने के बाद भी आंदोलन से जुड़े मुद्दों का पूरी तरह समाधान नहीं हो पाया था। ऐसे समय में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सामने आना काफी अहम माना जा रहा है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार दबाव बनाए हुए थे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और आंदोलनकारी अपनी बाकी मांगों को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

क्या अब खत्म होगा छात्रों का आंदोलन?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या छात्रों का आंदोलन अब खत्म होगा या उनकी बाकी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों की मांग सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रही है। वे नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग भी कर रहे हैं।

इस्तीफे के बाद आगे की रणनीति पर नजर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर रहेगी। तीसरे दौर की वार्ता से पहले आए इस फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। जंतर-मंतर पर समर्थकों के जश्न के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकार छात्रों की बाकी मांगों पर क्या फैसला लेती है।

फिलहाल नीट विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सबसे बड़ा घटनाक्रम बनकर सामने आया है। एक तरफ छात्रों और प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग पूरी होती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अब सरकार के सामने परीक्षा व्यवस्था से जुड़े दूसरे सवालों का समाधान करने की चुनौती है। इस्तीफे के बाद आंदोलन की दिशा क्या होगी और सरकार आगे कौन सा कदम उठाएगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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