By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 06:06 PM
भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. निखिल आनंद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि नीट परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ आंदोलन सिर्फ एक बहाना था और इसके पीछे असली निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश का ओबीसी नेतृत्व था। निखिल आनंद ने कहा कि फिलहाल एक ओबीसी समाज से आने वाले शिक्षा मंत्री की राजनीतिक रूप से बलि चढ़ी है।
निखिल आनंद ने कहा कि देश की जनता को इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवाद के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक, इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई भी चल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के जरिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश की गई।
भाजपा नेता ने अपने बयान में कहा कि सड़क पर लोकतंत्र की बात करने वाले लोगों को संसद में चर्चा और संवाद से भागना नहीं चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी मुद्दे को लेकर विपक्ष के पास ठोस सवाल हैं तो उन्हें संसद के भीतर चर्चा और बहस के जरिए सामने रखा जाना चाहिए।
‘सड़क से आंदोलन और संसद से दूरी’ पर सवाल
निखिल आनंद ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर भी विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आंदोलन नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ हुए शाहीन बाग आंदोलन तथा किसान आंदोलन की राजनीतिक कड़ी जैसा था। उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष के कई दलों और अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े संगठनों की भूमिका रही।
हालांकि, यह सभी आरोप निखिल आनंद की ओर से लगाए गए हैं। विपक्षी दलों की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना अहम होगा। आंदोलन से जुड़े नेताओं और संगठनों ने पहले भी अपने प्रदर्शन को शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से जोड़कर देखा है।
विपक्षी दलों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
भाजपा नेता ने अपने बयान में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों और विपक्षी गठबंधन में शामिल अन्य दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक मुद्दे में बदलने की कोशिश की।
निखिल आनंद ने कहा कि केंद्र सरकार को घेरने के लिए अलग-अलग मुद्दों को एक साथ जोड़कर राजनीतिक माहौल तैयार किया जा रहा है। उन्होंने इसे देश की राजनीति में एक सोची-समझी रणनीति बताते हुए कहा कि जनता को ऐसे आंदोलनों और उनके पीछे की राजनीति को समझने की जरूरत है।
जंतर-मंतर के आंदोलन को लेकर लगाए गंभीर आरोप
निखिल आनंद ने अपने बयान में आंदोलन की विचारधारा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर शिक्षा के मुद्दे को सामने रखकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिसके पीछे भारतीय राष्ट्रवाद और हिंदुत्व विरोधी राजनीति को बढ़ावा देने वाली ताकतें काम कर रही थीं।
उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों और संगठनों पर कई तरह के आरोप लगाए और कहा कि अलग-अलग विचारधाराओं के लोग एक मंच पर आकर केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे थे। हालांकि, निखिल आनंद के इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई अलग से प्रमाण पेश नहीं किया। ऐसे में उनके बयान को राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
‘शिक्षा का मुद्दा सामने, राजनीति कुछ और’
भाजपा नेता ने कहा कि आम लोगों को देखने और सुनने में यह पूरा मामला शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा दिखाई देता है, लेकिन उनके अनुसार इसके पीछे राजनीतिक मकसद अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के जरिए राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई।
निखिल आनंद ने कहा कि किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी या छात्रों की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसे मुद्दों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि वह किसी भी आंदोलन को सिर्फ उसके सामने रखे गए मुद्दे के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की राजनीति को भी समझे।
सीमा और विदेशी फंडिंग के मुद्दे को भी जोड़ा
अपने बयान में निखिल आनंद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार देश की सीमाओं को सुरक्षित करने, घुसपैठ रोकने और विदेशी फंडिंग के जरिए होने वाली कथित अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की इन नीतियों से असहमत कुछ ताकतें अलग-अलग आंदोलनों के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं। भाजपा नेता ने इसे देश के भीतर और बाहर सक्रिय कुछ ताकतों से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए।
निखिल आनंद बोले- जनता को समझनी होगी ‘शातिर राजनीति’
निखिल आनंद ने कहा कि देशवासियों को इस तरह की राजनीति को समझने और उसके प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को आगे रखकर बड़े राजनीतिक लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर चर्चा जरूर होनी चाहिए, लेकिन किसी भी आंदोलन को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। भाजपा नेता ने जनता से अपील की कि वह देश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम को सावधानी से देखे और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर सोच-समझकर अपनी राय बनाए।
इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां विपक्षी खेमे की ओर से इसे छात्रों के आंदोलन और सरकार पर बने दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं भाजपा नेताओं की ओर से इसे अलग राजनीतिक नजरिए से पेश किया जा रहा है।
निखिल आनंद का बयान इसी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने अपने बयान में नीट विवाद, छात्र आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ओबीसी राजनीति से जोड़ने की कोशिश की है। अब इस बयान पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।
बयान के बाद सियासी घमासान बढ़ने के आसार
कुल मिलाकर, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता दिख रहा है। निखिल आनंद ने जहां पूरे घटनाक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओबीसी नेतृत्व के खिलाफ राजनीतिक अभियान बताया है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों की मांगों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बता सकता है।
ऐसे में अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राजनीतिक तौर पर किस तरह देखा जाएगा। क्या यह सिर्फ छात्रों के आंदोलन का नतीजा है या इसके पीछे व्यापक राजनीतिक दबाव भी काम कर रहा था? आने वाले दिनों में सामने आने वाली प्रतिक्रियाएं इस बहस को और ज्यादा स्पष्ट कर सकती हैं।
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