By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 07:34 PM
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके से बिहार आने की अपील की है। तेज प्रताप ने कहा कि वे बिहार आकर जनता की आवाज बनें और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए मजबूत जनआंदोलन खड़ा करें। उन्होंने इस लड़ाई में अपनी पार्टी और समर्थकों के पूर्ण समर्थन का भरोसा भी दिया।
तेज प्रताप ने अभिजीत दीपके से बिहार आने की अपील की
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए अभिजीत दीपके से यह विशेष अपील की। उन्होंने लिखा, “मैं, तेज प्रताप यादव, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके से यह विशेष अपील करता हूँ कि वे अविलंब बिहार की धरती पर आएं।” उन्होंने कहा कि बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आज एक कड़े और मजबूत जनआंदोलन की जरूरत है।
तेज प्रताप ने अपनी अपील को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अभिजीत दीपके बिहार आकर यहां की जनता की आवाज बनें और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का काम करें। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन की लड़ाई में उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल और उनके समर्थकों का पूर्ण और अटूट समर्थन अभिजीत दीपके के साथ रहेगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की जीत बताया
तेज प्रताप यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी छात्रों के संघर्ष से जोड़कर देखा। उन्होंने इसे युवाओं और छात्रों की मेहनत का नतीजा बताया। उनके बयान का भाव यह था कि जब युवाओं ने अपने अधिकार और अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठाई, तो आखिरकार सत्ता के गलियारों तक उसकी गूंज पहुंची।
‘मेहनत की स्याही का हिसाब मांगा तो कुर्सियों का गुरूर टूट गया’
तेज प्रताप ने अपने कथित पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज भरे अंदाज में कहा कि जब युवाओं ने अपनी मेहनत की स्याही का हिसाब मांगा, तो कुर्सियों का गुरूर भी जमीन पर आ गिरा। इस बयान के जरिए उन्होंने छात्र आंदोलन को युवाओं की ताकत और संघर्ष की जीत के तौर पर पेश किया।
छात्र आंदोलन के बाद आया बड़ा राजनीतिक बयान
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। अभिजीत दीपके इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे हैं और उनके नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बनाए रखा। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन से जुड़ी अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है।
अभिजीत दीपके ने भी दी इस्तीफे पर प्रतिक्रिया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने कहा कि सरकार को झुकाने के लिए आंदोलन की जरूरत थी और आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। उनके बयान से साफ है कि आंदोलन से जुड़े लोग इस इस्तीफे को अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, आंदोलन की बाकी मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर भी नजर बनी हुई है।
तेज प्रताप के बयान का राजनीतिक मतलब क्या है?
तेज प्रताप यादव लंबे समय से अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में अभिजीत दीपके को बिहार बुलाने की अपील को केवल छात्र आंदोलन के समर्थन के तौर पर नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि, इस बयान के बाद अभिजीत दीपके की ओर से बिहार आने या किसी नए आंदोलन का नेतृत्व करने को लेकर कोई स्पष्ट फैसला सामने नहीं आया है।
बिहार में आंदोलन की अपील ने बढ़ाई सियासी हलचल
फिलहाल तेज प्रताप यादव का कथित बयान सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की सफलता बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ तेज प्रताप यादव ने अभिजीत दीपके को बिहार आने का न्योता देकर आंदोलन को राज्य के राजनीतिक मुद्दों से जोड़ने की कोशिश की है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अभिजीत दीपके इस अपील पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या बिहार में किसी नए आंदोलन की जमीन तैयार होती है।
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