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नीट प्रोटेस्ट पर फिर गरमाया मामला, असम-बिहार-बंगाल में गिरफ्तारियों से CJP नाराज; 28 जुलाई तक का अल्टीमेटम

By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 02:50 PM

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए आंदोलन को खत्म करने के कुछ ही दिन बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अब छात्रों और दूसरे प्रदर्शनकारियों की कथित गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार को कहा कि असम, पश्चिम बंगाल और बिहार से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और गिरफ्तार किए जाने की खबरें मिल रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से 28 जुलाई तक लिखित गारंटी देने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कराने और दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है।

सौरव दास ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि संगठन को कई ऐसी रिपोर्टें मिल रही हैं, जिनमें छात्रों और दूसरे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग राज्य एजेंसियों की ओर से निशाना बनाए जाने, हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने की बात सामने आ रही है। उन्होंने खास तौर पर असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों से सामने आ रही खबरें चिंता बढ़ाने वाली हैं।

CJP बोली- आंदोलन वापस लेने का भरोसा था आधार
सौरव दास के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर में अपना आंदोलन इसी भरोसे पर वापस लिया था कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार वाले राज्यों में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनका कहना है कि सरकार की ओर से दिए गए इसी भरोसे के बाद संगठन ने बातचीत का रास्ता चुना और अपना आंदोलन रोकने का फैसला किया था।

कानूनी टीम को सक्रिय करने का दावा
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि संगठन ने प्रदर्शनकारियों को अकेला नहीं छोड़ा है। उनकी कानूनी टीम पहले से ही हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई के लिए काम कर रही है। इसके लिए संबंधित राज्यों के वकीलों के साथ संपर्क किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर प्रदर्शनकारियों को हर संभव कानूनी मदद देने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि यह काम आंदोलन के पहले दिन से ही किया जा रहा है।

केंद्र से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से हस्तक्षेप की अपील
सौरव दास ने केंद्र सरकार से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह का नाम लेते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के संबंध में दिए गए भरोसे को पूरा करना चाहिए। उनका कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित की जाए और देश के किसी भी हिस्से में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जबरदस्ती या बदले की कार्रवाई न हो।

दर्ज एफआईआर भी वापस लेने की मांग
सीजेपी ने केवल हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने की मांग नहीं की है, बल्कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई एफआईआर वापस लेने की भी मांग की है। सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया था, तो उस भरोसे के मुताबिक पहले से दर्ज मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए।

28 जुलाई तक लिखित गारंटी की मांग
सौरव दास ने केंद्र सरकार को उसकी कथित प्रतिबद्धता की याद दिलाते हुए कहा कि उसे मंगलवार, 28 जुलाई 2026 तक इस संबंध में लिखित गारंटी देनी है। उनके मुताबिक, आंदोलन रोकने का फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि बातचीत और सरकार के भरोसे के आधार पर लिया गया था। इसलिए अब सरकार से उस भरोसे को लिखित रूप में पूरा करने की अपेक्षा है।

बोले- भरोसा टूटा तो युवाओं में गलत संदेश जाएगा
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से किए गए भरोसे से पीछे हटना केवल संगठन के साथ विश्वास का सवाल नहीं होगा। इसका असर उन लाखों युवाओं पर भी पड़ेगा, जिन्होंने आंदोलन जारी रखने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि युवा केवल वादों से नहीं, बल्कि उन वादों के पूरा होने से सरकार पर भरोसा करते हैं।

प्रदर्शनकारियों से कहा- रुकिए, हम आपके साथ हैं
सौरव दास ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और दूसरे युवाओं से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकारें मौजूदा स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तेजी से कदम उठाएंगी।

सरकार को दी आगे कदम उठाने की चेतावनी
सीजेपी ने साफ कर दिया है कि अगर हिरासत में लिए गए और गिरफ्तार किए गए लोगों को जल्द रिहा नहीं किया गया तथा एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो संगठन आगे जरूरी कदम उठा सकता है। सौरव दास ने सभी हिरासत और गिरफ्तारी के मामलों में तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बदला आंदोलन का रुख
नीट पेपर लीक को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। 25 जुलाई को उनके इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद देशभर का आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया था। आंदोलन खत्म करने के पीछे सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने समेत कई आश्वासन मिलने की बात कही गई थी।

अब सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
अब सौरव दास के ताजा बयान के बाद नीट आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सीजेपी की मांगों में सबसे अहम बात 28 जुलाई तक लिखित गारंटी देने की है। संगठन का कहना है कि आंदोलन वापस लेने के बाद भी यदि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाता है या उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है, तो यह सरकार की ओर से दिए गए भरोसे पर सवाल खड़ा करेगा। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है और क्या राज्यों में दर्ज मामलों को वापस लेने तथा हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश जारी किए जाते हैं।

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नीट प्रोटेस्ट पर फिर गरमाया मामला, असम-बिहार-बंगाल में गिरफ्तारियों से CJP नाराज; 28 जुलाई तक का अल्टीमेटम

By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 02:50 PM

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए आंदोलन को खत्म करने के कुछ ही दिन बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अब छात्रों और दूसरे प्रदर्शनकारियों की कथित गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार को कहा कि असम, पश्चिम बंगाल और बिहार से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और गिरफ्तार किए जाने की खबरें मिल रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से 28 जुलाई तक लिखित गारंटी देने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कराने और दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है।

सौरव दास ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि संगठन को कई ऐसी रिपोर्टें मिल रही हैं, जिनमें छात्रों और दूसरे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग राज्य एजेंसियों की ओर से निशाना बनाए जाने, हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने की बात सामने आ रही है। उन्होंने खास तौर पर असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों से सामने आ रही खबरें चिंता बढ़ाने वाली हैं।

CJP बोली- आंदोलन वापस लेने का भरोसा था आधार
सौरव दास के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर में अपना आंदोलन इसी भरोसे पर वापस लिया था कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार वाले राज्यों में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनका कहना है कि सरकार की ओर से दिए गए इसी भरोसे के बाद संगठन ने बातचीत का रास्ता चुना और अपना आंदोलन रोकने का फैसला किया था।

कानूनी टीम को सक्रिय करने का दावा
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि संगठन ने प्रदर्शनकारियों को अकेला नहीं छोड़ा है। उनकी कानूनी टीम पहले से ही हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई के लिए काम कर रही है। इसके लिए संबंधित राज्यों के वकीलों के साथ संपर्क किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर प्रदर्शनकारियों को हर संभव कानूनी मदद देने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि यह काम आंदोलन के पहले दिन से ही किया जा रहा है।

केंद्र से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से हस्तक्षेप की अपील
सौरव दास ने केंद्र सरकार से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह का नाम लेते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के संबंध में दिए गए भरोसे को पूरा करना चाहिए। उनका कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित की जाए और देश के किसी भी हिस्से में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जबरदस्ती या बदले की कार्रवाई न हो।

दर्ज एफआईआर भी वापस लेने की मांग
सीजेपी ने केवल हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने की मांग नहीं की है, बल्कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई एफआईआर वापस लेने की भी मांग की है। सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया था, तो उस भरोसे के मुताबिक पहले से दर्ज मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए।

28 जुलाई तक लिखित गारंटी की मांग
सौरव दास ने केंद्र सरकार को उसकी कथित प्रतिबद्धता की याद दिलाते हुए कहा कि उसे मंगलवार, 28 जुलाई 2026 तक इस संबंध में लिखित गारंटी देनी है। उनके मुताबिक, आंदोलन रोकने का फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि बातचीत और सरकार के भरोसे के आधार पर लिया गया था। इसलिए अब सरकार से उस भरोसे को लिखित रूप में पूरा करने की अपेक्षा है।

बोले- भरोसा टूटा तो युवाओं में गलत संदेश जाएगा
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से किए गए भरोसे से पीछे हटना केवल संगठन के साथ विश्वास का सवाल नहीं होगा। इसका असर उन लाखों युवाओं पर भी पड़ेगा, जिन्होंने आंदोलन जारी रखने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि युवा केवल वादों से नहीं, बल्कि उन वादों के पूरा होने से सरकार पर भरोसा करते हैं।

प्रदर्शनकारियों से कहा- रुकिए, हम आपके साथ हैं
सौरव दास ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और दूसरे युवाओं से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकारें मौजूदा स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तेजी से कदम उठाएंगी।

सरकार को दी आगे कदम उठाने की चेतावनी
सीजेपी ने साफ कर दिया है कि अगर हिरासत में लिए गए और गिरफ्तार किए गए लोगों को जल्द रिहा नहीं किया गया तथा एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो संगठन आगे जरूरी कदम उठा सकता है। सौरव दास ने सभी हिरासत और गिरफ्तारी के मामलों में तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बदला आंदोलन का रुख
नीट पेपर लीक को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। 25 जुलाई को उनके इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद देशभर का आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया था। आंदोलन खत्म करने के पीछे सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने समेत कई आश्वासन मिलने की बात कही गई थी।

अब सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
अब सौरव दास के ताजा बयान के बाद नीट आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सीजेपी की मांगों में सबसे अहम बात 28 जुलाई तक लिखित गारंटी देने की है। संगठन का कहना है कि आंदोलन वापस लेने के बाद भी यदि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाता है या उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है, तो यह सरकार की ओर से दिए गए भरोसे पर सवाल खड़ा करेगा। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है और क्या राज्यों में दर्ज मामलों को वापस लेने तथा हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश जारी किए जाते हैं।

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