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जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर का खतरा! सोशलिस्ट पार्टी ने कहा- हजारों छात्रों की पढ़ाई बर्बाद न करे सरकार

By aryavartalive | Published: 27 July 2026 at 05:01 PM

रामपुर: मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को गिराने के आदेश के खिलाफ सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया, जिसमें राष्ट्रीय प्रधान महासचिव और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. संदीप पाण्डेय समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी ने सरकार से विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई रोकने और छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने देने की मांग की।

जौहर विश्वविद्यालय के मुद्दे पर सड़क पर उतरी सोशलिस्ट पार्टी
रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के विरोध में आयोजित धरने में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव डॉ. संदीप पाण्डेय, केंद्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष तहसीन अहमद, सोशलिस्ट किसान सभा के नेता राजीव यादव, अमित मौर्य समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्टी नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य को किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक विवाद की वजह से खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए।

38 इमारतों पर कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को लेकर रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई का आदेश दिए जाने के बाद यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। प्रशासन की ओर से इन इमारतों के निर्माण को कथित तौर पर स्वीकृत नक्शे और जरूरी मंजूरी से जुड़ी अनियमितताओं के दायरे में बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, विश्वविद्यालय को कथित तौर पर अनधिकृत मानी गई इमारतों को हटाने के लिए समय दिया गया है। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

धरने में नेताओं ने उठाया छात्रों की पढ़ाई का मुद्दा
धरना-प्रदर्शन के दौरान सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में परिसर की इमारतों को गिराने की कार्रवाई का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। पार्टी ने मांग की कि प्रशासन को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित हो या उनका भविष्य अनिश्चितता में चला जाए।

पार्टी बोली- कार्रवाई से पहले दूसरा रास्ता क्यों नहीं अपनाया गया?
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने विश्वविद्यालय में कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि अगर किसी भवन का निर्माण नियमों के खिलाफ हुआ है तो कानून के तहत उसका समाधान निकाला जा सकता है। पार्टी ने कहा कि ऐसे मामलों में जुर्माना, शुल्क या दूसरी कानूनी प्रक्रिया के जरिए भी समस्या का समाधान किया जा सकता है। ऐसे में सीधे इमारतों को गिराने की कार्रवाई क्यों की जा रही है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

डॉ. संदीप पाण्डेय समेत वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी
धरना-प्रदर्शन में डॉ. संदीप पाण्डेय की मौजूदगी ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना दिया। उनके साथ केंद्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष तहसीन अहमद, सोशलिस्ट किसान सभा के नेता राजीव यादव, मौर्य और पार्टी के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने विश्वविद्यालय को बचाने और छात्रों की शिक्षा जारी रखने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

सोशलिस्ट पार्टी ने राजनीतिक बदले का लगाया आरोप
पार्टी ने आरोप लगाया कि जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई केवल भवन निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक बदले की भावना भी हो सकती है। पार्टी का कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ा रहा है और इसी वजह से इसे लगातार राजनीतिक निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आधार भवन निर्माण से जुड़े नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया को बताया गया है।

विश्वविद्यालय पहले से विवादों के घेरे में
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों में रहा है। विश्वविद्यालय का संचालन मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है और इसके अध्यक्ष के तौर पर आजम खान का नाम सामने आता रहा है। जमीन, निर्माण और प्रशासनिक मामलों को लेकर भी विश्वविद्यालय पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब 38 इमारतों पर प्रस्तावित कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा
धरने के दौरान सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने केवल जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब देश के कई हिस्सों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उच्च शिक्षा की सुविधाओं की जरूरत है, तब पहले से मौजूद शैक्षणिक संस्थानों के सामने संकट खड़ा करना छात्रों के हित में नहीं है।

सरकारी स्कूलों की संख्या घटने का भी किया जिक्र
पार्टी ने सूचना के अधिकार से सामने आए आंकड़ों और नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की संख्या में कमी आई है। पार्टी के अनुसार, पिछले एक दशक में स्कूलों में कुल नामांकन में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोशलिस्ट पार्टी ने कहा कि सरकार को शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा मिल सके।

अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर भी उठाए सवाल
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के दौर में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। पार्टी ने दावा किया कि वहां मुस्लिम छात्रों के दाखिले को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, उस मामले में संस्थान की मान्यता और संचालन को लेकर अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग कारण और दावे सामने आए हैं।

पार्टी ने कहा- छात्रों का भविष्य सबसे अहम
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का कहना है कि किसी भी विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान में यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसका समाधान कानून के अनुसार किया जाना चाहिए। लेकिन कार्रवाई का असर छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। पार्टी ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हजारों छात्रों को राजनीतिक विवाद की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।

धरने के जरिए सरकार को दिया संदेश
धरना-प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार से जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की। पार्टी का कहना है कि यदि निर्माण से जुड़े नियमों में कोई कमी है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के जरिए दूर किया जा सकता है। इसके लिए पूरे शैक्षणिक परिसर को संकट में डालना उचित नहीं है।

अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
जौहर विश्वविद्यालय को लेकर विवाद अब राजनीतिक विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई, दोनों का मुद्दा बन गया है। एक ओर रामपुर विकास प्राधिकरण भवन निर्माण से जुड़े नियमों के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) इसे राजनीतिक द्वेष से जोड़कर विरोध कर रही है। पार्टी के धरना-प्रदर्शन के बाद अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर का खतरा! सोशलिस्ट पार्टी ने कहा- हजारों छात्रों की पढ़ाई बर्बाद न करे सरकार

By aryavartalive | Published: 27 July 2026 at 05:01 PM

रामपुर: मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को गिराने के आदेश के खिलाफ सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया, जिसमें राष्ट्रीय प्रधान महासचिव और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. संदीप पाण्डेय समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी ने सरकार से विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई रोकने और छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने देने की मांग की।

जौहर विश्वविद्यालय के मुद्दे पर सड़क पर उतरी सोशलिस्ट पार्टी
रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के विरोध में आयोजित धरने में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव डॉ. संदीप पाण्डेय, केंद्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष तहसीन अहमद, सोशलिस्ट किसान सभा के नेता राजीव यादव, अमित मौर्य समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्टी नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य को किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक विवाद की वजह से खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए।

38 इमारतों पर कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को लेकर रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई का आदेश दिए जाने के बाद यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। प्रशासन की ओर से इन इमारतों के निर्माण को कथित तौर पर स्वीकृत नक्शे और जरूरी मंजूरी से जुड़ी अनियमितताओं के दायरे में बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, विश्वविद्यालय को कथित तौर पर अनधिकृत मानी गई इमारतों को हटाने के लिए समय दिया गया है। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

धरने में नेताओं ने उठाया छात्रों की पढ़ाई का मुद्दा
धरना-प्रदर्शन के दौरान सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में परिसर की इमारतों को गिराने की कार्रवाई का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। पार्टी ने मांग की कि प्रशासन को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित हो या उनका भविष्य अनिश्चितता में चला जाए।

पार्टी बोली- कार्रवाई से पहले दूसरा रास्ता क्यों नहीं अपनाया गया?
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने विश्वविद्यालय में कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि अगर किसी भवन का निर्माण नियमों के खिलाफ हुआ है तो कानून के तहत उसका समाधान निकाला जा सकता है। पार्टी ने कहा कि ऐसे मामलों में जुर्माना, शुल्क या दूसरी कानूनी प्रक्रिया के जरिए भी समस्या का समाधान किया जा सकता है। ऐसे में सीधे इमारतों को गिराने की कार्रवाई क्यों की जा रही है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

डॉ. संदीप पाण्डेय समेत वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी
धरना-प्रदर्शन में डॉ. संदीप पाण्डेय की मौजूदगी ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना दिया। उनके साथ केंद्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष तहसीन अहमद, सोशलिस्ट किसान सभा के नेता राजीव यादव, मौर्य और पार्टी के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने विश्वविद्यालय को बचाने और छात्रों की शिक्षा जारी रखने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

सोशलिस्ट पार्टी ने राजनीतिक बदले का लगाया आरोप
पार्टी ने आरोप लगाया कि जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई केवल भवन निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक बदले की भावना भी हो सकती है। पार्टी का कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ा रहा है और इसी वजह से इसे लगातार राजनीतिक निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आधार भवन निर्माण से जुड़े नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया को बताया गया है।

विश्वविद्यालय पहले से विवादों के घेरे में
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों में रहा है। विश्वविद्यालय का संचालन मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है और इसके अध्यक्ष के तौर पर आजम खान का नाम सामने आता रहा है। जमीन, निर्माण और प्रशासनिक मामलों को लेकर भी विश्वविद्यालय पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब 38 इमारतों पर प्रस्तावित कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा
धरने के दौरान सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने केवल जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब देश के कई हिस्सों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उच्च शिक्षा की सुविधाओं की जरूरत है, तब पहले से मौजूद शैक्षणिक संस्थानों के सामने संकट खड़ा करना छात्रों के हित में नहीं है।

सरकारी स्कूलों की संख्या घटने का भी किया जिक्र
पार्टी ने सूचना के अधिकार से सामने आए आंकड़ों और नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की संख्या में कमी आई है। पार्टी के अनुसार, पिछले एक दशक में स्कूलों में कुल नामांकन में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोशलिस्ट पार्टी ने कहा कि सरकार को शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा मिल सके।

अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर भी उठाए सवाल
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के दौर में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। पार्टी ने दावा किया कि वहां मुस्लिम छात्रों के दाखिले को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, उस मामले में संस्थान की मान्यता और संचालन को लेकर अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग कारण और दावे सामने आए हैं।

पार्टी ने कहा- छात्रों का भविष्य सबसे अहम
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का कहना है कि किसी भी विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान में यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसका समाधान कानून के अनुसार किया जाना चाहिए। लेकिन कार्रवाई का असर छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। पार्टी ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हजारों छात्रों को राजनीतिक विवाद की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।

धरने के जरिए सरकार को दिया संदेश
धरना-प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार से जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की। पार्टी का कहना है कि यदि निर्माण से जुड़े नियमों में कोई कमी है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के जरिए दूर किया जा सकता है। इसके लिए पूरे शैक्षणिक परिसर को संकट में डालना उचित नहीं है।

अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
जौहर विश्वविद्यालय को लेकर विवाद अब राजनीतिक विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई, दोनों का मुद्दा बन गया है। एक ओर रामपुर विकास प्राधिकरण भवन निर्माण से जुड़े नियमों के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) इसे राजनीतिक द्वेष से जोड़कर विरोध कर रही है। पार्टी के धरना-प्रदर्शन के बाद अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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