By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 01:11 PM
नीट पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आ सकती है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सामने आए आरोप पहली नजर में ऐसे हैं, जिनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने पर विचार किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने छात्र आंदोलनों के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस की कथित ज्यादती से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लिया। अदालत का कहना था कि अगर किसी पक्ष ने तय नियमों और पुलिस प्रक्रिया से आगे जाकर कार्रवाई की है तो उस पर कानून के मुताबिक कदम उठना चाहिए। अदालत ने यह भी साफ किया कि कानून किसी एक पक्ष के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग नहीं हो सकता।
‘जिसने कानून हाथ में लिया, उसके खिलाफ कार्रवाई हो’
सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ संकेत दिया कि जांच का मकसद केवल पुलिस की भूमिका की पड़ताल तक सीमित नहीं होगा। अगर प्रदर्शन के दौरान किसी प्रदर्शनकारी या किसी अन्य व्यक्ति ने भी कानून तोड़ा है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि जिम्मेदारी तय करते समय किसी पक्ष के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के तहत कदम उठना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं करेगी अदालत
छात्रों की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और कथित नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कई जगह जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर, पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसे आरोप भी सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट अब पूरे घटनाक्रम को दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर देखना चाहता है।
जांच हुई तो सबूतों और वैज्ञानिक तरीके से होगी पड़ताल
अदालत ने संकेत दिया कि यदि स्वतंत्र जांच का रास्ता अपनाया जाता है तो उसका आधार केवल आरोप या वीडियो क्लिप नहीं होंगे। जांच उपलब्ध सबूतों, रिकॉर्ड और वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी, ताकि घटनाओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जांच के लिए गठित होने वाली टीम में कौन-कौन लोग शामिल होंगे, इस पर आगे फैसला लिया जा सकता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार अदालत किसी विशेष जांच दल के गठन पर विचार कर रही है, जिसकी अगुवाई किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश से कराने का विकल्प भी सामने आया है।
प्रदर्शनकारियों के डिजिटल डेटा को लेकर भी अदालत का रुख सख्त
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन में शामिल छात्रों से जुड़े डिजिटल डेटा और निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर भी अदालत ने अंतरिम दिशा-निर्देश दिए। अदालत ने इस तरह की जानकारी को सार्वजनिक किए जाने से रोकने पर जोर दिया है। इसके अलावा, जिन छात्रों का कोई आपराधिक पिछला रिकॉर्ड नहीं है और जिन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लिया गया है, उनकी रिहाई को लेकर भी अदालत ने निर्देश दिए हैं।
नाबालिग छात्रों की रिहाई पर भी सुप्रीम कोर्ट का जोर
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में हिरासत में लिए गए नाबालिग छात्रों को लेकर भी संवेदनशील रुख अपनाया है। अदालत की ओर से सामने आए निर्देशों में ऐसे छात्रों की रिहाई पर जोर दिया गया है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि अदालत प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और छात्रों के अधिकारों के बीच संतुलन को महत्वपूर्ण मान रही है।
‘लोकतंत्र में आंदोलन होते हैं’, पुलिस की कार्रवाई पर भी तय होंगे नियम
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। इससे पहले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा था कि केवल आंदोलन या प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पुलिस कार्रवाई के लिए एक समान और स्पष्ट प्रक्रिया की जरूरत पर भी जोर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसे हालात में बल प्रयोग को लेकर कोई भ्रम न रहे।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों की भूमिका की होगी जांच
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख यह संकेत देता है कि जांच का दायरा केवल छात्रों पर हुई कथित ज्यादती तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने और उन पर कथित हमलों से जुड़े आरोपों को भी जांच के दायरे में रखा जा सकता है। अदालत का स्पष्ट संदेश है कि अगर किसी ने कानून अपने हाथ में लिया है, चाहे वह प्रदर्शनकारी हो या पुलिस कार्रवाई में शामिल कोई व्यक्ति, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पूरे मामले में स्वतंत्र जांच की जरूरत पर गंभीरता दिखाई है और विशेष जांच दल गठित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। अदालत ने केंद्र और कई राज्यों से जवाब भी मांगा है। ऐसे में अगली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि जांच के लिए कौन सी व्यवस्था बनाई जाएगी, टीम की अगुवाई कौन करेगा और जांच का दायरा कितना व्यापक होगा। फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है कि नीट पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के आरोपों को अब अदालत ने गंभीरता से लिया है और मामले की निष्पक्ष पड़ताल की दिशा में कदम बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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