By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 09:06 PM
पीठ में लगी गोली पेट के अंदर जाकर फंस गई थी। हालत गंभीर होने की आशंका के बीच जमुई के 21 वर्षीय युवक को पटना के फोर्ड हॉस्पिटल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बिना बड़ा चीरा लगाए लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करने का फैसला किया। करीब एक घंटे चली जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने पेट में फंसी गोली सफलतापूर्वक बाहर निकाल दी। राहत की बात यह रही कि गोली लगने के बावजूद युवक के प्रमुख आंतरिक अंग सुरक्षित थे। इलाज के बाद युवक की हालत स्थिर है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।**
मिली जानकारी के अनुसार, जमुई निवासी 21 वर्षीय गौरव कुमार (बदला हुआ नाम) को पीछे से गोली मारी गई थी। गोली शरीर को भेदते हुए पेट के दाहिने हिस्से के निचले भाग तक पहुंच गई और वहीं फंस गई। गोली लगने के बाद परिजन बिना देर किए युवक को इलाज के लिए पटना के फोर्ड हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने तत्काल उसकी जांच शुरू की।
सीटी स्कैन में सामने आई राहत की खबर
अस्पताल में युवक का सीटी स्कैन कराया गया। जांच रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टरों को पता चला कि गोली पेट के अंदर मौजूद होने के बावजूद किसी प्रमुख आंतरिक अंग को गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा था। यह स्थिति चिकित्सकों के लिए राहत की बात थी, क्योंकि गोली लगने की ऐसी घटनाओं में अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। जांच के आधार पर डॉक्टरों ने आगे की सर्जरी की योजना तैयार की।
बिना देरी किए सर्जरी का लिया फैसला
चिकित्सकों ने स्थिति को देखते हुए गोली को शरीर के अंदर छोड़ने के बजाय उसे निकालने का फैसला किया। इसके लिए लेप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में शरीर पर बड़ा चीरा लगाने के बजाय छोटे छेद के जरिए सर्जरी की जाती है। डॉक्टरों की टीम ने सावधानी के साथ ऑपरेशन शुरू किया और पेट के अंदर फंसी गोली तक पहुंचने के बाद उसे बाहर निकाल लिया।
करीब एक घंटे चली जटिल सर्जरी
ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने पेरिटोनियम को सावधानीपूर्वक खोलकर गोली को बाहर निकाला। पूरी सर्जरी करीब एक घंटे तक चली। डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन सफल रहा और इस दौरान मरीज की स्थिति को लगातार निगरानी में रखा गया। सर्जरी के बाद युवक की हालत में सुधार हुआ और चिकित्सकों ने उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा।
समय पर अस्पताल पहुंचना बना सबसे बड़ा कारण
फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक एवं जनरल सर्जन डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि गोली लगने के तुरंत बाद युवक को अस्पताल पहुंचा दिया गया था। उनके अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचने और तत्काल जांच व उपचार शुरू होने से मरीज की स्थिति को संभालना संभव हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि शुरुआती जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि गोली ने शरीर के अंदर किस हिस्से को प्रभावित किया है।
डॉक्टरों की टीम ने मिलकर किया ऑपरेशन
युवक की सर्जरी फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक एवं जनरल सर्जन डॉ. संतोष कुमार, डॉ. आलोक कुमार और डॉ. प्रभात रंजन की टीम ने की। चिकित्सकों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार की रणनीति तय की और लेप्रोस्कोपिक तकनीक के जरिए शरीर में फंसी गोली को सफलतापूर्वक निकाल दिया।
अब स्वस्थ है युवक
सर्जरी के बाद युवक की हालत में सुधार हुआ और वह चिकित्सकों की निगरानी में स्वस्थ रहा। इलाज पूरा होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों के अनुसार, गोली लगने के बावजूद प्रमुख आंतरिक अंगों के सुरक्षित रहने और समय पर उपचार मिलने से युवक की स्थिति को नियंत्रित करना संभव हुआ।
गोली लगने के मामलों में समय पर इलाज जरूरी
चिकित्सकों का कहना है कि गोली लगने के मामलों में चोट की गंभीरता केवल बाहर दिखाई देने वाले घाव से तय नहीं होती। गोली शरीर के अंदर किस दिशा में गई और उसने किन अंगों को प्रभावित किया, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाता है। ऐसे में गोली लगने के बाद मरीज को घरेलू उपचार या देरी करने के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी होता है। इस मामले में भी समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण चिकित्सकों को जल्द जांच करने और उपचार शुरू करने का मौका मिला।
जटिल सर्जरी के बाद मिली नई जिंदगी
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पीछे से लगी गोली पेट के अंदर जाकर फंस गई थी, लेकिन प्रमुख आंतरिक अंग गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुए। डॉक्टरों ने समय रहते जांच कर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए गोली निकाल दी। करीब एक घंटे की इस जटिल प्रक्रिया के सफल होने के बाद 21 वर्षीय युवक अब स्वस्थ है और अस्पताल से अपने घर लौट चुका है।
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