By aryavartalive | Published: 29 July 2026 at 09:13 AM
लखनऊ: रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को गिराने की कार्रवाई के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने लखनऊ में प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव संदीप पाण्डेय के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध किया गया। संदीप पाण्डेय ने कहा कि किसी भी तरह की अनियमितता है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, लेकिन किसी शिक्षण संस्थान को ध्वस्त करने की कार्रवाई से हजारों छात्रों का भविष्य संकट में डालना उचित नहीं है।
संदीप पाण्डेय ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को पूरी तरह गिराने की तैयारी की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने लखनऊ में प्रदर्शन कर सरकार से कार्रवाई रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा से जुड़े किसी भी संस्थान के खिलाफ फैसला लेने से पहले सभी कानूनी पहलुओं और छात्रों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
‘हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी’
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव ने कहा कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि विश्वविद्यालय के खिलाफ ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई होती है तो इसका सीधा असर वहां पढ़ने वाले छात्रों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसी विवाद या अनियमितता की कीमत छात्रों को नहीं चुकानी चाहिए।
‘अनियमितता है तो कानूनी रास्ता अपनाएं’
संदीप पाण्डेय ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय परिसर में किसी निर्माण को लेकर कोई अनियमितता है तो संबंधित विभाग को कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले पूरी जांच हो, संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बाद ही किसी तरह का अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
राजनीतिक दुर्भावना का भी लगाया आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की खबरों के पीछे राजनीतिक दुर्भावना की आशंका दिखाई देती है। संदीप पाण्डेय ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक प्रतिशोध का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई कानून और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कारणों से।
विश्वविद्यालय को मान्यता मिलने पर उठाया सवाल
संदीप पाण्डेय ने यह भी सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय के निर्माण या परिसर में शुरू से ही गंभीर अनियमितताएं थीं तो उसे मान्यता कैसे मिली और विश्वविद्यालय का दर्जा किस आधार पर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित अधिकारियों को इस सवाल का जवाब देना चाहिए। उनके मुताबिक, पूरे मामले की पारदर्शी तरीके से जांच होने पर ही स्थिति साफ हो सकती है।
‘अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा’
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के नेता ने कहा कि मौजूदा समय में अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में सभी शिक्षण संस्थानों के साथ कानून के तहत समान व्यवहार होना चाहिए। किसी संस्थान की पहचान के आधार पर कार्रवाई का अलग पैमाना नहीं बनाया जा सकता।
दूसरे संस्थान का उदाहरण भी दिया
संदीप पाण्डेय ने जम्मू-कश्मीर स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कथित अनियमितताओं के बावजूद संस्थान को गिराने जैसी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अलग-अलग मामलों में अलग-अलग रवैया अपनाया जाता है तो इसके पीछे का आधार क्या है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। सरकारी विद्यालयों की घटती संख्या और छात्रों के नामांकन में कमी जैसे मुद्दे चिंता का विषय हैं। ऐसे समय में किसी उच्च शिक्षण संस्थान को बंद करने या ध्वस्त करने की कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर कर सकती है।
‘सरकार शिक्षा पर ध्यान दे’
संदीप पाण्डेय ने कहा कि सरकार को नए शिक्षण संस्थान खोलने, मौजूदा संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को बेहतर शिक्षा देने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जिनसे हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो और उनका भविष्य अनिश्चितता में पड़ जाए।
पार्टी ने कार्रवाई रोकने की मांग की
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने मांग की है कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को अपना संचालन जारी रखने दिया जाए। पार्टी का कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले निष्पक्ष और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। संदीप पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद का समाधान कानून के दायरे में होना चाहिए और इसका खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।
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